ज्ञानवापी मस्जिद विवाद का प्राचीन इतिहास, जानिए कब, क्या हुआ #news4
May 16th, 2022 | Post by :- | 267 Views
कहते हैं कि काशी में शिवजी का एक बहुत ही विशालकाय मंदिर था। इसे मध्यकाल में तोड़कर यहां पर एक मस्जिद बना दिए जाने का दावा किया जाता रहा है। आओ जानते हैं काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद का प्राचीन इतिहास।
1. आदिकाल : हिन्दू पुराणों अनुसार काशी में विशालकाय मंदिर में आदिलिंग के रूप में अविमुक्तेश्वर शिवलिंग स्थापित है।
2. प्राचीनकाल : ईसा पूर्व 11वीं सदी में राजा हरीशचन्द्र ने जिस विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था उसका सम्राट विक्रमादित्य ने अपने कार्यकाल में पुन: जीर्णोद्धार करवाया था।
3. 1194 : इस भव्य मंदिर को बाद में मुहम्मद गौरी ने लूटने के बाद तुड़वा दिया था।
4. 1447 : मंदिर को स्थानीय लोगों ने मिलकर फिर से बनाया परंतु जौनपुर के शर्की सुल्तान महमूद शाह द्वारा तोड़ दिया गया और मस्जिद बनाई गई। हालांकि इसको लेकर इतिहासकारों में मतभेद है।
5. 1585 : पुन: राजा टोडरमल की सहायता से पंडित नारायण भट्ट द्वारा इस स्थान पर फिर से एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया।
6. 1632 : मंदिर को शाहजहां ने आदेश पारित कर इसे तोड़ने के लिए सेना भेज दी। सेना हिन्दुओं के प्रबल प्रतिरोध के कारण विश्वनाथ मंदिर के केंद्रीय मंदिर को तो तोड़ नहीं सकी, लेकिन काशी के 63 अन्य मंदिर तोड़ दिए गए।
7. 1669 : 18 अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया। यह फरमान एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में आज भी सुरक्षित है। एलपी शर्मा की पुस्तक ‘मध्यकालीन भारत’ में इस ध्वंस का वर्णन है। साकी मुस्तइद खां द्वारा लिखित ‘मासीदे आलमगिरी’ में इसके संकेत मिलते हैं।
8. 1669 : 2 सितंबर 1669 को औरंगजेब को मंदिर तोड़ने का कार्य पूरा होने की सूचना दी गई और तब ज्ञानवापी परिसर में मस्जिद बनाई गई।
9. 1735 : मंदिर टूटने के 125 साल तक कोई विश्वनाथ मंदिर नहीं था। इसके बाद साल 1735 में इंदौर की महारानी देवी अहिल्याबाई ने ज्ञानवापी परिसर के पास काशी विश्वनाथ मंदिर बनवाया।
10. 1809 : ज्ञानवापी मस्जिद का विवाद पहली बार गरमाया, जब हिन्दू समुदाय के लोगों द्वारा ज्ञानवापी मस्जिद को उन्हें सौंपने की मांग की।
11. 1810 : 30 दिसंबर 1810 को बनारस के तत्कालीन जिला दंडाधिकारी मिस्टर वाटसन ने ‘वाइस प्रेसीडेंट इन काउंसिल’ को एक पत्र लिखकर ज्ञानवापी परिसर हिन्दुओं को हमेशा के लिए सौंपने को कहा था, लेकिन यह कभी संभव नहीं हो पाया।
12. 1829-30 : ग्वालियर की महारानी बैजाबाई ने इसी मंदिर में ज्ञानवापी का मंडप बनवाया और महाराजा नेपाल ने वहां विशाल नंदी प्रतिमा स्थापित करवाई।
13. 1883-84 : ज्ञानवापी मस्जिद का पहला जिक्र राजस्व दस्तावेजों में जामा मस्जिद ज्ञानवापी के तौर पर दर्ज किया गया।
14. 1936 : 1936 में दायर एक मुकदमे पर वर्ष 1937 के फैसले में ज्ञानवापी को मस्जिद के तौर पर स्वीकार किया गया।
15. 1984 : विश्व हिन्दू परिषद् ने कुछ राष्ट्रवादी संगठनों के साथ मिलकर ज्ञानवापी मस्जिद के स्थान पर मंदिर बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाया।
16. 1991 : हिन्दू पक्ष की ओर से हरिहर पांडेय, सोमनाथ व्यास और प्रोफेसर रामरंग शर्मा ने मस्जिद और संपूर्ण परिसर में सर्वेक्षण और उपासना के लिए अदालत में एक याचिका दायर की।
17. 1991 : मस्जिद सर्वेक्षण के लिए के लिए दायर की गईं याचिका के बाद संसद ने उपासना स्थल कानून बनाया। तब आदेश दिया कि 15 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी भी धर्म के पूजा स्थल को किसी दूसरे में नहीं बदला जा सकता।
18. 1993 : विवाद के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्टे लगाकर यथास्थिति कायम रखने का आदेश दिया।
19. 1998 : कोर्ट ने मस्जिद के सर्वे की अनुमति दी, जिसे मस्जिद प्रबंधन समिति ने इलाहबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी। इसके बाद कोर्ट द्वारा सर्वे की अनुमति रद्द कर दी गई।
20. 2018 : सुप्रीम कोर्ट ने आदेश की वैधता छह माह के लिए बताई।
21. 2019 : वाराणसी कोर्ट में फिर से इस मामले में सुनवाई शुरू हुई
22. 2021 : कुछ महिलाओं द्वारा कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिसमे मस्जिद परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा करने की आज्ञा मांगी और सर्वे की मांग की। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के पुरातात्विक सर्वेक्षण की मंजूरी दी।
23. 2022 : कोर्ट के आदेश के अनुसार ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे का काम पूरा हुआ। अब सुनवाई शुरु होगी।

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