जापान की तकनीक पर हिमाचल में बदलेगा पॉली हाउस का मॉडल
October 14th, 2019 | Post by :- | 161 Views

प्रदेश में अब पॉली हाउस का मॉडल बदलेगा। विभाग ने इसकी तैयारी शुरु कर दी है। बस विभाग को अप्रूवल का इंतजार है। समय के साथ-साथ टेक्नोलॉजी भी बदलती रहती है। इसी को आधार बनाकर कृषि विभाग ने पॉली हाउसों के मॉडलों में बदलाव करने जा रहा है। सूत्रों के अनुसार विभाग जापान के मॉडल के आधार पर प्रदेश में नये मॉडल लागू करने जा रहा है।

इन मॉडल में दो तीन मॉडल हैं जिन्हें विभाग प्रदेश में ला रहा है। इसका पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि विभाग ने इसके डिजाईन को भी विकसित कर लिया है। इन मॉडलों के लागू होने से पहले जो कमियां पॉली हाउसों में पाई जा रही थी वे अब सामने नहीं आएंगी। इसके बेहतर परिणाम भी किसानों को मिलेंगे। कृषि विभाग इसे लागू करने के लिए काफी उत्साहित है। जैसे ही इसकी अपू्रवल मिलेगी आवेदकों को नए मॉडल स्वीकृत कर दिए जाएंगे।

नाबार्ड से मांगी गई है अप्रूवल

विभागीय सूत्रों के मुताबिक नूतन पॉली हाउस के डिजाईन और मॉडल की अप्रूवल नाबार्ड को भेजी गई है। जैसे ही नाबार्ड इसे अप्रूव करेगा। वैसे ही कृषि विभाग किसानों को नये मॉडल लगाने में प्रदेश में स्वीकृति दे देगा। विभाग को उम्मीद है कि यह अप्रूवल जल्दी ही मिल जाएगी। क्योंकि जो मॉडल यहां पर स्थापित किए जाएंगे वह पहले ही जापान में सफल रहे हैं। उन्हीं को प्रदेश में लगाया जा रहा है।

पॉली हाउस के मॉडल में जो बदलाव किया गया है, उनमें दो तीन प्रकार के मॉडल बनाए गए हैं। जो सभी जापान के ही मॉडल हैं। इनमें एक साधारण मॉडल तो दूसरा हाईड्रोपॉनिक मॉडल तथा तीसरा हायर टेक्नोलॉजी का मॉडल शामिल है। हायर टेक्नोलॉजी मॉडल में फैन तक की सुविधा मुहैया करवाई गई है। उसकी शटरिंग को भी उतारा जा सकता है। जबकि साधारण मॉडल में किसानों को पहले से बेहतर टैक्रोलॉजी मिलेगी जो और ज्यादा उत्पादकता प्रदान करेगी।

क्या है हाईड्रोपॉनिक मॉडल

इस मॉडल में मिट्रटी यानि स्वाईल नहीं होगी। केवल पानी पर ही सब्जियां तैयार की जाएंगी। यह मॉडल भी जापान की तकनीक पर काम करेगा। इसे लागू करने की विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। पॉली हाउस में हर प्रकार के साईज के मॉडल किसानों को मिलेंगे। 35 स्केयर मीटर से लेकर 4 हजार स्केयर मीटर तक के मॉडल उपलब्ध रहेंगे।

सब्सिडी में नहीं होगा बदलाव

पॉली हाउस लगाने पर जो सब्सिडी 85 प्रतिशत पहले किसानों को मिलती थी वही इस बार भी मिलेगी। इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। केवल मॉडल के डिजाईन और तकनीक में बदलाव किया गया है ताकि किसानों के लिए पॉली हाउसों में ज्यादा उत्पादन हो सके।

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