Nag Panchami 2022: घर पर भी हो सकती है कालसर्प दोष निवारण की पूजा, इस मंत्र का करें जाप, जानिए आसान विधि #news4
August 1st, 2022 | Post by :- | 90 Views

नाग पंचमी का दिन कालसर्प दोष से निदान पाने के लिए विशेष पूजा पाठ करने को बहुत ही उपयुक्‍त दिन है। अगर कोई कालसर्प दोष से पीड़ित है तो उसे हर साल सावन में नागपंचमी के दिन रुद्राभिषेक करवाना चाहिए। नाग पंचमी के दिन चांदी के नाग-नागिन का दान करना चाहिए। इसके साथ-साथ सावन के माह में रोजाना राहु और केतु के मंत्र का जाप करें। कालसर्प दोष निवारण के लिए नागपंचमी के दिन नागों की पूजा का विधान है। इसलिए इस दिन कालसर्प दोष वालों को चांदी का नाग-नागिन का जोड़ा भगवान शिव को अर्पित करने से भी कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

घर में भी हो सकती है कालसर्प दोष की पूजा

कालसर्प दोष की पूजा घर में भी की जा सकती है। प्रत्येक सोमवार को प्रातः सूर्योदय के समय एक घंटे के भीतर स्नान से निवृत्त होकर शुद्धिपूर्वक शिवलिंग पर 11 अक्षत यानी साबुत चावल के दाने “श्री राम” का उच्चारण करते हुए अर्पित करें एवं मन ही मन अपनी विशेष इच्छा का स्मरण करें। चांदी के सर्प का जोड़ा नाग पंचमी को दूध में रखकर शिवलिंग पर चढ़ाने से भी इस दोष निवारण होता है। सर्प गायत्री जाप या महामृत्युंजय जाप भी इसके निवारण के बड़े उपाय हैं। त्रियंबकेश्वर नासिक या उज्जैन आदि तीर्थ क्षेत्रों में में सर्प पूजा करवाने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

कुंडली में राहु केतु भारी तो यह करें

अगर कुंडली में राहु केतु भारी हैं, तो नाग पंचमी पर जरूर सांपों की पूजा करें। शिवलिंग या नाग देवता को दूध चढ़ाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि दूध पीतल के लोटे में हो। नाग पंचमी पर सुई धागे का इस्तेमाल करना भी अशुभ माना जाता है और इस दिन लोहे के बर्तन में भोजन नहीं बनाना चाहिए। महाकाल रूद्र स्रोत शिव अथर्व शीर्ष महामृत्युंजय स्रोत कालसर्प दोष निवारण स्रोत और कालसर्प दोष शांति प्रार्थना मंत्र और मनसा देवी स्रोत्र का पाठ जाप और श्रवण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

इस मंत्र का करें जाप

धर्मशाला मसरेड़ के पंडित विशाल शर्मा ने कहा कि जिनको काल सर्प योग है, वे शांति के लिए नाग पंचमी के दिन रुद्राभिषेक करें। पंचमी के दिन पीपल के नीचे, एक कटोरी या डूने में कच्चा दूध रख दीजिये, घी का दीप जलाएं, कच्चा आटा, घी और गुड़ मिलाकर एक छोटा लड्डू बना कर रख दें और ये मंत्र बोल कर प्रार्थना करें। ॐ अनंताय नमः, वासुकाय नमः, शंख पालाय नमः, तक्षकाय नमः, कर्कोटकाय नमः, धनंजयाय नमः, ऐरावताय नमः, मणि भद्राय नमः, धृतराष्ट्राय नमः, कालियाये नमः का उचारण करें। शिव मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करें।

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