सिर्फ गणेशजी, हनुमानजी, भैरव और देवी मां की मूर्तियों का मुख रख सकते हैं दक्षिण दिशा में
August 30th, 2019 | Post by :- | 185 Views

सोमवार, 2 सितंबर से गणेश उत्सव शुरू हो रहा है। इस साल ये पर्व 11 दिवसीय रहेगा यानी 2 से 12 सितंबर तक गणेशोत्सव मनाया जाएगा। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जब सूर्य सिंह राशि में और चंद्र कन्या राशि में होता है, तब गणेशोत्सव शुरू होता है। जानिए गणेशजी से जुड़ी कुछ खास बातें…
गणेशजी की प्रतिमा का मुख रख सकते हैं दक्षिण दिशा में
गणेशजी जल तत्व के देवता है। हमारे शरीर में गणेशजी का वास मूलाधार चक्र में माना गया है। भगवान गणेश उन चार देवताओं में शामिल हैं, जो दक्षिण मुखी हो सकते हैं। गणेशजी के अलावा हनुमानजी, भैरव और देवी मां की मूर्तियों का मुख दक्षिण दिशा में रख सकते हैं। इन चार को ही सिंदूर चढ़ाया जाता है। सिर्फ चार देवी-देवताओं को छोड़कर किसी अन्य देवता का मुख दक्षिण में नहीं रखना चाहिए।
गणेश उत्सव से जुड़ी मान्यता
प्राचीन मान्यता के अनुसार गणेशजी की उत्पत्ति भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर ही हुई थी। इसी वजह से इस तिथि से गणेश उत्सव प्रारंभ होता है। भारत में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बाल गंगाधर तिलक ने लोगों को अंग्रेजों के खिलाफ एक साथ जोड़ने के लिए दस दिवसीय गणेश उत्सव मनाना शुरू किया था। तभी से हर साल ये उत्सव दस दिनों के मनाया जा रहा है।
गणेशजी को चढ़ाना चाहिए दूर्वा
गणेशजी को दूर्वा की 11 या 21 गांठ चढ़ाना चाहिए। इस संबंध में मान्यता है कि दूर्वा से गणेशजी के पेट की जलन शांत हुई थी। इसीलिए भगवान को दूर्वा चढ़ाते हैं।
इस मंत्र का करें जाप
गणेश पूजा में ऊँ गं गणपतयै नम: या श्री गणेशाय नम: मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप की संख्या कम से काम 108 होनी चाहिए।
गणेशजी के साथ ही शिव-पार्वती की पूजा भी करें
गणपति की पूजा के साथ ही शिव-पार्वती की पूजा करना न भूलें। माता-पिता के साथ गणेशजी की पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त पर कृपा बरसाते हैं।

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