तीर्थन घाटी में धूमधाम से मनाई गई यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की नौवीं वर्षगांठ। #news4
June 26th, 2022 | Post by :- | 276 Views

तीर्थन घाटी गुशैनी बंजार (परस राम भारती):- जिला कुल्लू उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क शाईरोपा परिसर में वन विभाग की वन्य प्राणी विंग द्वारा आयोजित विश्व धरोहर उत्सव-2022 का आज इस समारोह के मुख्य अतिथि स्थानीय विधायक सुरेन्द्र शौरी द्वारा विधिवत रूप से समापन किया गया है। यह उत्सव ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को 25 जुन 2014 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने की खुशी में नौंवी वर्षगांठ स्मरणोत्सव के रुप में 20 जून से 26 जून तक बड़ी धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर तीर्थन घाटी की स्थानीय ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि और अन्य विभागीय अधिकारी गण विशेष रूप से उपस्थित रहे।

इस उत्सव के दौरान ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क की तीर्थन रेंज शाईरोपा परिसर में सप्ताह भर अनेकों गतिविधियां और अन्य कार्यक्रम ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीके से आयोजित किए गए। जिसमें ऑनलाइन प्रश्नोउतरी क्विज प्रतियोगिता के अलावा ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के ईको जॉन में स्थित कुछ चयनित विद्यालयों के बच्चों के लिए मैराथन दौड़ प्रतियोगिता, योगा सत्र, पेंटिंग, स्लॉगन राइटिंग, निबंध लेखन प्रतियोगिता, नेचर वॉक, बर्ड्स वॉचिंग जैसी अन्य कई गतिविधियां आयोजित करवाई गई। इसके अलावा स्थानीय महिला मंडलों व युवक मंडलों द्वारा कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। ईको जॉन में स्थित कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक पकवानों के स्टॉल इस मेले में आकर्षण का केन्द्र रहे।


इस मेले में स्थानीय लोगों के अलावा स्कुली छात्र छात्राओं, महिला व युवक मंडल व अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य, पर्यटन कारोबारियों, वन विभाग से सेवानिवृत अधिकारियों और बाहरी राज्यों से आए पर्यटकों ने हिस्सा लिया। बाहरी राज्यों से पर्यटकों ने इस उत्सव में हिस्सा लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक पकवानों का भरपुर लुल्फ उठाया।

विश्व धरोहर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने के बाद तीर्थन घाटी में साल दर साल पर्यटकों की आमद में बढ़ोतरी हुई है। स्थानीय लोगों को पर्यटन के माध्यम से घर द्वार पर स्वरोजगार का अवसर मिल रहा है।

आज से करीब दो दशक पहले तक यहां के लोगों की आजीविका पार्क क्षेत्र पर निर्भर थी लेकिन विश्व धरोहर की अधिसूचना जारी होने के पश्चात पार्क क्षेत्र से इनके हक हकूक छीन ले गए जिस कारण यहां के युवाओं को रोजगार की तलाश में बाहरी राज्यों में भटकना पड़ रहा है। पार्क प्रबंधन द्वारा स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं।

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य और जैविक विविधता का अनुपम खजाना भरा पड़ा है। इस पार्क में वन्यजीवों, परिंदों और जड़ी बूटियों की अनेकों प्रजातियां आज भी पाई जाती है जो समूचे विश्व में दुर्लभ या बिलुप्त होने के कगार पर है इसलिए यह स्थल पर्यटकों, प्रकृति प्रेमियों अनुसंधानकर्ताओं , ट्रैकरों, पर्वतारोहियों और रोमांच प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। शैक्षणिक सत्र में विशेषज्ञों द्वारा इस विश्व धरोहर स्थल की अहमियत, चुनौतियां और इसके संरक्षण व संवर्धन के साथ ईको पर्यटन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा परिचर्चा हुई है। बक्ताओं ने बताया कि इतनी आसानी से इस स्थल को विश्व धरोहर का तगमा नहीं मिला है बल्कि कई वर्षों की लंबी प्रक्रिया के बाद 25 जुन सन् 2014 में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को विश्व धरोहर का दर्जा मिला था इसलिए अब इस धरोहर विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाना जरूरी है।

विधायक सुरेन्द्र शौरी ने इस कार्यक्रम के आयोजन हेतु विभाग की सराहना की है और इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी दस महिला मंडलों के लिए दो दो हजार रुपए देने की घोषणा की है।
इन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की है कि यहां के प्राकृतिक संसाधनों बेशकीमती जड़ी बूटियों, वन्य प्राणियों और परिंदों को संरक्षित रखने में पार्क प्रबंधन का सहयोग करें। ताकि यहां के लोग लंबे समय तक पर्यटन से अपनी आजीविका कमा सके और इस धरोहर विरासत का सरंक्षण एवं संवर्द्धन हो सके। सांस्कृतिक कार्यक्रम में शिरकत के पश्चात विधायक सुरेन्द्र शौरी ने अकादमिक सत्र में ई लर्निंग मॉड्यूल और जीएचएनपी की प्रचार सामग्री का विमोचन करके लोगो को संबोधित किया।

इस कार्यक्रम के दौरान आयोजित आयोजित दो दिवसीय शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की श्रृंखला में देश व प्रदेश के कई नामी वन्य जीव विशेषज्ञों, शिक्षाविदों वैज्ञानिकों, पर्यटन संचालकों और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा कर्मचारियों ने भाग लिया। ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल स्मरणोत्सव के उपलक्ष में पैनल चर्चा, विशेषज्ञ व्याख्यान और अन्य कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा परिचर्चा हुई तथा प्रतिभागियों ने अपने अपने अनुभव साझा किए।

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क शमशी के वन मण्डल अधिकारी निशांत मंधोत्रा ने दो दिवसीय सत्र में सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और समापन अवसर पर इस कार्यक्रम के सफल आयोजन और सहयोग के लिए सभी लोगों का धन्यबाद किया। इस अवसर पर दो दिवसीय शैक्षणिक सत्र में राजीव कुमार सीडब्लूएलडब्लू, अजय श्रीवास्तव पीसीसीएफ एचओएफएफ हिमाचल प्रदेश, डॉक्टर संजीव पांडे सेवानिवृत्त पीआर सीसीएफ, रजनीश सचिव वन, मीरा शर्मा सीसीएफ जीएचएनपी, डॉ भूमेश भदौरिया सी2सी डब्ल्यूआईआई , डॉ.जीएस. गोरया, अजीत ठाकुर सीसीएफ रामपुर, विश्वास मखीजा इंडियन साइट्स टूर्स, विनय टंडन सेवानिवृत्त पीसीसीएफ एचओएफएफ, अनिल भारद्वाज सेवानिवृत्त आईएफएस, उपासना पटियाल सीसीएफ, सुशील कपटा एपीसीसीएफ प्रबंधन, अनिल ठाकुर एपीसीसीएफ, गोपाल ठाकुर अध्यक्ष बीटीसीए, अंकित सुद इको टूरिज्म विशेषज्ञ, स्टीफन मार्शल संस्थापक हिमालयन इको टूरिज्म, केशव ठाकुर अध्यक्ष ईको टूरिज्म को ऑपरेटिव सोसाइटी गुशैनी और तीर्थन घाटी के वरिष्ठ और अनुभवी टूरिस्ट गाइड संजू नेगी विशेष रूप से शामिल रहे।

इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु शाईरोपा मे तैनात वन विभाग के कर्मचारियों ने अपनी बेहतरीन सेवाएं दी है। इस मौके पर संस्कृतिक कार्यक्रम में मुख्य रूप से गोविंद सोनू ठाकुर इको टूरिज्म फैसिलिटेटर, फॉरेस्ट गार्ड उषा, फॉरेस्ट गार्ड रीना, और अनुशासन कमेटी में वन रक्षक जगदीश, फॉरेस्ट गार्ड और अकोमोडेशन ड्यूटीज में वन रक्षक ओम प्रकाश, वन रक्षक बिंटू, खिला देवी और एकेडमिक सेशन में हंसराज ठाकुर वन परिक्षेत्र अधिकारी शाईरोपा, वीआईपी सेवा में एमपीडब्ल्यू टेकराम और सुरत राम ने अपना एहम योगदान दिया है।

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