कथा / अच्छे दिनों में अहंकार से बचें और बुरे दिनों में धैर्य से काम लेना चाहिए
April 19th, 2020 | Post by :- | 51 Views

समय अच्छा हो या बुरा ये बदलता जरूर है। इसीलिए हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना चाहिए। इस संबंध में एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार पुराने समय में एक राजा अपने राज्य के प्रसिद्ध संत से मिलने पहुंचे। राजा ने संत को अपने राजमहल में भोजन के लिए आमंत्रित किया।

अगले दिन संत राजा के महल पहुंचे। वहां राजा ने संत की खूब सेवा की। राजा के अहंकार रहित स्वभाव और निस्वार्थ भाव की सेवा से प्रसन्न होकर संत ने जाते समय राजा को एक ताबीज दिया और कहा कि जब तुम्हें लगे कि जीवन में परेशानियां खत्म नहीं हो रही हैं और ऐसा लगे कि अब सब कुछ खत्म हो गया है, तब इस ताबीज में रखे कागज पर लिखे मंत्र को पढ़ लेना। लेकिन ध्यान रखना अच्छे दिनों में इस ताबीज को मत खोलना। राजा ने संत की बात मानकर ताबीज गले में पहन लिया।

कुछ दिन बाद राजा के नगर पर पड़ोसी शत्रुओं ने आक्रमण कर दिया। सभी शत्रुओं के सामने राजा की सेना ज्यादा समय तक टिक न सकी। राजा किसी तरह अपने प्राण बचाकर जंगल में भागा और एक गुफा जाकर छिप गया। गुफा में उसे शत्रु सैनिकों के कदमों की आवाज सुनाई दे रही थी। अब राजा को लगने लगा कि मैं फंस गया हूं, अब सबकुछ खत्म हो जाएगा। ये सैनिक मुझे बंदी बना लेंगे। तभी उसे संत के ताबीज की याद आई। राजा ने तुरंत ही ताबीज खोला और कागज निकाला। उस पर लिखा था कि ये समय भी कट जाएगा। ये पढ़कर राजा को थोड़ा सुकून मिला।

कुछ ही राजा चुपचाप वहीं गुफा में ही छिपा रहा। शत्रु सैनिक के कदमों की आवाज कम होने लगी। गुफा से झांककर राजा ने देखा तो सैनिक उस जगह से काफी दूर निकल गए थे। राजा तुरंत ही गुफा से बाहर निकला और अपने राज्य में पहुंच गया। इस तरह राजा के प्राण बच गए।

कथा की सीख

इस प्रसंग की सीख यह है कि अच्छे दिन हो या बुरे दिन, समय हमेशा बदलता रहता है। इसीलिए हमें अच्छे दिनों में अहंकार नहीं करना चाहिए और बुरे समय में धैर्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। जो लोग इस बात का ध्यान रखते हैं, वे बड़ी-बड़ी समस्याओं से बच सकते हैं।

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