प्राइवेट स्कूलों की फीस के लिए आएगा कानून
March 19th, 2020 | Post by :- | 217 Views

प्रदेश के निजी स्कूलों में फीस के नाम पर हो रही मनमानी पर अब रोक लग जाएगी। शिक्षा विभाग अब इसके लिए एक कानून लाने जा रहा है। इस रेगुलेटरी एक्ट का ड्राफ्ट लगभग तैयार हो गया है।चर्चा इस पर हो रही है कि निजी स्कूलों को कौन सा विकल्प दिया जाए? एक साल में 8 प्रतिशत तक फीस बढ़ोतरी या तीन साल में एक बार ही बढ़ोतरी का। ड्राफ्ट जल्द सरकार को भेजा जा रहा है, जो फिर कैबिनेट में आएगा। बता दें कि प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी फीस के खिलाफ हुए आंदोलनों के बावजूद कोई अंकुश नहीं लग पा रहा है।

कई स्कूलों ने मनमाने ढंग से फीस में वृद्धि करके उसे जमा करवाने के फरमान छात्रों को जारी कर दिए हैं। अभिभावकों को न चाहते हुए भी बढ़ी हुई फीस अदा करनी पड़ रही है। प्रदेश सरकार के आदेशों पर शिक्षा विभाग पिछले काफी समय से निजी स्कूलों के लिए रेगुलेटरी एक्ट तैयार करने में जुटा हुआ है। इस एक्ट का प्रारूप लगभग तैयार हो गया है। इसमें निजी स्कूलों द्वारा हर वर्ष ली जाने वाली एडमिशन फीस से लेकर अन्य सभी प्रकार के फंड, छात्रों के शैक्षणिक भ्रमण, स्कूल परिसर में बेची जाने वाली वर्दियां, किताबें, कॉपियां व टक शॉप पर नियमों का निर्धारण किया गया है।

छात्रों की हर प्रकार से सुरक्षा के अलावा उनके आवागमन के लिए स्कूल बसों पर भी नीति तय की जा रही है। ऐसे में अब निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाई जा सकेगी। फिलहाल बुधवार तक स्कूलों में नियमानुसार बढ़ाई जाने वाली फीस का ढांचा तय नहीं हो पाया था। हालांकि पहले यह तय हुआ था कि पीटीए की अनुमति से निजी स्कूल 8 प्रतिशत फीस हर वर्ष बढ़ा सकेंगे, लेकिन शिक्षा निदेशालय यह विचार कर रहा है कि फीस का ढांचा प्रतिवर्ष की बजाय तीसरे वर्ष बढ़ाने का तय किया जाए।

हर साल आती हैं प्राइवेट स्कूलों की शिकायतें

निजी स्कूल पिछले कई दशकों से छात्रों से भारी-भरकम एडमिशन फीस लेते आ रहे हैं, जिससे अरबों रुपये निजी स्कूल प्रबंधकों की जेबों में जा चुके हैं। इसी के फलस्वरूप निजी स्कूलों का आधारभूत ढांचा और आलीशान स्कूल भवन बन पाए हैं। इसके बावजूद कई निजी स्कूलों में शिक्षकों को न्यूनतम वेतन भी प्रदान नहीं किया जा रहा। जबकि सरकारी स्कूलों में यह प्रावधान है कि छात्रों से चार बार न्यूनतम एडमिशन फीस ली जाए। यह फीस पहली, छठी, नौंवी और 11 वीं कक्षा में ली जाती है। इसी तर्ज पर अब निजी स्कूलों की न्यूनतम एडमिशन फीस भी तय की जा सकती है।

जल्द सरकार को सौंपा जाएगा ड्राफ्ट

उच्च शिक्षा निदेशक अमरजीत शर्मा का कहना है कि निजी स्कूलों के लिए रेगुलेटरी एक्ट लगभग तैयार कर दिया गया है। एक-दो दिन में इसे सरकार को सौंप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें हर वर्ष 8 प्रतिशत फीस वृद्धि का प्रावधान किया जाए या हर तीसरे वर्ष इस पर निर्णय होना बाकी है।

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