भारतीय विश्लेषणात्मक परंपरा तिब्बती दिमाग के लिए अनुकूल : दलाईलामा #news4
June 2nd, 2022 | Post by :- | 87 Views

धर्मशाला : धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि भारतीय विश्लेषणात्मक परंपरा तिब्बती दिमाग के लिए बेहतर अनुकूल थी और चीनी ध्यानियों को हिमपात की भूमि छोडऩी होगी। दलाईलामा ने कहा कि यदि आपका विश्वास और विश्वास का बंधन मजबूत है, तो दूरी कोई वस्तु नहीं है। प्रक्रियाओं से गुजरते हुए मैं आप सभी को ध्यान में रखूंगा। उन्होंने कहा कि अज्ञानता में एक स्वतंत्र आत्म के अस्तित्व को समझना शामिल है, जबकि चीजें कारणों और स्थितियों पर निर्भरता में उत्पन्न होती हैं। निर्भरता शून्यता से इंकार नहीं करती है और उत्पन्न होने का मतलब है कि चीजें सांसारिक परंपरा के अनुरूप हैं। उन्होंने कहा कि प्रतीत्य समुत्पाद को तर्क और तर्क के माध्यम से सिद्ध किया जा सकता है, जिसका श्रेय वह सीधे भारत की विश्लेषणात्मक परंपराओं को देते हैं।

तिब्बती युवाओं को टीचिंग देने के दूसरे दिन सुबह वीरवार को धर्मगुरु दलाईलामा अपने निवास के द्वार से मुख्य तिब्बती मंदिर त्सुगलगखांग तक चले और उन्होंने युवा और वृद्धों के साथ सीधे संपर्क  बनाया। इस दौरान उन्होंने करीब 9500 लोगों की भीड़ के चेहरों को देखकर खुशी जाहिर की। दलाईलामा ने कहा कि जून माह में हमारी तिब्बती छात्रों और स्कूली बच्चों को पढ़ाने की परंपरा है। सिंहासन पर बैठकर उन्होंने युवाओं को अवलोकितेश्वर अभिषेक के बारे में ज्ञान देना शुरू किया। अपने पीछे एक मूर्ति की ओर संकेत करते हुए उन्होंने कहा कि यहां हमारे पास वती संगपो या किरोंग जोवो के नाम से जानी जाने वाली मूर्ति है। पांचवें दलाईलामा के समय में यह मूर्ति और इसके समान एक अन्य अवलोकितेश्वर भाइयों को पोटाला में एक साथ लाया गया था और मेरे पूर्ववर्ती ने उनकी उपस्थिति में ध्यान किया था।

जोंगखा छोडे मठ के भिक्षु और चुशी गंगडुक के सदस्य इस किरोंग जोवो को तिब्बत से नेपाल लाने में शामिल थे। उन्होंने कहा कि इसे यहां धर्मशाला लाया गया और मेरी तिजोरी में रखा गया। उन्होंने कहा कि मुझे याद है कि जब मैंने पहली बार इसे देखा था, तो मैं खुशी से भर गया था। जब दक्षिण भारत में जोंगखा छोडे मठ को फिर से स्थापित किया गया तो एक सवाल उठा कि मूॢत को कहां रहना चाहिए। मैंने एक भविष्यवाणी की थी, जिसने संकेत दिया था कि अगर यह मेरे साथ रहे तो यह अनुकूल होगा। दलाईलामा ने इस दौरान तिब्बती इतिहास और अपने बीते समय के बारे में युवाओं को जानकारी दी।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।