न बिजली न पानी, न गैस और न ही बीपीएल परिवार में चयन
February 28th, 2020 | Post by :- | 302 Views

गरीब, लाचार प्रीतम चन्द की गुहार, सुनो सरकार
क्षतिग्रस्त, ज़र्जर कच्चे मकान में रहने को मजबूर चनाल्टी गाँव का प्रीतम चन्द
न बिजली न पानी, न गैस और न ही बीपीएल परिवार में चयन
मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है अधेड़

गरीबी से जूझ रहे प्रीतम चन्द को इससे उबरने का कोई उपाए नहीं सूझ रहा है। बीपीएल परिवार में चयन न उन्हें से उसे सरकारी योजनाओ का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। आय का कोई साधन न होने के कारण बह अपने ज़र्जर मकान की मुरम्मत करने में भी नाकाम है और डर के साये में उसी में रहने को विवश है। वह भी सरकारी योजनाओं का लाभ चाहता है लेकिन किसके दरवार मे जा कर गिडगिडाए।

कुल्लू के बंजार उपमंडल की कंडीधार पंचायत के चनालटी गाँव के अनुसूचित जाती से ताल्लुक रखने बाले 50 वर्षीय अधेड़ प्रीतम चन्द पुत्र स्वर्गीय मंनसु राम अभी तक सरकार द्वारा गरीबों को दी जाने वाली मूलभूत सुविधाओं से बंचित हैं। प्रीतम चन्द ने कई साल पहले चनालाटी गाँव में अपने खेत में एक कमरे वाले छोटे से कच्चे मकान का निर्माण किया था जिसमे एक छोटी सी रसोई भी बनायीं थी। करीब चार साल पहले यह मकान भूस्खलन के कारण रसोई की तरफ से काफी क्षतिग्रस्त हो गया था जिसे लकड़ी की स्पोटें दे कर खड़ा रखा गया है। ज़र्ज़र हालत में कच्चा मकान कभी भी ढह सकता है जिस वजह से प्रीतम चन्द खतरे के साये में रहने को मजबूर है।

प्रीतम चन्द का कहना है कि उसे अभी तक सरकार की ओर से गरीबों को दी जाने वाली किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिला है। इसने कई बार ग्राम पंचायत के चक्कर लगाए लेकिन इसकी गुहार कोई नहीं सुन रहा है। इसके छोटे से कच्चे मकान में अभी तक न बिजली है, न पानी है, और न ही रसोई गैस है। वर्षों पहले इसने अपनी कुल नौ विस्बा भूमि के एक हिस्से पर एक छोटा सा मकान बनाया था लेकिन अब यह मकान गिरने वाला है इसे यहाँ रहने से डर लग रहा है।
यूँ तो इस शख्स को तीर्थन घाटी के अधिकतर लोग पी.सी.डोगरा के नाम से जानते है लेकिन गरीबी इस के लिए अभिशाप बनी हुयी है। इसका कहना है कि करीब 25 साल तक उसने गुशैनी और यहाँ के आसपास के गाँव में मेहनत मजदूरी का काम किया है। अपने गुज़ारे के लिए यह कभी मनरेगा में दिहाडी लगाता है, तो कभी कभी आसपास के गाँव में जाकर कपड़ों की सिलाई और रिपेरिंग का काम करता है।

प्रीतम चन्द का कहना है कि यह धोबी ड्राई क्लीनर का काम भी जानता है। तीर्थन घाटी में पर्यटकों के आने से उसे भी रोजगार की उम्मीद जगी है क्यूंकि अब इसने अपने घर से कुछ ही दूरी पर मुख्य सडक पर कुछ माह पहले एक छोटी सी ड्राई क्लीनिंग की दुकान खोली है। जहाँ पर इसके पास पर्यटन इकाईयों से कपडे धोने और इस्त्री करने का थोडा बहुत काम आता रहता है।
प्रीत्तम चन्द का कहना है कि इसने मनेरेगा के कार्य में भी पुरे सौ दिन से भी ज्यादा कार्य किया है लेकिन इसकी एवज में भी उसे रोशनी के लिए मात्र एक सोलर लैंप ही मिला है। यह बताते है कि सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना तो दूर की बात इसे अपना रोजगार शुरू करने के लिए गुशैनी बैंक से वाशिंग मशीन लेने हेतु मात्र पचास हजार का लोन भी मंजूर नही हो पाया है। बीमारी की हालात में इसके कुछ हितैषी लोग इसकी मदद करते है लेकिन अभी तक किसी भी समाजसेवी संस्था, पंचयत प्रतिनिधिओं और शासन प्रशासन के किसी अधिकारी ने इसका हाल जानने की कोशिश नही की है।

प्रीतम चन्द ने बताया कि इसकी पत्नी वर्ष 2007 में उसके तीन साल के बेटे को साथ लेकर कहीं फरार हो गई जिसका आज तक कोई भी पता नही है। लोगों का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में अति निर्धन परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त एवं समृद्ध बनाने के लिए बीपीएल योजना चलाई जा रही है जिसके लिए हर ग्राम पंचायत में सर्वेक्षण किया जाता है। ग्राम पंचायत के अंदर जो अति निर्धन परिवार हो जो कच्चे मकान में रहता हो और जिसकी सालाना आय बहुत कम हो ऐसे लोगों को चयनित करके बीपीएल सूचि में शामिल किया जाता है। बीपीएल सूचि में शामिल परिवार को सरकार की और से सस्ता राशन ,मुफ्त शिक्षा, सुचना अधिकार की निशुल्क सेवा, राष्ट्रिय ग्रामीण आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री ग्राम कौशल योजना, और मुख्यमंत्री आवास योजना जैसी कई सरकारी सहायता मिलती है ताकि गरीब लोगों का भी बेहतर विकास हो सके। इस योजना में उसे शामिल न किये जाने का भी प्रीतम चन्द को मलाल है। वह चाहता है कि उसका नाम भी बीपीएल सूची में शामिल हो ताकि वह भी अपने घर की मुरम्मत कर सके, उसे भी सस्ता राशन और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ मिले लेकिन उसकी गुहार कोई नहीं सुन रहा है। प्रीतम चन्द ने सरकार और प्रदेश के मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि उसकी गुहार को सुना जाए ताकि इसे सरकारी सुविधाओं का लाभ मिले और यह भी विकास की मुख्य धारा में जुड़ सके।

तीर्थन घाटी के समाजसेवी खुशाल चन्द ठाकुर का कहना है कि चनाल्टी गांव का प्रीतम चन्द वास्तव में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने को मजबूर है जिसको सरकार की ओर स गरीबों कोे दी जाने वाली सुविधाओं की सख्त जरूरत है इसका मकान गिरने के कगार पर है जिसे तुरन्त मुरम्मत की आवश्यकता है।

ग्राम पंचायत कंडीधार पंचायत की प्रधान कि चमना देवी का कहना है कि बीपीएल चयन के लिए सर्वे कमेटी बनाई गई थी लेकिन प्रीतम चन्द का चयन नहीं हुआ है अब प्रीतम चन्द को मकान बनाने के लिए किसी अन्य योजना में सहायता दिलाई जाएगी।

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