National Drama Festival: नाहन में बताया, महायुद्धों से इंसानियत ही नहीं भाषा व साइंस भी हो जाएंगे खत्म #news4
October 9th, 2022 | Post by :- | 85 Views

नाहन : रंग संस्कार थियेटर अलवर द्वारा स्टेपको के तीन दिवसीय स्व. शूरवीर सिंह स्मृति राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में शनिवार शाम को दलीप वैरागी द्वारा लिखित नाटक “उत्तर कामायनी” का मंचन जिला परिषद भवन नाहन में आरंभ हुआ। नाटक उत्सव कामायनी का कथानक तीसरे विश्व युद्ध के दुःस्वप्न की कल्पना पर आधारित है। परमाणु विस्फोट के पश्चात की पृष्ठभूमि से यह नाटक प्रारंभ होता है। परमाणु विस्फोट से उत्पन्न हुए प्रभाव को देशराज मीना ने सेट के दृश्यबंध में बखूबी उकेरा।

इसी प्रभाव को ही देशराज की प्रकाश परिकल्पना ने गहरे रंग व मायने प्रदान किए। अलवर के नवोदित कलाकार निखिल शर्मा ने पार्श्व संगीत व ध्वनि प्रभावों से विध्वंस के वातावरण को प्रभावी बना दिया। नाटक के प्रारंभ में वाइस ओवर के द्वारा यूक्रेन-रूस युद्ध पर न्यूज चैनलों की बाइट्स देकर नाटक को एक संदर्भ दे दिया गया कि आज किस कदर पूरी दुनिया बारूद के ढेर पर खड़ी है। केवल एक चिंगारी की जरूरत है और सब कुछ स्वाहा। इसी के साथ-साथ लड़ाकू विमानों की गर्जना ने प्रभाव को पैदा करने व दर्शकों के मस्तिष्क पर नाटक के टेक आफ के लिए जमीन तैयार की। इसी समतल जमीन पर खड़े होकर अपने अभिनय की उड़ान भरते हैं अलवर के युवा अभिनेता हितेश जैमन। हितेश जैमन पिछले चार-पांच वर्षों से रंगमंच पर सक्रिय हैं। नाटक कहता है कि महायुद्धों में केवल इंसानियत के मरने का ही खतरा नहीं है, बल्कि उसके साथ-साथ करोड़ों वर्षों से इंसानियत के साथ विकसित हुए सोचने समझने के औजार भाषा और साइंस भी खत्म हो जाएंगे। इसलिए नाटक के संवादों को, “भाषा ने आत्महत्या कर ली” और “साइंस ने आत्महत्या कर ली” हितेश जैमन सधे हुए तारीके से डिलीवर करते हैं कि इन संवादों के अभिप्राय दर्शकों के समक्ष खुलते जाते हैं।

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