12 करोड़ से अधिक हो गए बेरोजगार….. ऊपर से टैक्स के बोझ की मार ….
May 8th, 2020 | Post by :- | 131 Views

कोरोना से लड़ाई लड़ते लड़ते देश के करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए , लेकिन सरकारें , अपने खर्चे पूरे करने के लिए अब इन बेरोजगार लोगों का निबाला छीनने को बेताब सी दिख रही हैं ..

यूँ कहा जाए कि लोगों को घरों में कैद करके ,उन्हें लूटने के तरीके खोजे जा रहे हैं तो शायद गलत न हो ..

कोरोना महामारी के चलते हुए लॉकडाउन में लगभग सभी काम धंधे चौपट हो गए हैं | उद्दोग बंद पड़े हैं ऐसे में उनमें काम करने बाले करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए हैं | कहने को तो सरकार ने लोगों को एक सपना दिखाया है कि उनको तनख्वा मिलती ही रहेगी | लेकिन हर कोई जानता है कि जब तक फिर से काम शुरू नहीं होता ,तनख्वा नहीं मिलेगी , और न ही मिल रही है , ऐसे में यह सिर्फ स्पना भर ही है , इससे बाहर निकलना ही एक मात्र विकल्प है |

सरकार के कर्मचारियों को तो उनकी सैलरी समय से मिल जाएगी लेकिन निजी क्षेत्र में काम करने बाले लोग बेरोजगार हो गए हैं | महीना दो महीने तो ये लोग जैसे तैसे काट लेंगे लेकिन उसके बाद क्या होगा ..?

ऋण लेकर चलाये व्यापार कैसे चलेंगे , गृह ऋण , गाडी को लिया ऋण या पढ़ाई को लिया ऋण .. बैंक तो उनके कहते से अपनी क़िस्त काट ले जा रहे हैं मगर नौकरी गँवा चुके लोग आखिर ये क़िस्त के पैसे कहाँ से लाएंगे , कैसे बिना पैसे घर चलाएंगे …?

बेरोजगारों के सामने, अब कई चुनौतियां हैं, बह कोरोना महामारी से लड़ें, अपनी और परिवार के लिए कहीं से खाने का प्रबंध करें और सरकार की नीतियों के तले पिसें.. खाली जेब , बेइंतहा इस भूख और महामारी से ही नहीं, इन नीतिकारों की भेंट भी चढना पड़ सकता है।

ऊपर से सरकार ने तानाशाही करना शुरू कर दिया है , डीजल पेट्रोल के मूल्यों में जबरदस्त बढ़ोतरी की जा रही है , ऐसे में मूल्य हर वस्तु का बढ़ेगा | कई जगह सरकार टैक्स बढ़ा भी रही है तो कहीं बढ़ाने की तैयारी है | जाहिर है इस समय लोग इसका विरोध तक नहीं कर सकते | लेकिन खली जेब और परिवार के खर्च के सामने अब एक और खर्च इन्ही बेरोजगारों को उठाना है , बो है सरकार और सरकारी कर्मचारियों का खर्च |

होना तो ये चाहिए था कि इस समय सरकार टैक्स में कटौती करती , जिन बिभागों से काम नहीं लिया जा रहा है , उनकी सैलरी में कुछ कटौती करती ,लेकिन ऐसा नहीं… सरकारें यह खर्च अब बेरोजगारों की उस संख्या से एकत्रित करना चाह रही है , जो नौकरी गँवा कर घर बैठी है |

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2020 में देश में बेरोजगारी दर बढ़कर 23.5 फीसदी पर पहुंच गई थी। अकेले अप्रैल महीने में बेरोजगारी दर में 14.8 फीसदी का इजाफा हुआ था। मार्च महीने के मुकाबले अप्रैल में बेरोजगारी दर में तेज बढ़ोतरी हुई थी।शुरुआत में, असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों की नौकरी गई हैं। लेकिन अब धीरे-धीरे, संगठित और सुरक्षित नौकरी वालों की जॉब पर भी संकट के बादल छाने लगे हैं । स्टार्टअप ने ले-ऑफ की घोषणा की है और उद्योग संघों ने नौकरी के नुकसान की चेतावनी दी है। व्यास ने कहा कि नौकरी की तलाश कर रहे लोगों की संख्या भी बढ़ी है। 3 मई को यह 36.2 फीसदी हो गई जो पहले 35.4 थी।

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