हिमाचल के 380 स्कूलों में सृजित नहीं डीपीई के पद बच्चों में कैसे बढ़ेगा खेलों के प्रति रुझान #news4
March 15th, 2022 | Post by :- | 142 Views

नाहन : हिमाचल प्रदेश के 380 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में डीपीई के पद सृजित नहीं हैं। ऐसे में बच्चों में खेलों के प्रति कैसे रुझान बढ़ेगा, ये बड़ा सवाल है। स्कूलों में डीपीई के पद न भरे जाने से न तो बच्चे खेलों में सक्षम हो पा रहे हैं और न ही मानसिक विकास हो रहा है। जबकि, भारत सरकार के फिट ​इंडिया मूवमेंट को दो साल का वक्त हो चला है। हिमाचल के स्कूलों में डीपीई समेत पीईटी के खाली पड़े पदों के चलते फिट इंडिया मूवमेंट का मकसद भी परवान नहीं चढ़ पा रहा है। प्रदेश सरकार ने भी विधानसभा सत्र में इस बात को माना है कि प्रदेश में 350 के करीब डीपीई के पद खाली हैं। साथ ही सरकार ने तर्क भी दिया कि डीपीई के पद उन्हीं स्कूलों में सृजित किए जाते हैं, जिनमें विभागीय निर्धारित मानकों के अनुसार ग्यारवहीं कक्षा में छात्रों की संख्या 30 या इससे अधिक हो।

सरकार के इस जवाब से शारीरिक शिक्षक संघ भी आहत है। शारीरिक शिक्षक संघ जिला सिरमौर के अध्यक्ष सुरेश कांत भंडारी, महासचिव जंगवीर, अनुबंध से नियमित अध्यापक संघ जिला सिरमौर के अध्यक्ष नरेश कुमार ने स्कूलों में शारीरिक शिक्षा विषय पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 30 से कम होने की शर्त हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 380 के करीब वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में डीपीई के पद सृजित नहीं है। 70 के लगभग स्कूलों में डीपीई के के पद रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में कुल मिलाकर 450 स्कूलों में डीपीई नहीं है। दो हजार के करीब मिडल व हाई स्कूलों में पीईटी के पद रिक्त हैं। इन पाठशालाओं में खेल प्रतियोगिताओं की तैयारियां कैसे होगी। कई स्कूलों में पीईटी से काम चलाया जा रहा है।

अगर सैंकड़ों की संख्या में डीपीई और पीईटी के पद रिक्त रहेंगे, तो बच्चों मे खेलकूद के प्रति रुझान पैदा करना तो दूर, अनुशासन की कमी भी स्पष्ट नजर आएगी। लिहाजा, प्रदेश के सभी वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं डीपीई के पद सृजित किए जाने चाहिए। संघ का कहना है कि सरकार व विभाग नए-नए नियम बनाकर बच्चों को खेल गतिविधियों से वंचित किया जा रहा है। शिक्षा उपनिदेशक सिरमौर कर्मचंद धीमान ने बताया कि पद सृजित करने और भरने का मामला सरकार से जुड़ा है।

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