कोरोना के कर्मवीर…केक नहीं, मरीजों की मुस्कुराहट से मनाई सालगिरह …
April 27th, 2020 | Post by :- | 236 Views

महामारी से लोगों की जान बचाने में जुटा डाक्टर दंपति, महिला यूएनडीपी में व पति एमर्जेंसी में दे रहे सेवाएं
हमीरपुर-कोविड-19 वैश्विक महामारी के बीच एक दंपति लोगों की जान बचाने में इस कद्र जुटा हुआ कि जन्मदिन व शादी की सालगिरह का जश्न भी देशहित के लिए कुर्बान कर दिया। कहा जब कोरोना की जंग जीतेंगे, तो दोगुना जश्न मनाएंगे। फिलहाल वक्त जश्न मनाने का नहीं, बल्कि कुछ कर दिखाने का है। पोस्टर गर्ल के नाम से मशहूद हुई हिमाचल की बेटी इस महामारी में अपना जन्मदिन तक भूल गई। कोविड-19 के बीच जनसेवा में जुटे दंपति ने अपनी सालगिरह का जश्न भी साथ कार्य कर रहे कुछ सहयोगियों की शुभकामनाओं के साथ मनाया। वहीं पोस्टर गर्ल डा. मोनिका का रविवार को ही जन्मदिन भी था। अपना जन्मदिन का जश्न मनाने की बजाय इस महिला ने इस महामारी की घड़ी में जनसेवा को ही चुना। दंपत्ति अपनी-अपनी ड्यूटी पर डटा हुआ है। स्वास्थ्य क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली हिमाचल की बेटी और हमीरपुर की पोस्टर गर्ल डा. मोनिका रानौत इन दिनों लगातार प्रदेश में कोविड-19 की रोकथाम में अपनी अहम भूमिका निभा रहीं है। वह प्रदेश यूएनडीपी में कार्यरत हैं। कोरोना की इस महामारी के बीच निरंतर अपनी सेवाएं दे रहीं । कोविड से लड़ने को लेकर वह एक सजग कोरोना वारियर्स बनकर उभरी हैं। खास बात यह है कि रविवार को उनका जन्मदिन व शादी की सालगिरह एक साथ थी। कोरोना की जंग में जन्मदिन व शादी की सालगिरह के जश्न यह दंपत्ति नहीं मना पाया। सिर्फ दूरभाष पर एक-दूसरे को बधाई दी गई। हालांकि दंपत्ति का यही कहना है कि जब कोरोना पर जंग जीत ली जाएगी, तो दोगुना जश्न मनाएंगे। इस समय प्रदेश को हमारी जरूरत है।

बेटियों की उपलब्धियों का बखान

बता दें कि डा. मोनिका की फोटो वाले पोस्टर प्रदेश के प्रमुख स्थलों पर लगाए गए हैं। इनमें बेटियों की उपलब्धियों का बखान किया गया। इनके माध्यम से बताया गया है कि किन हालातों में बेटियों ने देश-दुनिया में मुकाम हासिल किया। वहीं, इनके पति डा. संजय रानौत भी हिमाचल एमर्जेंसी रेस्पांस ट्रांसपोर्टेशन की बागडोर संभाले हुए हैं। दोनों कोरोना वॉरियर्स अपना अहम योगदान देकर देश के सच्चे सिपाही होने का फर्ज अदा कर रहे हैं।

डा. संजय ने सौंपी एंबुलेंस

बता दें कि डा. संजय रानौत ने हाल ही प्रदेश को पहली ऐसी एंबुलेंस सौंपी है, जिसमें लगे शीशे को काटकर वहां गल्ब्ज लगाए गए हैं। यहां पर संभावित मरीज को खड़ा किया जा रहा है और अंदर बैठी टीम इन गल्ब्ज में हाथ डालकर मरीज के सैंपल ले रही है। इससे सैंपल लेने वाले को संक्रमण का खतरा नहीं रहता।

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