दवाई से ज्यादा फायदा पहुंचाती है फिजियोथैरेपी #news4
April 1st, 2022 | Post by :- | 101 Views

कुल्लू : व्यायाम के जरिए शरीर की मांसपेशियों को सही अनुपात में सक्रिय करने की विद्या फिजियोथैरेपी कहलाती है। मौजूदा समय में अधिकतर लोग दवाइयों के झंझट से बचने के लिए फिजियोथैरेपी की ओर रुख कर रहे हैं तथा इसका फायदा भी उठा रहे हैं क्योंकि इस पद्धति के दुष्प्रभावों की आशंका न के बराबर है तथा व्यायाम के जरिए शरीर की मांसपेशियों को सही अनुपात में सक्रिय कर लोगों का उपचार किया जाता है। जिला रैडक्रॉस सोसायटी कुल्लू द्वारा क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र में फिजियोथैरेपी यूनिट स्थापित किया गया है। केंद्र में डाॅ. सीमा ठाकुर बीपीटी एमपीटी (ऑर्थो)जोड़ों, कमर, गर्दन, एड़ी, पैरों, गठिया, मांसपेशियों के दर्द, कंधे की जकडऩ, चोट से सूजन, ङ्क्षलगामेंट का टूटना, शाटिका, सेरेब्रेल पाल्सी व लकवा के कारण शरीर का कोई हिस्सा काम न करता हो, चहरे का टेढ़ापन का इलाज फिजियोथैरेपी द्वारा कर रही है। मरीज को प्रतिदिन 30 से 90 मिनट का सत्र लेना पड़ता है। डा. सीमा ठाकुर क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू में बच्चों, गायनी व ऑर्थो वार्ड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

इन लोगों को मिला लाभ

डाॅ. सीमा ने बताया कि उनके यूनिट द्वारा गत वर्ष 12614 लोगों को फिजियोथैरेपी दी गई, जिनमें कुछ उल्लेखनीय मामलों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि एक मरीज जिसे स्ट्रोक के कारण अधरंग हो गया था पर 3 माह तक फिजियोथैरेपी देने के उपरांत अब वह स्वयं चलने लग गया है। इसी प्रकार एक 5 वर्ष की लड़की जिसकी फ्रैक्चर के दौरान नस दब गई थी व हाथ की उंगलियां सिकुड़ गई थीं, साथ ही चलने में भी असमर्थ हो गई थी, केंद्र में 2 माह तक फिजियोथैरेपी लेने के उपरांत हाथों में 70 फीसदी गतिशीलता आ गई है तथा अब वह घर में निरंतर बताए गए अनुसार व्यायाम कर रही है तथा निरंतर शारीरिक सुधार हो रहा है। इसी प्रकार घुटना प्रत्यारोपण के एक मरीज ऑप्रेशन के बाद अपने पांव को मोड़ने में असमर्थ था दो हफ्ते के लिए फिजियोथैरेपी लेने उपरांत मरीज 75 फीसदी लाभ महसूस कर रहा है। इस मरीज को फॉलोअप व्यायाम दिया जा रहा है।

केंद्र में ये भी मिल रहीं सेवाएं

जिला विकलांगता पुनर्वास केंद्र में फिजियोथैरेपी के अतिरिक्त विकलांगों को चिन्हित कर उनकी विकलांगता का आकलन करवा कर यूडीआईडी पहचान पत्र जारी करवाना व मनोवैज्ञानिक द्वारा भावनात्मक, मानसिक तनाव जैसी समस्याओं को काऊंसलिंग के माध्यम से निदान किया जाता है। वहीं स्पीच थैरेपिस्ट द्वारा हकलाना, तुतलाना व बोलने की समस्याओं के निदान के लिए नि:शुल्क सेवा दी जा रही है।

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