हिमाचल की चौहारघाटी में पांच साल बाद होगा काहिका उत्‍सव, गांव में नहीं करता कोई भी धूम्रपान, रोचक है परंपरा #news4
July 23rd, 2022 | Post by :- | 90 Views

पद्धर : जिला मंडी की चौहारघाटी के हुरंग गांव में पांच साल बाद मनाए जाने वाला काहिका उत्सव इस बार तीन से पांच अगस्त तक होगा। काहिका के लिए घाटी के देवाधिदेव भगवान कृष्ण रूपी हुरंग नारायण के मंदिर सहित पूरे गांव को सजाया जा रहा है। हुरंग गांव के हर घर में रोजमर्रा के कपड़ों सहित छोटी छोटी कतरों की सफाई इन दिनों जोरों पर चली हुई हैं। देव हुरंग नारायण के पुजारी इंद्र सिंह ने बताया कि तीन अगस्त को काहिका उत्सव का मुरगण होगा। चार अगस्त को बड़ा मेला मनाया जाएगा। पांच अगस्त को मेले का समापन होगा। समापन के बाद सभी देवता अपने अपने मंदिरों में लौट जाएंगे।

तीन दिवसीय हुरंग काहिका मेले में देवगढ़ कूटगढ़ और गुम्मा ठाना हार के अधिष्ठाता देवता आराध्य देव पशाकोट, इलाका हस्तपुर के पेखरू गहरी, कपलधार गहरी, सिल्हधार गहरी और इलाका अमरगढ़ के भगवान बलराम रूपी आराध्य देव घडोनी नारायण, द्रुण गहरी और त्रैलु गहरी चार अगस्त को देवाधिदेव हुरंग नारायण के मंदिर में हाजिरी भरेंगे।

काहिका उत्सव के अंतिम दिन नड़ परिवार का मुखिया देवता का मोहरा छूते ही मूर्छित हो जाता है। इसमें दैवीय शक्ति से ही फिर प्राण लौटते हैं। तीन दिवसीय देव समागम में शामिल होने के लिए नड़ परिवार के सभी सदस्य दो अगस्त को ही हराबाग से नंगे पांव पैदल यात्रा कर हुरंग गांव पहुंचेंगे। तीन अगस्त को समागम के शुभारंभ पर नड़ परिवार द्वारा देव हुरंग नारायण की बणी में नरवेद सजाई जाएगी।

चौहारघाटी के देवाधिदेव हुरंग नारायण धूम्रपान के सख्त विरोधी हैं। हुरंग गांव प्रदेश का ऐसा पहला गांव हैं जहां कोई भी व्यक्ति धूमपान नहीं करता है। ऐसे में हुरंग काहिका में बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, गुटका, खैनी और चमड़े आदि पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। जो व्यक्ति इन आदेशों की अवहेलना करता है उसे देवता के कोपभाजन का दंड भुगतना पड़ता है।

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