जयराम सरकार: दो साल में सरकारी स्कूलों को मिले सात हजार नए शिक्षक
December 27th, 2019 | Post by :- | 142 Views
जयराम सरकार का दो साल के कार्यकाल में शिक्षक भर्ती पर खासा जोर रहा है। जनवरी 2018 से दिसंबर 2019 तक प्रदेश के स्कूलों में सात हजार शिक्षकों की नई भर्ती की गई है। प्रदेश में पहली बार शुरू की गई प्री-प्राइमरी कक्षाओं में विद्यार्थियों की संख्या 47 हजार पहुंच गई है। निजी स्कूलों का मुकाबला करने को शुरू की गई विभिन्न योजनाओं से सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट भी काफी घटा है। वर्चुअल क्लास रूम से दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने का प्रयास किया गया है। ई-संवाद योजना से अभिभावकों को हर सप्ताह निजी स्कूलों की तर्ज पर एसएमएस से रिपोर्ट भी भेजी जा रही है। प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के तहत बीते दो साल के दौरान शिक्षकों व गैर शिक्षकों के 6276 पदों को सीधी भर्ती और शिक्षकों के 1555 पदों को पदोन्नति से भरा गया है। शिक्षकों के 2159 पदों को वर्तमान में भरने की प्रक्रिया जारी है।

3636 शिक्षकों के पदों को भरने के लिए बीते दिनों हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दी गई है। ऐसे में साल 2019 के फरवरी तक प्रारंभिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की भर्ती का आंकड़ा 10 हजार पार कर जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग में शिक्षकों के 600 नए पद भरे गए हैं। 450 पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। करीब एक हजार पदों को भरने का प्रस्ताव कैबिनेट को अलग से भेजा भी गया है।

उधर, असेसमेंट डैशबोर्ड का उपयोग करने वाला हिमाचल प्रदेश देश का एकमात्र राज्य है। इस तकनीक के प्रयोग से कोई भी व्यक्ति, अभिभावक, शिक्षक, अधिकारी व कर्मचारी स्कूलों में शुरू किए गए सीखने के परिणामों को देख सकते हैं। शिक्षा साथी एप से स्कूलों की मानीटरिंग ऑनलाइन की जा रही है। शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सरकारी स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें भी लगाई गई हैं।

दो साल बाद भी 9700 मेधावियों को नहीं बंटे लैपटॉप

27 दिसंबर को लैपटॉप का आवंटन होने की संभावना थी लेकिन अंतिम क्षणों में इसको मंजूरी नहीं मिल सकी है। ऐसे में बीते दो साल से लैपटॉप मिलने के इंतजार में बैठे 9700 मेधावियों को निराश होना पड़ा है। साल 2017-18 और 2018-19 के मेधावियों को लैपटॉप दिए जाने हैं।

रंग उतरने की शिकायतों से स्मार्ट स्कूल वर्दी पर लगा दाग
निजी स्कूलों का मुकाबला करने के लिए प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पहली बार दी गई स्मार्ट वर्दी पर रंग उतरने के आरोप लगने से जयराम सरकार की इस योजना पर दाग भी लगा है। इसके अलावा कई जगह स्कूल बैग फटने का मामला भी सामने आया है।

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