73 भूखी-प्यासी गायों के लिए देवदूत बनी पुलिस….. कांगड़ा पुलिस : थैंक यू वेरी मच…
March 11th, 2020 | Post by :- | 224 Views

तीन दिन से गौशाला में 73 गउएं और उनके छोटे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे थे। दुनिया होली के रंग उड़ाने में मस्त थी तो पुलिस इनके चारे के बन्दोबस्त करने के लिए सड़क पर भागमदौड़ कर रही थी।

मसला है कांगड़ा के सराह पंचायत में सरकार द्वारा संचालित गौशाला का। दरअसल,मंगलवार दोपहर बाद यह बात बाहर निकली कि यहां रखीं गाएं पिछले तीन दिन से भूखी-प्यासी हैं।


आनन-फानन में कुछ स्थानीय लोग बाहर निकले और घास-भूसा जुटा कर शाम के लिए बन्दोबस्त किया।पर समस्या यह बन गई कि बुधवार सुबह के लिए कोई चारा नहीं था। युवाओं की टीम भूसे के ट्रक की तलाश में निकले पर नतीजा सिफर रहा। कांगड़ा के एएसपी दिनेश शर्मा से सम्पर्क किया गया। वह होली के चलते पैट्रोलिंग पर थे। मगर सूचना मिलते ही शर्मा ने चारे के लिए जाल बिछा दिया।
गग्गल थाने के प्रभारी मेहरदीन तक सन्देश गया। हर तरफ चारे-भूसे के लिए मैसेज हो गया।
खबर मिली कि एक ट्रक अल सुबह पंजाब से हिमाचल में एंटर किया है।


मेहरदीन सुबह ही अपनी टीम के साथ सड़क पर उतर गए । ट्रक आया और सीधे गौशाला में पहुंच गया। अगले एक-दो दिन के लिए चारा बुधवार की सुबह उतरा। स्थानीय लोगों ने चारे का भुगतान भी कर दिया और फौरी तौर पर राहत की सांस ली भी और गौवंश को दी भी।
पर इससे पहले जो गायों का हाल था,उसे देख कर तो पत्थर दिल भी जार-जार रोते । बच्चे भूखी-प्यासी माताओं के सूख चूके थनों को एक तरह से काटने पर उतारू थे। कई गाएं कमजोरी से उठने तक के काबिल नहीं बची थीं। कुछ अपाहिज गाएं तो उठ भी नहीं पा रहीं थीं।
जिस तरह से यह बेजुबान गाएं नजर आईं,उससे कहीं ज्यादा मरा हुआ सिस्टम नजर आया। स्मार्ट सिटी वाला नगर निगम इनके चारे और बकाया जरूरतों का ध्यान रखने के लिए जिम्मेवार है। पर स्मार्ट प्रबन्धन बहुत बदसूरत बन कर उभरा। गौवंश के नाम पर राजनीति करने वाले बड़े लोग भी छोटे साबित हुए। मगर कांगड़ा पुलिस देवदूत बन कर सड़क पर उतरी और बकाया व्यवस्थाओं के मुंह पर लगी कालिख को साफ कर दिया।

जनता भी कांगड़ा पुलिस को मुक्तकंठ से बधाइयां दे रही है। हर एक चित्र देखिए, पुलिस व आम लोगों का चरित्र चित्रण भी इन चित्रों में देख लीजिए। फैसला भी आपका होगा कि आखिर इन गायों पर जो गुजरी है,उसके जिम्मेदार कौन ऐसे लोग होंगे,जो जिंदा तो हैं,मगर “गुजरे” हुओं से कम नहीं हैं…

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