बुरा बर्ताव करने वाले बेटे से उपहार के रूप में दी गई अपनी संपत्ति वापस ले सकते हैं मात-पिता : बॉम्बे हाई कोर्ट
October 31st, 2019 | Post by :- | 417 Views
बुजुर्ग माता-पिता के साथ यदि उनका बेटा दुर्व्यवहार करता है या उनकी देखभाल करने में विफल रहता है, तो वे उपहार के रूप में बेटे को दी गई अपनी संपत्ति का हिस्सा वापस ले सकते हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस बारे में फैसला सुनाया है। वरिष्ठ नागरिकों के रखरखाव के लिए विशेष कानून का हवाला देते हुए जस्टिस रणजीत मोरे और अनुजा प्रभुदेसाई ने एक ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा।
इस मामले में अंधेरी निवासी बुजुर्ग ने उपहार में दिए अपने बेटे को फ्लैट का 50 फीसद हिस्से की डीड को रद कर दिया। यह गिफ्ट बेटे और बहू के कहने पर बुजुर्ग ने दिया था। न्यायाधीशों ने कहा कि यह निहित था कि फ्लैट में 50 फीसद की हिस्सेदारी के हस्तांतरण के बाद बुजुर्ग पिता और उनकी दूसरी पत्नी की देखभाल की जाएगी।
जाहिर है, बेटे और बहू पिता की देखभाल करने के लिए तैयार हैं। मगर, वे पिता की दूसरी पत्नी की सेवा करने के इच्छुक नहीं हैं। उपरोक्त परिस्थितियों में हमें ट्रिब्यूनल के आदेश (गिफ्ट में दी गई संपत्ति को रद करना) में कोई त्रुटि नहीं मिली है। इसलिए हम बुजुर्ग के बेटे की तरफ से लगाई गई इस याचिका को सुनने के इच्छुक नहीं.
यह था मामला
साल 2014 में वरिष्ठ नागरिक की पहली पत्नी की मृत्यु हो गई थी। पिछले साल, जब उन्होंने पुनर्विवाह करने की इच्छा जाहिर की, तो उसके बेटे और बेटी ने अनुरोध किया था कि अंधेरी फ्लैट का एक हिस्सा उन्हें हस्तांतरित किया जाए। परिवार में शांति के लिए उन्होंने मई 2014 में उन्होंने अपने बेटे को फ्लैट की 50 फीसद हिस्सेदारी स्थानांतरित कर दी।
मगर, इसके बाद बेटे-बहू ने बुजुर्ग की दूसरी पत्नी का अपमान करना शुरू कर दिया। पिता और उनकी दूसरी पत्नी को अंधेरी फ्लैट छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। तब पिता ने मेंटिनेंस ट्रिब्यूनल से संपर्क किया, जिसने उपहार की डीड को रद कर दिया। बेटे ने ट्रिब्यूनल के आदेश को चुनौती दी, लेकिन हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
क्या कहता है नियम
2007 के कानून में प्रावधान है कि जिन्होंने अपनी संपत्ति या परिसंपत्तियों को किसी व्यक्ति को दी है, वह व्यक्ति उनकी देखभाल करेगा। यदि एक वरिष्ठ नागरिक ने 2007 में इस शर्त पर संपत्ति में अपना हिस्सा स्थानांतरित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं कि उनकी मूल जरूरतों को ध्यान रखा जाएगा। मगर, यदि व्यक्ति समझौते का सम्मान करने से इंकार कर देता है, तो मेंटिनेंस ट्रिब्यूनल को अधिकार है कि वह समझौते को रद कर दे।
मेंटिनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर
सिटीजन एक्ट 2007 में यह कानूनी बाध्यता है कि बच्चे अपने माता-पिता का ध्यान रखेंगे। उन्हें बुढ़ापे में अकेला छोड़ देना अपराध है। 60 साल से अधिक उम्र का बुजुर्ग ऐसा नहीं होने पर मेंटिनेंस की मांग कर सकता है और स्पेशल ट्रिब्यूनल उसे 10 हजार रुपए तक का भत्ता दिला सकती है। ऐसा नहीं करने पर तीन महीनों की सजा हो सकती है। वयस्क बेटा-बेटी या वयस्क पोता-पोती इसके लिए जिम्मेदार होंगे।

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