कांगड़ा उपायुक्त की चेतावनी- खुंडियां के लोग खुली सरसों व उससे निकलवाए तेल का न करें उपयोग #news4
November 18th, 2022 | Post by :- | 82 Views

धर्मशाला : कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी के खुंडियां क्षेत्र में कथित आर्जीमोन सीड मिले सरसों के तेल के सेवन से एक व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उपायुक्त कांगड़ा निपुण जिंदल ने लोगों से खुली सरसों तथा उससे निकलवाए तेल का उपयोग करने से परहेज की अपील की है। उन्होंने आग्रह किया कि पिछले दिनों जिस किसी ने भी खुले बाजार से सरसों खरीदी हो वे उसका या उससे निकलवाए तेल का उपयोग न करें।

बता दें, खुंडियां क्षेत्र के मामले में प्रभावित परिवार ने खुले बाजार से सरसों खरीदकर कोल्हू से उसका तेल निकलवाया था, जिसके कथित सेवन से परिवार के एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक तेल में आर्जीमोन सीड मिला होने के कारण व्यक्ति का स्वास्थ्य बिगड़ा और उसकी दुखद मृत्यु हो गई। उपायुक्त ने बताया कि यह खुली सरसों खुंडियां बाजार से खरीदी गई थी। पड़ताल के बाद पता चला है कि इस सरसों के बीज का थोक विक्रेता परागपुर में है, जिसके कारण संभव है कि इस बीज का विक्रय अन्य क्षेत्रों में भी हुआ हो।

विषैले सरसों के तेल के सेवन से होती है ड्राप्सी नामक बीमारी, ये हैं लक्षण

डा. निपुण जिंदल ने बताया कि इस विषैले सरसों के बीज या उससे निकले तेल के सेवन से ड्राप्सी नामक बीमारी होती है। शरीर में विशेषकर पैरों, एड़ियों और टांगों में सूजन आना इसके लक्षण हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित क्षेत्रों में यदि किसी भी व्यक्ति ने खुली सरसों या उससे निकलवाए तेल का पिछले दिनों सेवन किया है और उनके शरीर में ऐसे लक्षण दिख रहे हैं तो वे तुरंत अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर उपचार करवाएं। निपुण जिंदल ने कहा कि स्वास्थ विभाग और पूरे जिले में स्वास्थ्य संस्थानों और अधिकारियों को इसके उपचार संबंधित निर्देश दे दिए गए हैं।

क्या होता है कि आर्जीमोन

इसका विज्ञानिक नाम आर्जीमोन मेक्सिकाना है। यह पौधा सर्दियों में फूल देता है। कंटीले पौधे की पत्तियां चौड़ी होती हैं और पीले फूल निकलते हैं। इसके बाद सरसों की फली की तरह इसकी छोटी गोल फली निकलती है। इसमें सरसों के दाने की तरह काले बीज होते हैं। इसके बीज सरसों के दानों के साथ मिलाकर बेच दिए जाते हैं। इनकी पहचान करना मुश्किल होता है। इन बीजों से हल्के पीले रंग का गैर खाद्य तेल निकलता है, जिसमें जहरीला रसायन होता है। यदि सरसों के तेल में मिश्रित आर्जीमोन लंबे समय तक खाद्य तेल के रूप में प्रयोग किया जाए तो ड्राप्सी हो सकता है। यह बीमारी महामारी के रूप में फैलती है। इससे शरीर में पहले सूजन आती है, जो पांव में अधिक होती है। इस बीमारी का असर हृदय, किडनी व लीवर पर पड़ता है। निमोनिया भी हो जाता है। ड्राप्सी पीड़ित व्यक्ति की जान बचाना मुश्किल हो जाता है।

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