लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर बनाया था भाई, उपहार में मांगा था विष्णुजी को
August 14th, 2019 | Post by :- | 234 Views

गुरुवार, 15 अगस्त रक्षाबंधन है। बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधती है। रक्षाबंधन पर्व की शुरूआत के संबंध में शास्त्रों में कई कथाएं बताई गई हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार एक कथा भगवान श्रीहरि के वामन अवतार से जुड़ी है। मान्यता है कि सबसे पहले महालक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था। उस दिन सावन माह की पूर्णिमा तिथि ही थी। तभी से हर वर्ष सावन माह की पूर्णिमा पर ये पर्व मनाया जाता है। यहां जानिए ये कथा…

  • कथा के अनुसार प्राचीन काल में राजा बलि देवताओं के स्वर्ग को जीतने के लिए यज्ञ कर रहा था। तब देवराज इंद्र ने विष्णुजी से प्रार्थना की कि वे राजा बलि से सभी देवताओं की रक्षा करें। इसके बाद श्रीहरि वामन अवतार लेकर एक ब्राह्मण के रूप में राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंचे। ब्राह्मण ने बलि से दान में तीन पग भूमि मांगी। बलि ने सोचा कि छोटा सा ब्राह्मण है, तीन पग में कितनी जमीन ले पाएगा। ऐसा सोचकर बलि ने वामन को तीन पग भूमि देने का वचन दे दिया।
  • ब्राह्मण वेष में श्रीहरि ने अपना कद बढ़ाना शुरू किया और एक पग में पूरी पृथ्वी नाप ली। दूसरे पग में पूरा ब्राह्मांड नाप लिया। इसके बाद ब्राह्मण ने बलि से पूछा कि अब मैं तीसरा पैर कहां रखूं? राजा बलि समझ गए कि ये सामान्य ब्राह्मण नहीं हैं। बलि ने तीसरा पैर रखने के लिए अपना सिर आगे कर दिया। ये देखकर वामन अवतार प्रसन्न हो गए और विष्णुजी के स्वरूप में आकर बलि से वरदान मांगने के लिए कहा।
  • राजा बलि ने भगवान विष्णु से कहा कि आप हमेशा मेरे साथ पाताल में रहें। भगवान ने ये स्वीकार कर लिया और राजा के साथ पाताल लोक चले गए। जब ये बात महालक्ष्मी को मालूम हुई तो वे भी पाताल लोक गईं और राजा बलि की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसे भाई बना लिया। इसके बाद बलि ने देवी से उपहार मांगने के लिए कहा, तब लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को मांग लिया। राजा बलि ने अपनी बहन लक्ष्मी की बात मान ली और विष्णुजी को लौटा दिया।
  • मान्यता है कि तभी से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा रहा है। हर साल बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं और भाई बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं।

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