रूस-यूक्रेन युद्ध की भविष्यवाणी का वायरल हो रहा भारतीय पंचांग, जानिए और क्या लिखा है इसमें #news4
March 1st, 2022 | Post by :- | 349 Views
किशोर जंत्री कैलेंडर के जरिए आप सभी भारतीय त्योहारों, अवकाशों, आदि की संपूर्ण जानकारी हासिल कर सकते हैं। कहा जा रहा है कि यह कलैंडर एस्ट्रोसेज द्वारा पेश किया गया है, जिसमें प्रत्येक माह के ग्रह गोचर अनुसार महत्वपूर्ण घटनाओं की सटीक तारीख और दिन की जानकारी प्रदान की गई है। इस भारतीय कैलेंडर की मदद से भारतीय अवकाशों और क्षेत्रीय त्योहारों के बारे में अधिक जानकारी अभी प्राप्त कर सकते हैं।
न्यूज़ 4 इस पंचांग की कोई आधिकारिक पुष्टि या दावा नहीं करता है, हालांकि ये पंचांग सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। लोग ट्वीट करके अपनी बात रख रहे हैं।
अंगारक योग बनता है युद्ध का कारण : इस समय विक्रमी संवत 2078 के अंतर्गत आनंद नामक संवत्सर चल रहा है। दरअसल इस संवत की शुरुआत मंगलवार को हुई थी। संवत्सर के राजा और मंत्री मंगल हैं। मंगल को ज्योतिष में युद्ध का कारक ग्रह माना जाता है। वर्तमान में मकर राशि में शनि देव पहले से ही विद्यमान हैं। 26 फरवरी को मंगल भी मकर राशि में आ गए। मकर राशि में मंगल सबसे ज्यादा बलवान होता है क्योंकि यह उसकी उच्च दशा की राशि है। यहीं पर शनि और मंगल की युति से अंगारक नामक योग का निर्माण हुआ है। यह योग 7 अप्रैल तक रहेगा। यह युद्ध, भूकंप, सीमा पर तनाव की स्थिति को बढ़ाता है। पंचांग में साफ लिखा है कि अंगारक योग यूरोपीय देशों के बीच युद्ध का कारण बनेगा।
यही कारण है कि 26 फरवरी को मकर राशि में पहले से विराजमान शनि के साथ मंगल ग्रह पहुंचे, उसके तीन दिन पूर्व ही इन ग्रहों ने अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया था और यूक्रेन-रूस के बीच युद्ध 26 फरवरी से तीन दिन पूर्व ही आरंभ हो गया।
हर 30 साल के अंतर पर बनती है ऐसी स्थिति : ज्योतिेष मान्यता के अनुसार हर 30 साल के अंतर पर शनि ने इन्हीं क्षेत्रों में युद्ध या हिंसात्मक कारवाई की स्थिति बनाई है। पिछले 3 वर्षो से पूरे विश्व में अशांति है, महामारी फैली है और साथ ही भारत पाकिस्तान के साथ ही भारत-चीन के बीच भी तनाव बढ़ा हुआ है। 2020 में गलवान घाटी विवाद में भारत-चीन के कई सैनिक मारे गए थे। उस समय भी शनि मकर राशि में गोचर हो रहा था। शनि मकर राशि में 28 अप्रैल 2022 तक रहेगा। तब तक पूरे विश्व में तनाव का माहौल रहेगा।
बढ़ेगा भारत का दबदबा : स्वतंत्र भारतवर्ष की वृषभ लग्न की कुंडली के नवम भाव अर्थात भाग्य भाव में यह पंचग्रही योग बन हो रहा है और राशि अनुसार कर्क राशि से यह सप्तम भाव में बन रहा है। ऐसी स्थिति में यह पंच ग्रही योग दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ाने वाला साबित होगा। भारत अपने विरोधी देशों पर भारी पड़ता हुआ नजर आएगा और विश्व मंच पर अपनी अलग पहचान बनाने में सर्वोपरि दिखेगा। यह देशवासियों के साहस और पराक्रम में भी वृद्धि करेंगे तथा भाग्य को मजबूत बनाएंगे जिससे विश्व पटल पर भारत की छवि मजबूत होगी।

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