साइज में छोटा होता है भारतीयों का दिमाग
October 30th, 2019 | Post by :- | 179 Views

हाल ही हैदराबाद में हुई एक रिसर्च में दिलचस्प बात बात सामने आई है कि भारतीयों के दिमाग का साइज वेस्टर्न और ईस्टर्न देशों के लोगों की तुलना में छोटा होता है। भारतीयों का मस्तिष्क लंबाई, चौड़ाई और घनत्व तीनों में ही पूर्व और पश्चिम के देशों के लोगों की तुलना में कुछ छोटा होता है। रिसर्च के दौरान हैदराबाद आईआईआईटी द्वारा पहली बार इंडियन ब्रेन एटलस तैयार किया गया। यह रिसर्च अल्जाइमर और ब्रेन से जुड़ी अन्य बीमारियों को ध्यान में रखकर की गई। उम्मीद की जा रही है कि इस स्टडी के बाद ब्रेन से जुड़ी परेशानियों को समझने में काफी मदद मिलेगी। यह रिसर्च न्यूरॉलजी इंडिया नामक मेडिकल जरनल में पब्लिश हुई है। यह स्टडी इंटरनेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, हैदराबाद (आईआईआईटी-एच) के शोधकर्ताओं द्वारा की गई। इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाली सेंटर फॉर विजुअल इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के जयंती सिवास्वामी के अनुसार, दिमाग से जुड़ी बीमारियों को मॉनिटर करने के लिए मॉन्ट्रियल न्यूरॉलजिकल इंस्टीट्यूट (एमएनआई)  टेंपलेट का उपयोग मानक के रूप में उपयोग किया जाता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, इस टेंपलेट को कोकेशियान दिमाग को ध्यान में रखकर डिवेलप किया गया है, जो कि भारतीय लोगों के दिमाग से जुड़ी बीमारियों को जांचने के लिए एक आइडल पैटर्न नहीं है। जयंती सिवास्वामी के अनुसार, क्योंकि भारतीय लोगों के ब्रेन का साइज एमएनआई की तुलना में साइज में छोटा है, जो कि कई अलग-अलग स्कैन में सामने आया है। ऐसे में एमएनआई के जरिए भारतीय ब्रेन की जांच करना मिसडाइग्नॉज की वजह बन सकता है। हमने एमआरआई इमेज को प्रीलोडेड एमएनआई इमेज टेम्पलेट से कंपेयर किया तो यह बात सामने आई। हमारे पास इस शोध से जुड़े पुख्ता प्रमाण है, जिनसे इस बात की जरूरत महसूस होती है कि ब्रेन के स्ट्रकचर और उससे जुड़ी बीमारियों को स्टडी करने के लिए एक लार्ज एटलस बनाए जाने कि जरूरत है, जिससे इस बात को समझा जा सके कि दिमाग के साइज के अलग-अलग प्रकारों में किसे सामान्य मानकर शोध किए जाने चाहिए। जयंती ने कहा कि ब्रेन साइज को लेकर अब जक जितने भी टेंपलेट डिवेलप किए गए उनमें चीनी और कोरियाई ब्रेन टेंपलेट्स भी शामिल हैं लेकिन भारत-विशिष्ट आबादी के लिए कोई संगत टेंपलेट इससे पहले डिवेलप नहीं किया गया था। हैदराबाद आईआईआईटी की टीम ने इस दिशा में पहला प्रयास किया है, ताकि इंडियन ब्रेन स्पेसिफिक एटलस डिवेलप किया जा सके।

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