लाॅकडाउन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई / कोर्ट ने केंद्र से कहा- कोरोना से ज्यादा जानें तो दहशत ले लेगी, मजदूरों को समझाने के लिए भजन-कीर्तन करना पड़े तो वो भी करिए
March 31st, 2020 | Post by :- | 138 Views

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पलायन करने वाले लाखों प्रवासी मजदूरों को राहत दिए जाने की याचिका पर सुनवाई की। चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने केंद्र से कहा कि आप निश्चित करिए कि पलायन ना हो। कोरोना से ज्यादा लोगों की जान तो ये दहशत ले लेगी। इस पर केंद्र ने कहा कि अब एक भी मजदूर सड़क पर नहीं है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि हमने 22 लाख 88 हजार लोगों को खाना और रहने की जगह मुहैया कराई है। कोर्ट रूम में मौजूद गृह सचिव ने कहा कि अब एक भी प्रवासी मजदूर सड़क पर नहीं है और यह बात मैं ऑन रिकॉर्ड कह रहा हूं। इस पर कोर्ट ने कहा कि जिन प्रवासी मजदूरों को शेल्टर होम में रखा गया है, उन्हें समझाने के लिए अगर भजन-कीर्तन और नमाज जैसी चीजें करनी पड़ें तो वो भी कीजिए। केंद्र ने जवाब दिया कि हम काउंसिलिंग पर विचार करने रहे हैं और धार्मिक गुरुओं को भी इन शेल्टर होम में लेकर जाएंगे।
एडवोकेट एए श्रीवास्तव ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से पलायन करने वाले मजदूरों को खाना और रहने का स्थान मुहैया कराने के लिए निर्देश देने की अपील की थी।सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मौजूदा समय में लोगों के बीच डर और दहशत कोरोनावायरस से बड़ी समस्या बन रहा है। केंद्र सरकार इस मामले में बताए कि उसने इन लोगों के लिए क्या व्यवस्था की है।

कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिए

  • केंद्र हर हाल में पलायन को निश्चित करे। लोगों को खाना, रहने की जगह, पोषण, स्वास्थ्य की जरूरतों का ध्यान रखा जाए। संक्रमण के मामलों का फालोअप भी लिया जाए।
  • जिन शेल्टर होम में अप्रवासी मजदूरों को ठहराया जा रहा है, उनमें पीने के पानी, खाने, बिस्तरों और दवाइयों की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। यहां पुलिस की बजाय स्वयंसेवी जाए। डराने या बल प्रयोग जैसी बातें ना हों।
  • 24 घंटे के भीतर कोरोनावायरस पर विशेषज्ञों की समिति का गठन किया जाए और लोगों को संक्रमण के बारे में जानकारी देने के लिए पोर्टल भी बनाया जाए।
  • कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को हाईकोर्ट ज्यादा करीब से समझ सकती हैं। केंद्र सरकारी वकीलों को निर्देश दिए कि हमने इस संबंध में जो आदेश दिए हैं, उनके बारे में हाईकोर्ट को बताया जाए।

सोमवार को कोर्टरूम में क्या हुआ

याचिकाकर्ता: प्रवासी मजदूर अपने गांव की ओर पैदल चल पड़े हैं। न तो परिवहन के साधन हैं, न खाना और चिकित्सा सुविधा। इन प्रवासियों को ये सुविधाएं देने के लिए केंद्र और राज्यों को आदेश दिया जाए। मजदूरों के पैदल निकलने से पैदा हुई समस्या से निपटने के लिए सरकारों के बीच सहयोग की कमी है।
चीफ जस्टिस: हम उन मामलों में दखल देना नहीं चाहते, जिसके लिए केंद्र या राज्य सरकारें प्रयास कर रही हैं। देश में इस समय लोगों में डर और दहशत कोरोना से कहीं बड़ी समस्या है। इस बारे में केंद्र सरकार रिपोर्ट पेश करे। हम पहले केंद्र सरकार के जवाब को देखेंगे।

सुप्रीम कोर्ट में और कौन सी याचिकाएं लगाई गईं

1. कर्नाटक लॉकडाउन का फैसला वापस ले
कर्नाटक सरकार के नाकेबंदी के फैसले का केरल में कासरगोड से कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने विरोध किया है। उन्होंने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा- सीमा सील किए जाने से केरल में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इससे उनके संसदीय क्षेत्र के लोग मेडिकल सुविधाओं से वंचित हो रहे हैं।
2. 50 साल से ज्यादा उम्र के कैदियों को रिहा करने की मांग
एक वकील ने 50 साल से अधिक उम्र के कैदियों को पेरोल या जमानत पर रिहा करने पर विचार करने का निर्देश देने की मांग को लेकर याचिका दायर की। उन्होंने यह भी मांग की कि उन कैदियों के बारे में भी विचार करने का निर्देश दिया जाए, जो सांस की बीमारियों से जूझ रहे हैं।

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।