यूएन में भारत ने पाक को दिया करारा जवाब कहा- आतंक की फैक्टरी चलाने वाले से नसीहत नहीं चाहिए
September 28th, 2019 | Post by :- | 137 Views

संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 74वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने संबोधन के दौरान कश्मीर और अन्य मुद्दों पर भारत पर हमला किया, जिसके बाद भारत ने अब पाकिस्तान को करारा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय की प्रथम सचिव विदिशा मैत्रा ने कहा कि इमरान खान का भाषण नफरत से भरा हुआ था और उनकी कही हर बात झूठी है। उन्होंने अतंरराष्ट्रीय मंच का गलत इस्तेमाल करते हुए गुमराह करने की कोशिश की।
मैत्रा ने कहा, परमाणु हमले की धमकी देना इमरान खान की अस्थिरता दर्शाता है ना कि उन्हें राजनीतिज्ञ बताता है। पाकिस्तान ने खुलेआम वैश्विक आतंकी ओसामा बिन लादेन का बचाव किया था। उनका परमाणु को लेकर दिया गया बयान गैर जिम्मेदाराना है। खान ने कश्मीर राग अलापते हुए कहा था कि हमारे पास हथियारों को उठाने या परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाएगा।
मैत्रा ने आगे कहा, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति बदतर है और उनपर जुल्म हो रहे हैं। 1947 की तुलना में आज कुछ फीसदी भर अल्पसंख्यक बचे हैं। मानवाधिकार की बात करने वाले पाकिस्तान को सबसे पहले पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत देखनी चाहिए जिनकी संख्या 23 प्रतिशत से 3 प्रतिशत पर पहुंच गई है। अंतर्राष्ट्रीय आतंकियों को पाकिस्तान पेंशन देता है। पाक ने खुलेआम लादेन का बचाव किया। उनसे मानवाधिकार पर नसीहत नहीं सुननी।
विदिशा मैत्रा ने इमरान खान से पाक जमीं पर पल रहे आतंकवादियों का मुद्दा उठाया और सवाल किया, क्या इमरान खान पाकिस्तान की जमीन पर पल रहे संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित 130 आतंकवादियों को नकार सकते हैं? इसके अलावा विदिशा मैत्रा ने यूएन में कहा, दुनिया को पाकिस्तान में जाकर हालात देखना चाहिए। पाक आतंकवाद पर और हम विकास पर जोर दे रहे हैं। पाकिस्तान को 1971 के नियाजी का नरसंहार नहीं भूलना चाहिए।
विदिशा मैत्रा ने कहा, यूएनजीए में इमरान का भाषण दुर्भाग्यपूर्ण है और आतंक की फ़ैक्टरी चलाने वाले से नसीहत नहीं चाहिए। यूएन में सूचीबद्ध 155 आतंकी पाक में मौजूद हैं। पाकिस्तान मानवाधिकार का चैंपियन बनने की कोशिश में लगा हुआ है। इतना ही नहीं, उन्होंने कहा, वह जो कभी क्रिकेटर थे और जेंटलमैन के खेल पर भरोसा रखते थे। आज उनका भाषण असभ्यता की चरम सीमा तक पहुंच गया है जो कि एकदम दारा आदम खल की बंदूकों की याद दिलाता है।

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