जिस पानी के लिए रानी ने दी थी जान, उसी को सहेज नहीं पा रहा इंसान #news4
April 2nd, 2022 | Post by :- | 104 Views

ऐतिहासिक धरोहरें अनदेखी व उपेक्षा की मार सह रही हैं। इनके पीछे छिपा इतिहास रोचक तो है, लेकिन इन्हें सहेजने की कोशिशें न होने से इनका वजूद अब खतरे में आ गया है। इतिहास को समेटे हुए चंबा का राजनौण अब धूमिल होता नजर आ रहा है। इसकी कहानी बताती है कि जब चंबा में संकट आया तो रानी सुनैयना नगर की खातिर अपने प्राणों की आहुति देने से भी पीछे नहीं रहीं। आखिर जिस नगर में आज हजारों लोग राहत के साथ गुजर-बसर कर रहे हैं अगर इतिहास में रानी की कुर्बानी न दर्ज होती तो शायद चंबा ही न बसता। रानी सुनैयना ने भविष्य के संकट को देखते हुए सर्वाेच्च बलिदान दिया। उन्होंने जीवित समाधि ली और आज चंबा नगर विकास की रफ्तार पकड़ चुका है।

चंबा के चौतड़ा मोहल्ला में स्थित ऐतिहासक राजनौण में सूखे पड़े नल।

हैरानी इस बात की है कि रानी सुनैयना के बलिदान के बाद जिस जगह जल निकला था, उसकी देखरेख करने में जल शक्ति विभाग व नगर परिषद पूरी तरह से सफल नहीं हो पाए। राजनौण के नाम से मशहूर यह स्थल पूरा साल सूखे की जद में रहता है। यहां अब पानी का स्तर बेहद नीचे जा चुका है। लोगों को राजनौण से पानी हासिल करने के लिए लंबी कतारों में खड़े रहना पड़ता है। नगर परिषद व सूही मेला उत्थान समिति ने अतिरिक्त पेयजल के बंदोबस्त का प्रयास किया है, लेकिन राजनौण में पानी की यह व्यवस्था सिर्फ मेले के दौरान तीन दिन तक रहती है और मेला खत्म होने के बाद फिर से राजनौण का पानी सूख जाता है। जल शक्ति विभाग शहर को निर्धारित मात्रा में पेयजल मुहैया करवाने के दावे कर रहा है और इसकी व्यवस्था के लिए बकायदा टैंक का प्रबंध भी किया गया है, लेकिन इतिहास में दर्ज राजनौण को बचाने की कवायद कहीं से शुरू होती नजर नहीं आ रही है न तो नगर परिषद स्तर पर ऐसी कोई मुहिम पूरे साल के दौरान छेड़ी गई है और न ही प्रशासन या जल शक्ति विभाग ने राजनौण की हालत को सुधारने के प्रयास किए हैं।

चंबा के चौतड़ा मोहल्ला में स्थित ऐतिहासक राजनौण में सूखे पड़े नल।

प्रशासन ऐतिहासिक चीजों के संरक्षण के प्रति गंभीर है। राजनौण के संबंध में भी नगर परिषद व जल शक्ति विभाग को जल्द ही निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि इस ऐतिहासिक स्मारक का जीर्णाेद्धार हो सके।

-डीसी राणा, उपायुक्त चंबा

सूही जातर मेले को लेकर नगर परिषद ने तैयारियां शुरू कर दी हैैं। यह मेला तीन दिन तक चलेगा। नगर परिषद ने इस संबंध में बैठक कर ली है। राजनौण के ऐतिहासिक नलों में पानी की व्यवस्था साल भर हो इसके लिए भी योजना बनाई जाएगी, ताकि इन नलों से निकलने वाले पानी की कोई बर्बादी ना हो।

-नीलम नैयर, अध्यक्ष नगर परिषद।

राजनौण का एक अपना इतिहास है। इस ऐतिहासिक नालों में पानी जरूर आना चाहिए। मगर उस पानी को सहेजने के लिए भी कोई योजना तैयार होनी चाहिए, ताकि पानी की बर्बादी न हो।

ललिता वकील, पद्मश्री

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