छुट्‌टी पर आने से एक दिन पहले तिरंगे में लिपटकर पहुंचा कर्मजीत, पिता ने दी अंतिम विदाई
March 19th, 2019 | Post by :- | 178 Views

यहां के गांव जनेर में मंगलवार को माहौल बेहद गमगीन रहा। यहां अश्रुपूरित नयनों से सैकड़ों लोगों गांव के फौजी परिवार के शहीद बेटे को अंतिम विदाई दी। 25 साल का राइफलमैन कर्मजीत सिंह सोमवार को जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से सीज फायर के उल्लंघन के बाद दोनों तरफ की सेनाओं के टकराव में शहीद हो गया था।

जिस घर में होली के मौके पर फौजी बेटे के छुट्‌टी आने और रिश्तेदार की शादी की खुशी होनी चाहिए थी, वहां अब चीखने-बिलखने और सिसकने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। आज सुबह जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा, हर कोई शहीद के अंतिम दर्शनों के लिए उमड़ पड़ा। गांव में भारत माता की जय व शहीद कर्मजीत सिंह अमर रहे के नारे गूंजने लगे। सेना की टुकड़ी ने हवाई फायर कर शहीद को अंतिम श्रद्धांजलि दी।

मोगा जिले के गांव जनेर निवासी कर्मजीत सिंह ने सिपाही के पद पर 2015 में आर्मी ज्वाइन की थी। उनके पिता अवतार सिंह के अलावा ताऊ और फूफा भी सेना से सेवानिवृत्त हैं। दो भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे कर्मजीत सिंह (25) इन दिनों जम्मू-कश्मीर के उड़ी में 18 लेफ्टीनेंट बटालियन में बतौर राइफलमैन तैनात थे। सेना से रिटायर्ड पिता अवतार सिंह व ताऊ रिटायर्ड सूबेदार दरबारा सिंह ने बताया कि होली पर कर्मजीत को घर आना था। इसके लिए 16 मार्च की छुट्टी मंजूर हो गई थी, लेकिन सीमा पर तनाव के चलते छुट्टी फिर 20 मार्च तक के लिए रद्द हो गई थी। अब घर आने के बाद कर्मजीत को 24 मार्च को एक रिश्तेदार की शादी में भी शामिल होना था।

फौजी पिता अवतार सिंह सेना से साल 1996 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके दो साल पहले ही 15 नवंबर 1994 में कर्मजीत सिंह का जन्म हुआ था। बाद में देश की सेवा के जुनून के चलते वह 28 जून 2015 को सेना में भर्ती हो गया था। कर्मजीत दो भाइयों में छोटा था। उसकी अभी शादी नहीं हुई थी। सेना में भर्ती के लिए टैटू बाधक बन रहा था। इसको कर्मजीत सिंह ने तेजाब से खत्म कर बतौर राइफलमैन भर्ती हुआ था। परिजनाें का कहना है कि कर्मजीत का सपना बड़ा अफसर बनना था, लेकिन कुदरत को कुछ ही मंजूर था।

शहीद के पिता अवतार सिंह ने बताया कि जनेर का एक अन्य जवान गुरतेज पाल सिंह भी कर्मजीत सिंह के साथ ही राजौरी सेक्टर में तैनात है, उसी ने सोमवार सुबह लगभग साढ़े दस बजे शहीद के पिता अवतार सिंह को फोन के माध्यम से कर्मजीत सिंह की शहीद होने की सूचना दी थी। बाद में जब सूचना ग्रामीणों को पता चली तो लोग उनके घर पर एकत्रित होना शुरू हो गए थे। इकलौती विवाहित बहन सतवीर कौर 10 मार्च को ही टूरिस्ट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया गई थी। भाई की शहीदी की सूचना पाकर वह जल्द ही वापस लौटेगी।

एमएलए डॉ. हरजोत कमल ने बहादुर सिपाही कर्मजीत सिंह की शहादत को नमन करते हुए कहा कि छोटी उम्र में देश के लिए कुर्बानी देकर कर्मजीत सिंह ने सच्चे देशभक्ति होने का सबूत दिया है। दुख की इस घड़ी में वह शहीद के परिवार के साथ खड़े रहेंगे।

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