अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव संपन्न: शाही अंदाज में निकली अंतिम जलेब, चौहाटा जातर में उमड़ा आस्था का सैलाब #news4
March 8th, 2022 | Post by :- | 99 Views

देवी-देवताओं की विदाई के साथ सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव मंगलवार को संपन्न हो गया। महोत्सव की तीसरी और अंतिम जलेब (शोभायात्रा) दोपहर दो बजे राजदेवता माधोराय की अगुवाई में शाही अंदाज में निकली। इससे पूर्व सुबह चौहाटा में जातर का आयोजन हुआ। देवी-देवताओं ने कतार में विराजमान होकर सैकड़ों श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। जलेब में राजदेवता माधोराय की पालकी के साथ एक दर्जन से अधिक देव रथ साथ चले। जलेब को देखने के लिए सड़क के दोनों तरफ लोगों की भीड़ उमड़ी रही। बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करने पहुंचे राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने राजदेवता माधोराय और आराध्य देव बाबा भूतनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद वह जलेब में शामिल हुए और शिवरात्रि महोत्सव का विधिवत समापन किया। इस बार शिवरात्रि के देव समागम में 200 के करीब पंजीकृत देवी-देवता पहुंचे थे। महोत्सव के समापन के बाद सभी देवी-देवता अपने मूल स्थानों के लिए लौट गए हैं।

वाद्य यंत्रों की धुनों से गूंजी छोटी काशी
पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनों पर जलेब धूमधाम से चौहाटा, मोती बाजार, समखेतर, बालकरूपी, भूतनाथ बाजार होते हुए चौहाटा से पड्डल ग्राउंड पहुंची। जलेब में सबसे आगे पुलिस के घुड़सवार, बैंड, जवान, महिला पुलिस मार्च पास करते हुए चल रहे थे। देवता छाजणू व छमांहू जलेब में सबसे आगे रहे। इसके बाद कोटलू घटोत्कच, देव कोटलू, देव विष्णु मतलोड़ा, देव मगरू महादेव, बायला नारायण, देव चपलांदू नाग, सराज घाटी के देव बिट्ठू नारायण, लक्ष्मी नारायण, तुंगासी ब्रह्मदेव, महामाया निहरी, अंबिका नाऊ, राजदेवता माधोराय की पालकी, शुकदेव थट्टा आदि देवता जलेब में साथ चले। चौहारघाटी के देवताओं के रथों के साथ ढाले, नगाड़े, शहनाई, रणसिंगों की धुनों पर देवलू भी नाचते-गाते हुए चले। जलेब के दौरान कलाकारों ने भी सांस्कृतिक रंग भरे।

देव आदिब्रह्मा ने मंडी शहर की परिक्रमा कर बांधी सुरक्षा कार
अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव के अंतिम दिन मंगलवार को उत्तरशाल घाटी के देव आदिब्रह्मा ने शहर की खुशहाली के लिए सुरक्षा कार बांधी। शहर की जनता को रक्षा का वादा किया। इस दौरान पूरे मंडी शहर की परिक्रमा की। सुबह साढ़े आठ बजे देव आदिब्रह्मा के गूर और बजंतरी सेरी बाजार पहुंचे। उसके बाद बाबा भूतनाथ से होते हुए चौहटा बाजार, समखेतर बाजार, महाजन बाजार, इंदिरा मार्केट होकर पूरे शहर की परिक्रमा की। देवलुओं ने जौ के आटे से बनी सफेद रंग की विभूति हवा में उछाल कर बुरी आत्माओं को दूर रहने का आह्वान किया। सुरक्षा कार को लेकर ऐसा माना जाता है कि इससे मंडी शहर पर बुरी आत्माओं का साया नहीं पड़ता है। महाशिवरात्रि के दौरान जनपद के कई देवी-देवता रियासतकाल से ही अपनी भागीदारी निभाते आए हैं। इनमें उत्तरशाल के देवता आदिब्रह्मा की भूमिका अहम मानी जाती है। देव आदि ब्रह्मा एकमात्र ऐसे देवता हैं जिनके रथ की बनावट कुल्लू के देवताओं की रथ शैली की तरह है। देव आदि ब्रह्मा का महाशिवरात्रि मेलों से अलग जुड़ाव है। पराशर के सामने टिहरी की पहाड़ियों पर स्थित देव आदिब्रह्मा मंडी महाशिवरात्रि के दौरान शहर की समृद्धि और खुशहाली के लिए बुरी शक्तियों को दूर रखते हैं। इस दौरान देवता के गूर ने देवता का नृत्य भी किया जबकि कारकूनों ने जौ के आटे को हवा में फेंकते हुए बुरी शक्तियों को रोकने का दावा किया।

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