मां भलेई की प्रतिमा को पसीना आए तो समझो पूरी होगी मन्नत, श्रद्धालुओं की आस्‍था का केंद्र है ये मंदिर #news4
June 27th, 2022 | Post by :- | 86 Views

डलहौजी : देवधरा हिमाचल में अनगिनत धार्मिक स्थल स्थित हैं और काफी संख्या में धार्मिक स्थलों की अपनी विशिष्ट पहचान व पौराणिक इतिहास है ऐसा ही एक मंदिर जिला चंबा के भलेई गांव में स्थित माता भद्रकाली भलेई का मंदिर है जो कि सैंकड़ों वर्षों से अपनी एक अनूठी विशिष्टता के लिए भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र है। मंदिर की प्रमुख विशेषता यह है कि इस मंदिर में सच्चे मन से शीश नवाने वाले भक्तों की हर मुरग जागती ज्योत के नाम से विख्यात मां भलेई अवश्य पूरी करती है और मन्‍नत मांगने वाले भक्त को मन्नत पूरी होने का संकेत भी मां भलेई द्वारा दिया जाता है। और संकेत यह होता है कि मां भद्रकाली भलेई की स्वयंभू प्रकट काले रंग की पत्थर की चतुर्भुजा प्रतिमा पर पसीना आता है। प्रतिमा पर पसीना आए तो संकेत यह है कि मांगी गई मन्नत अवश्य पूरी होगी।इसलिए मंदिर में पहुंचने वाले भक्त मन्नत मांगने के बाद मन्नत पूरी होने का संकेत लेने के लिए हाथ जोड़े मां भलेई के गर्भ गृह के बाहर बैठ इंतजार करते हैं।

कैसे पहुंचे भलेई

समुद्रतल से लगभग 3800 फीट की ऊंचाई पर बसे भलेई गांव में स्थित माता भलेई का मंदिर स्थित है। चंबा व सलूणी से यह मंदिर करीब 40 किलोमीटर दूर, जबकि डलहौजी से करीब 35 किलोमीटर दूर स्थित है। दूसरे राज्यों से भक्त पठानकोट से बनीखेत वाया गोली चौहड़ा सड़क होकर अथवा बनीखेत से वाया खैरी मार्ग होते हुए मंदिर आ सकते हैं। मंदिर तक बस , टैक्सी अथवा निजी वाहनों से पहुंचा जा सकता है।

क्या है मंदिर का इतिहास

मान भलेई के मंदिर का लगभग साढ़े छह सौ वर्ष पुराना इतिहास है। मंदिर के गर्भ गृह में मां भलेई की दो फुट ऊंची काले रंग की प्रतिमा स्थापित है इस प्रतिमा को किसी कारीगर ने तैयार नहीं किया। बल्कि यह प्रतिमा भलेई गांव के समीप भ्राण नामक स्थान पर एक बावड़ी में प्रकट हुई थी। कहा जाता है कि वर्ष 1569 में चंबा रियासत के तत्कालीन राजा प्रताप ङ्क्षसह को माता भलेई ने स्वप्न में दर्शन देकर बताया था कि वह(मां भलेई) भ्राण में एक बावड़ी में है और राजा तुम भ्राण आकर मुझे चंबा ले जाओ। माता ने राजा को बताया इक भ्राण बावड़ी में उनकी प्रतिमा के साथ धन के तीन चरुए(बड़े बर्तन) भी मिलेंगे। जिनमें से एक चरुए के धन से भलेई माता के मंदिर का निर्माण करवाया जाए। दूसरे चरुए के धन से गरीबों की मदद की जाए और तीसरे चरुए के धन को राजकोष में रखा जाए। मां भलेई के आदेश पर राजा प्रताप ङ्क्षसह विद्वान ब्राह्मïणों के साथ भ्राण पहुंचे जहां कि माता द्वारा स्वप्न में बताए गए अनुसार बावड़ी में माता भलेई की दो फीट ऊंची काले रंग की प्रतिमा के साथ धन के तीन चरुए मिले। पूर्ण विधि-विधान से माता भद्रकाली भलेई की मूर्ति को सुंदर पालकी में विराजमान करवाकर चंबा की ओर प्रस्थान किया गया।

इसी बीच राजा, उनके दरबारी व ब्राह्मण भलेई में विश्राम करने के लिए भलेई में रुके और माता की पालकी को भी यहीं रखा गया। जिसपर एक बार फिर सो रहे राजा को मां भलेई ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि उन्हें यह स्थान भा गया है और अब वह चंबा नहीं जाएंगी। माता ने राजा को भलेई में ही मंदिर का निर्माण करवाने के आदेश दिए। माता ने यह भी आदेश दिए किसी उनके मंदिर में केवल पुरुष ही माता के दर्शन कर सकेंगे जबकि महिलाओं को मंदिर में दर्शनों की अनुमति नहीं होगी। माता के आदेश की पालना करते हुए राजा ने भलेई में मंदिर का निर्माण करवाया और माता की प्रतिमा की यहां स्थापना की गई। तब से यहां पर मां भलेई के जयकारे गूंज रहे हैं। खाली झोलियां भरने वाली माता भलेई के दरबार में नवरात्र के अलावा वर्ष भर हिमाचल, पंजाब व जम्मू-कश्मीर से भक्त शीश नवाकर झोलियां भर ले जाते हैं।

निर्माण शैली

भलेई मंदिर का निर्माण शिखर शैली में किया गया है। जहां कि मंदिर के गर्भगृह में माता की दो फुट ऊंची काले रंग की चर्तुभुजा प्रतिमा स्थापित है। माता की प्रतिमा को देखकर ऐसा लगता है कि माता अभी अभी कुछ बोल कर चुप हुई हैं। वर्ष 1960 के दशक में अपन एक अन्नय भक्त चंबा निवासी दुर्गा बहन की भक्ति से प्रसन्न होकर मां भलेई ने स्वप्न में दर्शन देकर दुर्गा बहन को सर्वप्रथम उनके दर्शन करने के आदेश दिए थे और कहा था कि इसके बाद महिलाएं भी मंदिर में मां भलेई के दर्शन कर सकती हैं।

सच्चे दिल से मांगी मन्नतें पूरी करती है मां

सच्चे दिल से मांगी गई हर मन्नत मां भद्रकाली भलेई पूरी करती है। मां भलेई जब प्रसन्न होती हैं तो माता की प्रतिमा पर पसीना आता है। पसीना इस बात का भी संकेत होता है कि मांगी गई मन्नत पूरी होगी।

पंडित डा. लोकी नंद शर्मा, मुख्य पुजारी भलेई माता मंदिर।

माता के आर्शीवाद से ही हो रहा मंदिर का विकास

भलेई मंदिर प्रबंधक समिति के अध्‍यक्ष कमल ठाकुर का कहनाहै कि माता भलेई के आर्शीवाद से ही मंदिर का विकास हो रहा है। भलेई मंदिर हिमाचल ,पंजाब व जम्मू के लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। जबकि माता के आशीर्वाद से भलेई क्षेत्र में भी अथाह विकास सम्भव हो पाया है। दूर दूर से भक्त अपनी खाली झोलिया भरने के लिए माता के दरबार में पहुंचते हैं।

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