शरीरिक दुष्कर्म पीड़ित मासूम का मानसिक दुष्कर्म मुख्यमंत्री के स्पनो की मंडी जिले का कारनामा
August 10th, 2019 | Post by :- | 163 Views

जी हां एक मासूम, जो हवस के भेड़ियों का शिकार हो गई, लेकिन उसका यह दुष्कर्म रूका नहीं, अब सरकारी सिस्टम में उसका मानसिक दुष्कर्म नितदिन हो रहा है। मेडिकल के लिए लाई इस साढे 4 वर्ष की बच्ची को पांच घंटे भूखी-प्यासी बिठाए रखा गया । सुबह नौ बजे अस्पताल बुलाकर दो बजे इसका मेडिकल करवाया गया।
पिछले चार दिनों से कई तरह की मानसिक पीड़ा व परेशानियों से जूझ रही रिवालसर क्षेत्र की मासूम व उसके परिजनों की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक बार मेडिकल और उसके बाद कई तरह के टेस्ट करवाने के बाद चार वर्षीय मासूम को फिर से मेडिकल के लिए शुक्रवार को पांच घंटे तक भूखे-प्यासे नेरचौक मेडिकल कालेज में बिठाए रखा।

मासूम और उसके परिजनों को सुबह नौ बजे नेरचौक मेडिकल कालेज बुला लिया गया और उसके बाद दो बजे तक किसी ने उनकी सुध तक नहीं ली। परिजन कई बार पुलिस व नेरचौक मेडिकल कालेज के स्टाफ से बात करते रहे, लेकिन किसी को मासूम का ख्याल नहीं आया और थोड़ी देर में मेडिकल टेस्ट करने के आश्वासन दिए गए। यही नहीं, मेडिकल के लिए मासूम को पानी पिलाने और कुछ भी न खिलाने के हिदायत दी गई थी।

दोपहर दो बजे के लगभग जब मासूम के परिजनों के साथ आए कुछ स्थानियों लोगों और जनप्रतिनिनिधयों ने पुलिस कर्मियों के सामने कड़ी आपत्ति जाहिर की और हंगामा होने की नौबत आ गई। तब जाकर पुलिस कर्मी व नेरचौक मेडिकल कालेज का स्टाफ हरकत में आया। इसके बाद मासूम बच्ची का मेडिकल टेस्ट करवाया गया।

वहीं, इस बारे में नेरचौक मेडिकल कालेज के चिकित्सा अधिक्षक देवेंद्र शर्मा ने बताया कि बच्ची का मेडिकल व कुछ टेस्ट कई विशेषज्ञयों ने मिल कर करने थे, जबकि चिकित्सक कुछ अन्य गंभीर मामलों में व्यस्त थे। इस वजह से मेडिकल में देरी हुई है। उन्होंने कहा कि बच्ची को कुछ खिलाने-पिलाने से मना नहीं किया गया था। माता-पिता से ही बात को समझने में शायद कोई गलती हुई है।

नेरचौक का मेडिकल कॉलेज कितना व्यस्त होगा, यह आप इसकी ओपीडी से ही पता लगा सकते हैं। लेकिन यही सिस्टम है जो इस मासूम का बार बार दुष्कर्म कर रहा है। इस सिस्टम में जुड़े हर अधिकारी को उसी नजर से देखना जायज होगा, जिस नजर से दुष्कर्म के दरिंदे को देखा गया। ऐसे में इनकी सजा भी निर्धारित होनी चाहिए और वह कम नहीं होनी चाहिए।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।