हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में पोलैंड का जौ उगाकर बनाई जाएगी बीयर, कांगड़ा का व्‍यवसायी लगाएगा कारखाना
November 12th, 2019 | Post by :- | 224 Views

हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में पोलैंड के जौ उगाकर बीयर तैयार कर विदेशों में बेची जाएगी। पोलैंड में बीयर का उद्योग चला रहे कांगड़ावासी वरुण राजपूत ने प्रदेश सरकार के समक्ष यह प्रस्ताव रखा है। धर्मशाला में पिछले दिनों हुई इन्वेसर्स मीट में पहुंचे वरुण राजपूत ने इसके लिए 200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा है। वरुण का प्रस्ताव सिरे चढ़ा तो प्रदेश के जनजातीय जिलों में पोलैंड के जौ की विशेष किस्म पैदा करके बीयर तैयार की जाएगी, जिसे विदेशों में भेजा जाएगा। जौ का बीज भी पोलैंड से ही लाया जाएगा।

वरुण राजपूत पोलैंड में अलग-अलग स्थानों पर जौ की खेती करवा अलग तरह की बीयर तैयार करवा रहे हैं। इस अब हिमाचल में तैयार करवाना चाहते हैं। बीयर का यह उद्योग जनजातीय क्षेत्रों के लिए आय का साधन बनेगा। जनजातीय क्षेत्रों में इस नए प्रकार के प्रयोग के लिए पोलैंड से विशेष किस्म का एक ङ्क्षक्वटल जौ ट्रायल के तौर पर लाया जाएगा। प्रदेश सरकार से बीयर का उद्योग लगाने और कारोबार शुरू करने के लिए 200 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव रखा गया है। इस उद्योग के स्थापित होने से सैकड़ों लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध होंगे।

किसानों को भी जौ की खेती पर अधिक आय मिलेगी। इससे हिमाचल में तैयार होने वाली बीयर को विदेशों को निर्यात किया जाएगा। जनजातीय क्षेत्रों के साथ ही अन्य क्षेत्रों में भी इस प्रोजेक्ट के विस्तार की योजना है।

पोलैंड यूरोप की तीसरा सबसे बड़ा बीयर उत्पादक है। वहां पर 36.9 मिलियन हेक्टोलिटर बीयर का उत्पादन होता है। पोलैंड में बीयर बनाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाना वाला जौ लाहुल के वातावरण के लिए उचित है। जौ से बीयर के अलावा कई अन्य उत्पाद भी पोलैंड में बनाए जा रहे हैं।

हर माह होगी 20 टन जौ की जरूरत

प्रदेश में बीयर के इस कारखाने को स्थापित होने पर हर माह 20 टन जौ की आवश्यकता होगी। इसकी खेती के लिए लोगों को भी प्रेरित किया जाएगा। इसकी खेती से किसानों को अपनी फसल के उचित दाम मिल सकेंगे। किसानों की आर्थिकी बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार के साधन भी विकसित होंगे।

पोलैंड में बीयर का कारोबार कर रहे कांगड़ा के वरुण राजपूत ने जनजातीय क्षेत्रों में पोलैंड का जौ उगा बीयर बनाने का कारखाना लगाने का प्रस्ताव दिया है। ट्रायल के तौर पर एक क्विंटल जौ का बीज लाया जाएगा। -डॉ. रामलाल मार्कंडेय, कृषि मंत्री हिमाचल प्रदेश

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