क्या कोरोना के इलाज में कारगर है पीपल और लटजीरा? जानें क्या कहते हैं आयुर्वेदाचार्य
April 15th, 2020 | Post by :- | 267 Views

वैश्विक महामारी कोविड-19 से निजात पाने के लिये जरूरी वैक्सीन की खोज भारत समेत पूरी दुनिया में जारी है वहीं जाने माने आयुर्वेदाचार्य और ग्रीन हर्बल हेल्थ सेंटर योजना के निदेशक डॉ केएन सिंह का दावा है कि पीपल और लटजीरा जैसी जड़ी बूटियों के सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि कर न सिर्फ संक्रमण के खतरे को टाला जा सकता है बल्कि चुनिंदा वनस्पितयों का नियमित सेवन कोरोना संक्रमित को पूरी तरह स्वस्थ कर सकता है।

डॉ सिंह का कहना है कि दुनिया की सबसे प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद वैश्विक महामारी नोवल कोरोना वायरस से लड़ने में पूरी तरह सक्षम है। केरल समेत कई राज्यों ने इस पद्धति को अपना कर न सिर्फ कोरोना संक्रमण पर काबू किया है बल्कि केन्द्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने बाकायदा एडवाइजरी जारी कर कोरोना के बचाव के लिये आयुर्वेदिक उपचार पर बल दिया है।

उन्होंने कहा कि एक मुट्ठी लटजीरा अपामार्ग (आयुर्वेदिक नाम एंटिरैन्थस एस्परा) के पत्ते साफ पानी से धोकर सुबह खाली पेट और शाम को खाने के चबाकर खाने से कोरोना जैसे विषाणु से लड़ने में मदद मिलती है। इसके साथ ही सफेद मदार (कैलाट्रोपिस गिगैंटी) के हरे पत्ते का टुकड़ा हाथ की बीच की उंगली के बराबर एक या आधा चम्मच लौंग और छोटी पीपल की बराबर मात्रा के चूर्ण के साथ पीसकर या चबाकर खाना चाहिये।

आयुर्वेदाचार्य ने कहा कि तीन चार पूर्ण विकसित हरे पीपल के पत्ते (फाइकस रेलिजिओसा) लौंग (साइजाईिजयम एरोमैंटिगम) के साथ खाने से शरीर बलवान बनता है वहीं छोटी छोटी पीपल (पाइपर लांगम एल) को भूनकर,चबाकर या पीसकर सुबह शाम खाने से किसी भी विषाणु का सामना करने की अद्धुत क्षमता प्राप्त की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि एक चम्मच कलौंजी -प्याज के बीज (एलियम सेपा) एक एक चम्मच सुबह शाम सेवन से भी रोग प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा किया जा सकता है। उक्त औषधियों को एक साथ चबाकर या पीसकर अथवा सब मिलाकर काढ़ा बनाकर सुबह शाम पूरी मात्रा में सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा दो तीन बूंद सरसों का तेल नाक में सुबह शाम डालें और मालिश करें।

डॉ सिंह ने कहा कि उन्होने इन आयुर्वेदिक दवाओं के सेवन के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिये पिछले महीने ही केन्द्र और राज्य सरकारों को पत्र लिखा था। लखनऊ स्थित किंग जार्ज मेडिकल यूनीवर्सिटी ने चिकित्सा पद्धति पर रूचि दशार्ते हुये मेडिकल कालेज के सभी चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टाफ को परामर्शित वनस्पतियों का सेवन करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के जवान भी पीपल और लटजीरा समेत अन्य आयुर्वेदिक औषधियों का सेवन कर कोरोना के संक्रमण से खुद को बचाये हुये है। इसी प्रकार देश के लाखों लोग देश की पुरातन चिकित्सा पद्धति का अनुसरण कर खुद को स्वस्थ बनाये हुये हैं।

चिकित्सक ने स्वीकार किया कि विषाणु के घातक प्रभाव को बेअसर करने में कारगर आयुर्वेद की महत्ता को अच्छी तरह समझने के बावजूद सरकारों ने इस दिशा में शोध कायोर् को प्राथमिकता नहीं दी,नतीजन सदियों पुरानी इस विधा को दुनिया में जो सम्मान मिलना चाहिये था, वह नहीं मिल सका। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने आदिवासियों और ग्रामीणों की मदद से आयुर्वेद के करीब 4०० फामूर्ले संग्रहित किये थे और उन्ही की प्रेरणा से आयुष मंत्रालय की भी स्थापना हुयी।

उन्होंने कहा कि पीपल वास्तव में संजीवनी है जिसको आयुर्वेद में सभी वनस्पतियों का राजा माना गया है। वेद पुराणों में भी पीपल का वर्णन है “ अस्वत्थ मूले ब्रहा, तने विष्णु शाखाये महेश्वराय पत्रे पत्रे देवानाम” अथार्त जिसकी जड़ ब्रहृमा है,तना विष्णु और शाखाये भगवान शिव के समान है और जिसके पत्ते पत्ते में देवों का वास है।

पीपल अपने आप में भोजन है जैसे हाथी सिर्फ पीपल ही खाता है जिससे उसकी शारीरिक और मानसिक क्षमता मनुष्य की तुलना में कई गुना ज्यादा है। पीपल कीटाणुनाशक और शक्तिवर्धक है वहीं नीम कीटाणुनाशक तो है लेकिन इसके अधिक सेवन से शक्ति क्षीण होती है। पीपल सभी तरह के विषाणुओं को न सिर्फ नष्ट करता है बल्कि नाड़ी तंत्र,मस्तिष्क तंत्र और हृदय की धमनियों को मजबूत बनाता है।

डॉ सिंह ने कहा कि पीपल के नियमित सेवन से दो तीन महीने में न सिर्फ आंखों की रोशनी बढ़ जाती है बल्कि हड्डियों का क्षरण रूकने से गठिया आदि की समस्यायों से भी दूर रहने में मदद मिलती है। इसको भरपेट खाने में भी कोई हानि नहीं है बल्कि खून को बढायेगा। इसके रेशा खाते रहने से शरीर के हर रोग को दूर कर सकता है।

उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दवाओं में पीपल और लटजीरा का प्रयोग बड़े पैमाने पर होता है लेकिन कंपनियों की न समझने वाली नीतियों के चलते इस औषधि को महत्व नहीं दिया गया है। सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि एलोपैथिक अथवा होम्योपैथिक दवाओं की तुलना में पीपल लटजीरा का साइड इफेक्ट नगण्य है।

इसके बावजूद देश में आयुर्वेद के प्रति जागरूकता का सर्वथा अभाव है वहीं मानव शरीर पर दुष्प्रभाव छोड़ने वाली अंग्रेजी दवाओं का धंधा फल फूल रहा है। सरकार इन दवाओं के शोध में हजारों करोड़ रूपये हर साल आवंटित करती है वहीं आयुर्वेद के लिये कुछ सौ करोड़ का बजट आवंटित होता है।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार आयुष मंत्रालय भी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढाने के लिये आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन को लेकर एडवाइजरी जारी कर चुका है जिसके अनुसार ठंडे पेय पदाथोर् से परहेज करने के साथ गर्म पानी पीने की सलाह दी गयी है जबकि नियमित रूप से कम से कम 3० मिनट तक योगासन, प्राणायाम और ध्यान पर बल दिया गया है।

एडवाइजरी के अनुसार हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन आदि मसालों का भोजन में प्रयोग और च्यवनप्राश के सेवन की सलाह दी गयी है। तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सौठ पाउडर और मुनक्के से बनी काली चाय का दो बार सेवन रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने में सहायक माना गया है। सुबह और शाम दोनों नथुनों में तिल या नारियल का तेल या घी लगाना लाभप्रद है वहीं सूखी खांसी की समस्या से पुदीने की ताजा पत्ती या अजवाइन की भाप निजात दिला सकती है। खांसी या गले में खराश होने पर दिन में दो तीन बार प्राकृतिक शक्कर या शहद के साथ लौंग का पाउडर का सेवन करना चाहिये वहीं हल्दी वाला गर्म दूध पीकर संक्रमण को दूर रखा जा सकता है।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।