पहले दिन मेहरबान रहे श्री इंद्रूनाग, दूसरे दिन भी छंट गए बादल
November 8th, 2019 | Post by :- | 195 Views

बारिश के देवता भगवान श्री इंद्रूनाग पहले दिन जयराम सरकार पर मेहरबान रहे हैं। लेकिन दूसरे दिन यानी शुक्रवार सुबह से बादल छाए हुए थे, लेकिन दिन चढ़ने के साथ बादल छंटना शुरू हो गए। पांच नवंबर को मुख्यमंत्री ने खनियारा स्थित श्री इंद्रूनाग मंदिर में विशेष पूजा कर इन्वेस्टर्स मीट विशेषकर पीएम मोदी के कार्यक्रम के दौरान बारिश न होने की प्रार्थना की थी। यह श्री इंद्रूनाग की ही मेहरबानी है कि मौसम विभाग के छह व सात नवंबर को कांगड़ा, चंबा व मंडी जिलों में आंधी चलने व बारिश की संभावना बाबत जारी अलर्ट के बावजूद पीएम मोदी के कार्यक्रम के दौरान बारिश नहीं हुई।

हालांकि वीरवार को 11 बजे जब पीएम साई ग्राउंड में हेलीकॉप्टर से उतरने वाले थे तो जरूर बारिश की बूंदें गिरी। इसके बाद पुलिस मैदान धर्मशाला में इन्वेस्टर्स मीट के शुभारंभ कार्यक्रम से लेकर पीएम की वापसी तक श्री इंद्रूनाग मेहरबान रहे। हालांकि इसके बाद हल्की बारिश व ओलावृष्टि हुई, लेकिन दोबारा बारिश थम गई।

श्री इंद्रूनाग धर्मशाला क्षेत्र के पीठासीन देवता हैं और जब तक वह मेहरबान न हों, तब तक कोई भी बड़ा आयोजन सफल नहीं होता है। इसके मद्देनजर तीन नवंबर को जिला प्रशासन के बाद मुख्यमंत्री खनियारा स्थित इंद्रूनाग के द्वार पहुंचे और उन्होंने इन्वेस्टर्स मीट के दौरान बारिश न होने के लिए प्रार्थना की थी। इससे पहले दिसंबर में प्रदेश सरकार की एक वर्ष की उपलब्धियों बाबत आयोजित जन आभार रैली के सफल आयोजन के लिए भी मुख्यमंत्री ने मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। उस समय जन आभार रैली के दौरान मौसम साफ रहा था।

2005 में एचपीसीए पहली बार पहुंची थी मंदिर

धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनने के बाद पहली बार हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीपीसी) श्री इंद्रूनाग के मंदिर पहुंची थी। वर्ष 2005 में भारतीय बोर्ड इलेवन व पाक बोर्ड इलेवन के बीच मैच के सफल आयोजन के लिए तत्कालीन सरकार ने भी मंदिर में पूजा की थी और मैचों का आयोजन सफल रहा था। इसके बाद जब भी कोई बड़ा मैच धर्मशाला स्टेडियम में होता है तो एचपीसीए विशेष रूप से पूजा अर्चना करती है।

यह है मान्यता

श्री इंद्रूनाग को बारिश का देवता भी कहा जाता है। जब भी खनियारा समेत साथ लगते क्षेत्रों में फसलों की बिजाई के दौरान बारिश की जरूरत होती है तो ग्रामीण व किसान एकत्रित होकर मंदिर पहुंचते हैं और गुर खेल (खेलपात्र) का आयोजन करते हैं। इसके बाद भगवान के गुर इसके लिए विधि सुझाते हैं और उसके तहत पूजा अर्चना करने पर भगवान बारिश देते हैं और ऐसे ही मौसम साफ होने के लिए किया जाता है।

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