आज ही के दिन 23 साल पहले शहादत को प्राप्त हुए थे शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा, जिनका नाम सुनकर कांप जाते थे दुश्‍मन #news4
July 6th, 2022 | Post by :- | 97 Views

पालमपुर : जब-जब कारगिल युद्ध की बात आती है सेना के एक ऐसे जांबाज का नाम जरूर आता है जिसने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों की धज्जियां उड़ा दी थीं। सेना के इस जांबाज को शेरशाह के नाम से जाना जाता था। आज शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा की 23वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 7 जुलाई 1999 को पालमपुर के वीर सिपाही कैप्टन विक्रम बत्रा ने वीरगति प्राप्त की थी। दुश्मन इनके नाम से थर थर कांपते थे। 14 सितंबर 1974 को कांगड़ा जिले के पालमपुर के घुग्गर गांव में जन्में शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा को उनकी सैन्य टुकड़ी शेरशाह के नाम से जानती थी। उनके अदम्य साहस और नेतृत्व प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से भी नवाजा गया था।

कारगिल युद्ध के 23 साल बीत जाने के बाद भी इस जाबाज सिपाही की वीरता की कहानियां आज भी हमारी रगों में जोश भर देती हैं। आज भी जब युवा इनके वीरता के परिचय को सुनते है तो हर एक युवा का मन करता है की वह भी अपने देश की सेवा के लिए सेना में भर्ती हों।कारगिल युद्ध की सबसे मुश्किल चुनौतियों में शुमार प्वाइंट 4875 पर मोर्चा संभालना लोहे के चने चबाने जैसा था। ऊपर चढ़ने की संकरी जगह और ठीक सामने दुश्मन की ऐसी पोजीशन पर होना जहां से आसानी से वो आपको अपना निशाना बना सकता है। इन सब मुश्किलों के बाद भी इस बहादुर के कदमों को दुश्मन रोक न सके।बिजली की गति से दुश्मन के मोर्चे पर धावा बोलकर कैप्टन विक्रम बत्रा ने पहले हैंड टू हैंड फाइट की और उसके बाद प्वाइंट ब्लैक रेंज से दुश्मन के पांच सैनिक ढेर कर दिए। गहरे जख्म होने पर भी बत्रा यहीं नहीं रुके।

वो क्रॉलिंग करते हुए दुश्मन के करीब तक पहुंचे और ग्रेनेड फेंकते हुए पोजीशन को क्लियर कर दिया। टीम का नेतृत्व कर रहे विक्रम बत्रा ने अपनी टीम में पूरी ताकत के साथ लड़ने का जुनून भर दिया। जब जख्मी विक्रम बत्रा को उनके सूबेदार ने रेस्क्यू करने की कोशिश की तो वो बोले तू बाल बच्चेदार है, हट जा पीछे।इसके बाद दुश्मन की गोली से विक्रम बत्रा शहीद हो गए। बाद में उनकी टीम ने प्वाइंट 4875 को वापस कब्जाने का लक्ष्य हासिल कर लिया। आज भी प्वाइंट 4875 को बत्रा टॉप के नाम से जाना जाता है।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।