कैसे हुई हिन्दू शब्द की उत्पत्ति और क्या है इसका अर्थ #news4
November 14th, 2022 | Post by :- | 75 Views
कोई सा भी धर्म हो, जाति या समाज हो उसके कई नाम होते हैं। हिन्दू शब्द की उत्पत्ति और इसके अर्थ को लेकर इस समय बहुत विवाद चल रहे हैं। हाल ही में दक्षिण में एक बड़े अभिनेता ने इसको लेकर विवाद खड़ा किया था और बाद में कर्नाटक के एक कांग्रेस नेता ने इस शब्द को फारसी का बताकर कहा कि इसका बहुत गंदा अर्थ निकलता है। इससे पहले हिन्दू और हिन्दुत्व को लेकर पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने भी बयान दिया था। आओ इस शब्द पर एक नज़र डालते हैं।
Hindu shabd ki utpatti kab hui : हिन्दू धर्म को लेकर लोगों के मन में कुछ सवाल हो सकते हैं?
* क्या ‘हिन्दू’ शब्द की उत्पत्ति सिन्धु के कारण नहीं हुई?
* क्या सिन्धु नदी के आसपास रहने वालों को ईरानियों ने ‘हिन्दू’ कहना शुरू किया, क्योंकि उनकी जुबान से ‘स’ का उच्चारण नहीं होता था?
* क्या ‘हिन्दू’ शब्द विदेशियों द्वारा दिया गया शब्द है?
* क्या ‘इन्दु’ शब्द से ‘हिन्दू’ शब्द बना?
* क्या प्राचीनकाल से ही ‘हिन्दू’ शब्द प्रचलित था?
‘सिन्धु’ से बना ‘हिन्दू’ : सवाल यह कि ‘हिन्दू’ शब्द ‘सिन्धु’ से कैसे बना? भारत में बहती थी एक नदी जिसे सिन्धु कहा जाता है। भारत विभाजन के बाद अब वह पाकिस्तान का हिस्सा है। ऋग्वेद में सप्त सिन्धु का उल्लेख मिलता है। वह भूमि जहां आर्य रहते थे। भाषाविदों के अनुसार हिन्द-आर्य भाषाओं की ‘स्’ ध्वनि (संस्कृत का व्यंजन ‘स्’) ईरानी भाषाओं की ‘ह्’ ध्वनि में बदल जाती है इसलिए सप्त सिन्धु अवेस्तन भाषा (पारसियों की धर्मभाषा) में जाकर हफ्त हिन्दू में परिवर्तित हो गया (अवेस्ता : वेंदीदाद, फर्गर्द 1.18)। इसके बाद ईरानियों ने सिन्धु नदी के पूर्व में रहने वालों को ‘हिन्दू’ नाम दिया। ईरान के पतन के बाद जब अरब से मुस्लिम हमलावर भारत में आए तो उन्होंने भारत के मूल धर्मावलंबियों को हिन्दू कहना शुरू कर दिया। इस तरह हिन्दुओं को ‘हिन्दू’ शब्द मिला।
लेकिन क्या यह सही है कि हिन्दुओं को हिन्दू नाम दिया ईरानियों और अरबों ने?
पारसी धर्म की स्थापना आर्यों की एक शाखा ने 700 ईसा पूर्व की थी। मात्र 700 ईसापूर्व? बाद में इस धर्म को संगठित रूप दिया जरथुस्त्र ने। इस धर्म के संस्थापक थे अत्रि कुल के लोग। यदि पारसियों को ‘स्’ के उच्चारण में दिक्कत होती तो वे सिन्धु नदी को भी हिन्दू नदी ही कहते और पाकिस्तान के सिंध प्रांत को भी हिन्द कहते और सि‍न्धियों को भी हिन्दू कहते। आज भी सिन्धु है और सिन्धी भी। दूसरी बात यह कि उनके अनुसार फिर तो संस्कृत का नाम भी हंस्कृत होना चाहिए?
कुछ लोगों का मानना है कि ‘हिन्दू’ शब्द का जिक्र पारसियों की किताब से पूर्व की किताबों में भी मिलता है। उस किताब का नाम है विशालाक्ष शिव द्वारा लिखित बार्हस्पत्य शास्त्र जिसका संक्षेप बृहस्पतिजी ने किया। बाद में वराहमिहिर रचित ‘बृहत्संहिता’ में भी इसका उल्लेख मिलता है। बृहस्पति आगम ने भी इसका उल्लेख किया। हालांकि कुछ लोगों के अनुसार यह किताब कब लिखी गई इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है।
अलबरूनी के ग्रन्थ से भी लगता है सिन्धु और हिन्दू शब्द दो अलग उच्चारण वाले शब्द हैं। अलबरूनी ने लिखा है कि उसके प्रदेश से ‘सिंध में जाने के लिए हिमरोझ उर्फ़ सिजिस्थान से होकर जाना पड़ता है किन्तु यदि हिन्द में पहुंचना हो तो काबुल होकर जाना पड़ता है।’ (पृष्ठ 198, खंड 1, एडवर्ड सचाऊ द्वारा अनुदित Al Baruni’s India) उपर्युक्त से स्पष्ट है सिन्धु और हिन्दू दो अलग शब्द हैं।
इन्दु से बना हिन्दू : चीनी यात्री ह्वेनसांग के समय में ‘हिन्दू’ शब्द प्रचलित था। यह माना जा सकता है कि ‘हिन्दू’ शब्द ‘इन्दु’ जो चन्द्रमा का पर्यायवाची है, से बना है। चीन में भी ‘इन्दु’ को ‘इंतु’ कहा जाता है। भारतीय ज्योतिष चन्द्रमा को बहुत महत्व देता है। राशि का निर्धारण चन्द्रमा के आधार पर ही होता है। चन्द्रमास के आधार पर तिथियों और पर्वों की गणना होती है। अत: चीन के लोग भारतीयों को ‘इंतु’ या ‘हिन्दू’ कहने लगे। मुस्लिम आक्रमण के पूर्व ही ‘हिन्दू’ शब्द के प्रचलित होने से यह स्पष्ट है कि यह नाम पारसियों या मुसलमानों की देन नहीं है। मैगस्थनीज के इंडिया शब्द की उत्पत्ति भी इंदु से ही हुई होगी।
इन्दु से इंडिया : इतिहास के शोधकर्ता नरेन्द्र पिपलानी जिन्होंने इतिहास की मृत्यु नामक पुस्तक लिखी है उनका मानना है कि हिन्द शब्द की उत्पत्ति वेदों में वर्णित इन्द्र का अपभ्रंश है। ग्रीक के आर्यों द्वारा दिया नाम इन्दका (Indica) रोमन भाषा में जाकर इन्देय तथा बाद में यही शब्द ब्रिटेन की अंग्रेजी भाषा में इंडिया बना। भारतवर्ष में आर्यावर्त नामक एक क्षेत्र था जिसका राजा इन्द्र हुआ करता था। इसी इन्द्र के नाम के कारण ही हिन्द और बाद में हिन्दू हो गया। उल्लेखनीय है कि इन्द्र राजा का पारस्य देश के राजा वृत्तासुर से बहुत झगड़ा चलता रहता था। यह भी विचारणीय है कि जर्मन और रशियन लोगों के द्वारा आज भी भारत को इंदर (Inder) के रूप में याद रख जाता है।
हिमालय से हिन्दू : एक अन्य विचार के अनुसार हिमालय के प्रथम अक्षर ‘हि’ एवं ‘इन्दु’ का अंतिम अक्षर ‘न्दु’। इन दोनों अक्षरों को मिलाकर शब्द बना ‘हिन्दू’ और यह भू-भाग हिन्दुस्थान कहलाया। ‘हिन्दू’ शब्द उस समय धर्म की बजाय राष्ट्रीयता के रूप में प्रयुक्त होता था। चूंकि उस समय भारत में केवल वैदिक धर्म को ही मानने वाले लोग थे और तब तक अन्य किसी धर्म का उदय नहीं हुआ था इसलिए ‘हिन्दू’ शब्द सभी भारतीयों के लिए प्रयुक्त होता था। भारत में हिन्दुओं के बसने के कारण कालांतर में विदेशियों ने इस शब्द को धर्म के संदर्भ में प्रयोग करना शुरू कर दिया।
श्लोक : ‘हिमालयात् समारभ्य यावत् इन्दु सरोवरम्। तं देवनिर्मितं देशं हिन्दुस्थानं प्रचक्षते॥’- (बृहस्पति आगम)
अर्थात : हिमालय से प्रारंभ होकर इन्दु सरोवर (हिन्द महासागर) तक यह देव निर्मित देश हिन्दुस्थान कहलाता है।
हिन्दू शब्द का अर्थ :
पहला अर्थ-
श्लोक में कहा गया है:-
ॐकार मूलमंत्राढ्य: पुनर्जन्म दृढ़ाशय:
गोभक्तो भारतगुरु: हिन्दुर्हिंसनदूषक:।
हिंसया दूयते चित्तं तेन हिन्दुरितीरित:।
‘ॐकार’ जिसका मूल मंत्र है, पुनर्जन्म में जिसकी दृढ़ आस्था है, भारत ने जिसका प्रवर्तन किया है तथा हिंसा की जो निंदा करता है, वह हिन्दू है।- (बृहस्पति आगम)
दूसरा अर्थ : वे लोग जो विदेशियों के द्वारा बताए गए इतिहास पर यकीन करते हैं उनके अनुसार हिन्दू शब्द का अर्थ होता है काफिर, बुतपरस्त, काला, लुटेरा आदि कुत्सित होता है। इसीलिए सनातन धर्म को हिन्दू शब्द से जोड़कर नहीं देखा जाता है।
हिन्दुकुश पर्वत क्षेत्र से जुड़ा हिन्दू शब्द का इतिहास : कुछ इतिहासकारों के अनुसार हिन्दू शब्द पारसियों की देने हैं। वे सिंध से जुड़े संपूर्ण क्षेत्र को हिन्दू भूमि मानते थे। बाद में जब वे पारसी मुसलमान बन गए तो उन्होंने हिन्दू शब्द के साथ काफीर जोड़ना शुरू कर दिया। हिन्दुकुश पर्वत माला के इतिहास से ही भी इस शब्द का अर्थ निहलकर आता है।
हिन्दूकुश पर्वतमाला को पहले हिन्दूकुश नहीं कहते थे। यह प्राचीन भारत में पारियात्र पर्वत कहलाता था। कुछ विद्वान इसे परिजात पर्वत भी कहते हैं। अरबों द्वारा इस क्षेत्र को कब्जे में लेने के बाद इस क्षेत्र का नाम बदल गया। यह पर्वतमाला सिल्क रूट का एक हिस्सा है। इसमें बहुत से दर्रे हैं जिसके उस पार कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, चीन, रशिया, मंगोलिया, रशिया आदि जगह जा सकते हैं। हिन्दूकुश के दर्रों से सीधे चीन जाने वाला रास्ता था। लेकिन इन दर्जें में काफिले खो जाते थे।
इसका दूसरा नाम हिन्दू केश भी था। केश का अर्थ अंतिम सिरा। इसे हिन्दू केश इसलिए कहते थे कि यहां भारत की सीमा का अंत होता है। केश का अर्थ होता है अंत। जैसे हमारे शरीर में केश (बाल) अंतिम सिरे के समान होते हैं। यहां तक भारत में रहने वाले हिन्दुओं का क्षेत्र था अर्थात हिन्दुओं के क्षेत्र की सीमा का अग्रभाग। यह भी कहते हैं कि यहां भगवान राम के एक बड़े बेटे कुश ने तपस्या ‍की थी। इसीलिए इस कुश कहने लगे।
पश्चिमोत्तर भारत में विदेशियों का आक्रमण मौर्योत्तर काल में सर्वाधिक हुआ। सबसे पहले इस क्षेत्र पर यूनानियों ने आक्रमण किया। फिर सिकंदर ने जब इसे अपने कब्जे में ले लिया तो इसका नाम यूनानी भाषा में ‘कौकासोश इन्दिकौश’ यानी ‘भारतीय पर्वत’ बुलाया जाने लगा। बाद में इनका नाम ‘हिन्दूकुश’, ‘हिन्दू कुह’ और ‘कुह-ए-हिन्दू’ पड़ा। ‘कुह’ या ‘कोह’ का मतलब फारसी में ‘पहाड़’ होता है। बहुत से तुर्की, चीनी और अरब के लोग जो यहां आते-जाते थे वे क्षेत्र शब्द नहीं बोल पाते थे। क्षेत्र को छेत्र कहते थे। क+श+त्र उक्त तीन शब्द से मिलकर बना क्षे‍त्र इसलिए कुछ लोग हिन्दू कशेत्र भी कहते थे। इस तरह यह क्षे‍त्र शब्द बोलने वाले लोगों के कारण बिगड़ता गया। क्ष और त्र बोलना आम लोगों के लिए थोड़ा कठिन था इसलिए इसमें से त्र भी हटा दिया गया और रह गया हिन्दू केश।
इस तरह बदला हिन्दू शब्द का अर्थ : सन् 1333 ईस्वीं में इब्नबतूता के अनुसार हिन्दुकुश का मतलब ‘मारने वाला’ था। इसका मतलब था कि यहां से गुजरने वाले लोगों में से अधिकतर ठंड और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण मर जाते थे। लेकिन इब्नबतूता की इस बात का कुछ लोगों ने गलत अर्थ भी निकाला? उनके अनुसार उत्तरी भारतीय उपमहाद्वीप पर अरबों-तुर्कों के कब्जे के बाद हिन्दूओं को गुलाम बनाकर इन पर्वतों से ले जाया जाता था और उनमें से बहुत से हिन्दू यहां बर्फ में मर जाया करते थे। इस तरह की बातें करने वालों ने खुदकुशी से इस शब्द का अर्थ लिया। यहां हिन्दू खुदकुशी कर लेते थे इसलिए पहले हिन्दूकुशी और फिर हिन्दूकुश हो गया।
माना जाता है कि तैमूरलंग जब एक लाख गुलामों को भारत से समरकंद ले जा रहा था तो एक ही रात में अधिकतर लोग ‘हिन्दू-कोह’ पर्वत की बर्फीली चोटियों पर सर्दी से मर गए थे। इस घटना के बाद उस पर्वत का नाम ‘हिन्दूकुश’ (हिन्दुओं को मारने वाला) पड़ गया था। लेकिन हिन्दूकुश नाम तो सिकंदर के पहले से ही प्रसिद्ध है? फिर हिन्दुओं के मरने से यह नाम कैसे पड़ा, यह समझ से परे है।
हिन्दू शब्द से पहले कौनसा शब्द था प्रचलित : भारत में हिन्दू शब्द से पहले दो शब्द प्रचलित थे। पहला वैदिक और दूसरा सनातन। आर्य और दृविड़ शब्द का हिन्दू धर्म या सनातन धर्म से कोई लेना देना नहीं है। यहां पहले हम सनातन शब्द को समझे।
सनातन शब्द का अर्थ :
‘यह पथ सनातन है। समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से पैदा हुए हैं तथा प्रगति की है। हे मनुष्यों आप अपने उत्पन्न होने की आधाररूपा अपनी माता को विनष्ट न करें।’- (ऋग्वेद-3-18-1)
सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो, सदा के लिए सत्य हो। जिन बातों का शाश्वत महत्व हो वही सनातन कही गई है। जैसे सत्य सनातन है। सत्यम शिवम सुंदरम ही सनातन है। वह सत्य जो अनादि काल से चला आ रहा है और जिसका कभी भी अंत नहीं होगा वह ही सनातन या शाश्वत है। जिनका न प्रारंभ है और जिनका न अंत है उस सत्य को ही सनातन कहते हैं। यही सनातन धर्म का सत्य है। वैदिक या हिंदू धर्म को इसलिए सनातन धर्म कहा जाता है।
।।ॐ।।असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योर्तिगमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय।।- वृहदारण्य उपनिषद
भावार्थ : अर्थात हे ईश्वर मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो, अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से अमृत की ओर ले चलो।
आर्य शब्द का अर्थ : आर्य का अर्थ होता है श्रेष्ठ। अधिकतर लोगों ने या कहें कि हमारे तथा‍कथित जाने-माने इतिहासकारों ने लिखा है कि आर्य एक जाति थी, जो मध्य एशिया से भारत में आई थी और जिसने यहां के दास और दस्यु को हाशिये पर धकेलकर राज्य किया था। उनकी यह धारणा बिलकुल ही गलत है। यहां यह बताना जरूरी है कि आर्य नाम की कोई जाति नहीं थी। आर्य नाम से कोई धर्म भी नहीं था। आर्य उन लोगों को कहा जाता था, जो वेदों को मानते थे। और जो वेदों को नहीं मानते थे उन्हें अनार्य कहा जाता था। वेदों को मानने वालों में भारत की कई जातियों के लोग शामिल थे। आर्यों के बारे में पश्‍चिम का मत पूर्णत: गलत है। आर्यों के काल में ऐसे भी कई आर्य थे (‍जिनके पूर्वज वेद को मानकर ही आर्य कहलाए थे)। जो वेदों को नहीं मानते थे फिर भी वे आर्य कहलाते थे, जैसे आज ऐसे कई हिन्दू हैं, जो नास्तिक हैं फिर भी है तो हिन्दू ही। यहां यह बताना जरूरी है कि शूद्र भी आर्य थे। इसके सैकड़ों उदाहरण शास्त्रों में मिलेंगे।
(मैत्रेयी संहिता 4-2-7-10) पंचविंश ब्राह्मण (6-1-11) ऋग्वेद (7-8-6-7; 8-19-36; 8-56-3) से ज्ञात होता था कि आर्य भी गुलाम होते थे। अतएव पश्चिमी मत कि शूद्र गुलाम होते थे सर्वथा गलत है। पश्चिम के इतिहासकारों ने लिखा कि मध्य एशिया के आर्यों द्वारा जब भारत पर कब्जा किया तब दास-दस्यु जीत लिए गए और वे लोग दास बना लिए गए और वही शूद्र कहलाए। उक्त इतिहासकारों का यह मत गलत है।

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