सऊदी अरब में फंसे रौंखर के युवक की हुई सकुशल वतन वापसी, जानिए किसका जताया आभार #news4
October 2nd, 2022 | Post by :- | 78 Views

नगरोटा बगवां : सऊदी अरब में फंसे नगरोटा बगवां की पंचायत रौंखर निवासी विजय कुमार की साढ़े 11 वर्ष बाद सकुशल वतन वापसी हुई है। विजय कुमार को लेने के लिए उसका भाई अजय कुमार दिल्ली एयरपोर्ट गया तथा वहां से शनिवार को विजय कुमार अपने घर वापस पहुंचा। घर पहुंचते ही परिजन व रिश्तेदार अपने लाडले को वर्षों उपरान्त अपने बीच पाकर खुशी से झूम उठे। गौरतलब है कि गरीब परिवार से सबन्ध रखने वाला विजय कुमार वर्ष 2011 में पैसे कमाने की लालसा से विदेश गया था लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर। विजय को क्या मालूम था कि उसे 11 साल 6 महीने के उपरान्त मात्र एक छोटे से बैग जिसमें 2 जोड़ी कपड़े लेकर खाली हाथ घर लौटना पड़ेगा। वहीं परिजनों ने कहा कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए, उनका बेटा सकुशल घर वापस लौट आया, यही उनके लिए काफी है। विजय ने बताया कि इतने वर्षों बाद घर आकर चैन की नींद सोया हूं।

सपना-सा लग रहा कि घर लौट आया हूं
घर वापसी की सारी उम्मीद छोड़ चुके विजय कुमार ने बताया कि उसे घर वापस लौटना एक सपने जैसा लग रहा है क्योकि जिस प्रकार से वहां पर इतने वर्ष प्रताड़ित हुआ, उससे घर वापस लौटने की कोई उम्मीद नहीं बची थी। विजय ने बताया कि वह अब दोबारा विदेश नहीं जाना चाहता और यही पर मेहनत करके गुजारा करूंगा।

विजय ने इनका जताया आभार
विजय कुमार ने समाजसेवी संस्था नगरोटा हैल्पिंग हैंड व हिमाचल के लोगों का दिल से आभार जताया, जिनके सहयोग उसकी घर वापसी हो पाई है। विजय ने बताया कि सऊदी अदालत में 31 लाख की पैनल्टी डाल दी थी लेकिन एक भारतीय की मदद से 15 लाख पर सैटलमैट हुई और पैसे जमा करवाने के बाद घर वापसी सम्भव हो पाई है। इसमें नगरोटा हैल्पिंग हैंड के संयोजक प्रवेश शर्मा की भूमिका अहम रही, जिनके द्वारा हिमाचल के लोगों के सहयोग से मुझे 8 लाख रुपए प्राप्त हुए तथा बाकी मैंने अपनी तरफ से दिए। विजय ने नगरोटा बगवां के एनआरआई लोकेश वालिया जोकि दोहा कतर में रहते हैं, उनका भी आभार जताया। उन्होंने बंगलादेश में मृतक के परिवार से सैटलमैंट करवाने में अपना सहयोग दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले को सुलझाने में सरकार द्वारा आश्वासन तो मिले लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला।

ये था मामला 
विजय कुमार ने बताया कि वह वर्ष 2011 में 3 वर्ष के वीजा पर सऊदी अरब स्थित ओटीसी कम्पनी में बतौर हाईड्रोलिक लोडर ऑप्रेटर गया था लेकिन वर्ष 2013 उसके लिए ऐसा मुसीबतों का पहाड़ बन कर आया कि उसके उपरांत चैन की नींद नही सो पाया। विजय ने बताया कि जब वह ड्यूटी पर था तो बिना कैबिन लोडर के पीछे बैठा उसका हैल्पर बंगलादेशी नागरिक अचानक नीचे गिर कर मर गया, जिसका उसे पता भी नहीं चला। उसके उपरांत सऊदी अदालत में केस चला और उसमें बरी भी हो गया लेकिन 3 वर्ष उपरांत उसके घर वापस आने का समय हुआ तो कंपनी ने साजिश के तहत उसका पासपोर्ट जब्त कर लिया व किसी दबाव के चलते उस केस को रीओपन करवा दिया। कम्पनी ने 3 साल उपरांत उसका कॉन्ट्रैक्ट भी रिन्यू नहीं किया तथा उससे आधी सैलरी पर काम करवाते रहे। वह बड़ी मुश्किल से अपना गुजारा कर पता था और अदालत व एम्बैसी के चक्कर काटते-काटते परेशान हो गया। विजय ने बताया कि अंत मे अदालत ने उसे 1.50 लाख सऊदी रियाल  का जुर्माना अदा करने को कहा जोकि भारतीय करंसी के मुताबिक 31 लाख रुपए बनते हैं। बड़ी मुश्किल से 15 लाख रुपए देकर छुटकारा हुआ।

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