नाग पूजा / सांप दूध नहीं पीता, ये उसके लिए जहर समान, पंचमी पर नाग प्रतिमा की करें पूजा
August 5th, 2019 | Post by :- | 480 Views

हिन्दू धर्म में पशु-पक्षी को भी पूजने का विधान है, क्योंकि ये सभी भी पर्यावरण को व्यवस्थित रखने में सहायक होते है। सोमवार, 5 अगस्त को नाग पंचमी है। इस दिन सांपों की पूजा की जाती है। हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ये पर्व मनाया जाता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य और भागवत कथाकार पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए शास्त्रों में बताई सांपों से जुड़ी खास बातें…

  • सांप को दूध पिलाने से बचें

पं. शर्मा के मुताबिक भगवान शिव नाग को गहनों के रूप में धारण करते हैं। पंचमी पर शिवजी के साथ नाग की भी पूजा करें। जीवित सांप को नहीं प्रतिमा को दूध चढ़ाएं। नाग का पूजन सदैव नाग मंदिर में ही करना चाहिए। सपेरे नाग को पकड़कर उनके दांतों को तोड़ देते है। जिससे सांप शिकार करने लायक नहीं रहता और पंचमी के बाद भूख से मर जाता है। इसका पाप पूजन करने वाले को भी लगता है। इस भ्रम में नहीं आना चाहिए कि नाग दूध पीता है। नाग शाकाहारी प्राणी नहीं है, वह दूध नहीं पीता। दूध सांप के लिए जहर की तरह होता है। जिससे सांप मर सकता है।

  • नाग पूजा में हल्दी का उपयोग करें

नाग पूजन में हल्दी को उपयोग जरूर करें। धूप, दीप अगरबत्ती जलाकर नाग पूजन करें। देवताओं के समान ही मिठाई का भोग लगाएं। नारियल अर्पित करें।

  • कालसर्प दोष और नाग पंचमी

कई लोग नाग पंचमी पर कालसर्प दोष का पूजन करते है और नाग की दहनादि क्रिया करते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि कालसर्प की पूजा नाग पंचमी पर ही की जाए। जन्म कुंडली में एक दोष होता है, जिसे सर्पदोष कहते हैं। इससे सांप का कोई संबंध नहीं है। इस दोष के चक्कर में कभी भी सांप को प्रताडित नहीं करना चाहिए। जीवित सांप के पूजन से बचना चाहिए और न ही उसकी दहन क्रिया करें। ये पाप बढ़ाने वाला काम है। कालसर्प दोष राहु-केतु से संबंधित दोष है। राहु का मुख सर्प समान होने से इसको सर्प दोष या कालसर्प दोष कहा जाता है। इसके लिए राहु-केतु की पूजा करनी चाहिए।

  • सांपों से जुड़ी जानकारी

पं. शर्मा के अनुसार सांप की आयु अधिकतम एक सौ बीस वर्ष होती है। इसके अलावा इनकी मृत्यु आठ प्रकार से होती है। इंसान के द्वारा, मोर, नेवला, बिल्ली, चकोर, शूकर और बिच्छु द्वारा मारने से या किसी बडे जानवर के पैरों के नीचे दबने से सांप की मृत्यु होती है। इन सभी से बच जाने पर भी एक सांप एक सौ बीस वर्ष जीता है।
सापं आठ कारणों से डंसता है। पैरों की नीचे दबने से, वैर भाव से, खुद की संतान की रक्षा हेतु, उन्मांद में, भूखा हो तो, काल पूरा होने, डर की वजह से सांप किसी इंसान को डंस सकता है।
सांप का एक मुंह, बत्तीस दांत, दो भागों में बंटी एक जीभ होती है। विषपूर्ण चार दाढ़े होती हैं। इनके नाम हैं मकरी, कराली, कालरात्रि और यमदूती।
यमदूति नाम की दाढ़ सबसे छोटी होती और खतरनाक होती है। इससे सांप जिसको काट लेता है, उसके प्राण बचना बहुत मुश्किल होता है। यमदूति दाढ़ से काटने पर कछुए के आकार के समान निशान दिखाई देता है। मकरी दाढ़ का अस्त्र के समान निशान बनता है। कराली दाढ़ का निशान कौऐ के पैर के समान होता है। कालरात्रि का हथेली के समान निशान होता है।
सांपों में सदा विष नहीं होता। ये दाढ़ों के ऊपर विषग्रंथी में बनता है और मस्तिष्क से होते हुए दांतों के द्वारा शिकार के शरीर में जाता है। इन चारों दाढ़ों को रंग भी सफेद, लाल, पीला और काला होता है। सांपों के जहर से बचने के लिए सर्वप्रथम निकट के चिकित्सालय में पहुंचना चाहिए।

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