भारत-पाक सीमा पर छोड दिए पौंग बाँध विस्थापित
June 21st, 2019 | Post by :- | 187 Views

सेंट्रल यूनिवर्सिटी देहरा में बनाना न्यायसंगत फ़ैसला होगा
देहरा,  पौंग बाँध विस्थापित अशोक साकी ने राजस्थान व हिमाचल सरकार को खरी-खरी सुनाई। उन्होनें दो टूक शब्दों में कहा कि विस्थापन के करीब 5 दशक बाद भी न्याय नहीं मिला है। हमें भारत-पाक सीमा पर छोड दिया गया। उन्होनें कहा कि आज हमारे बच्चों को न तो नौकरी है न ही सरकार द्वारा कोई स्वरोजगार देने की सुविधा। उन्होनें कहा राजस्थान सरकार और हिमाचल सरकार काँगडीयों की कभी भी हितेशी नहीं रही हैं। उन्होनें कहा अब बड़ा आंदोलन होगा। जिसने देश को रोशन किया आज भी सैंकडो परिवार अँधेरे में गुजर वसर कर रहे हैं। आज भी बच्चों को पढाने के लिये उनके पास पैसे नहीं हैं। पौंग बाँध विस्थापित अशोक साकी ने केंद्र सरकार से पौंग आरक्षण देने की माँग की है। उन्होनें कहा कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी देहरा में बनाना न्यायसंगत फ़ैसला होगा। पौंग बाँध बनने के बाद देहरा का बजूद हिन्दोस्तान के नक्शे से मिट गया, सियू बनने से देहरा के ज म थोडे भर जायेगें। 1961 में पौंग बांध निर्माण के लिए जिला कांगड़ा के देहरा के लगभग डेढ़ लाख आबादी वाले 30 हजार परिवार बेघर हुए थे। उनके पुनर्वास के लिए भारत सरकार की अध्यक्षता में प्रदेश व राजस्थान की सहमति पर तीन सितंबर, 1970 को हस्ताक्षरित एमओयू के तहत पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए दो लाख 20 हजार एकड़ भूमि जिला श्री गंगानगर में आरक्षित की गई थी। इसमें 30 हजार एकड़ भूमि भारत सरकार ने केंद्रीय राज्य फार्म जैतसर से राजस्थान सरकार को विस्थापितों के पुनर्वास के लिए दी थी।

यही नहीं हिमाचल सरकार के तत्कालीन मुखयमंत्री ने संवैधानिक रूप से स्वीकारा था कि पौंग बांध विस्थापित श्रीगंगानगर में आरक्षित भूमि से वंचित रह जाता है, तो उन्हें प्रदेश में भूमि देकर पुनर्वास किया जाएगा लेकिन बावजूद इसके पौंग विस्थापितों को उनका हक नहीं दिया गया और न ही पुनर्वास किया।

विस्थापित पुनर्वास के लिए हिमाचल व राजस्थान के विभिन्न न्यायालयों व कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। इनमें से अधिकांश विधवाएं, वरिष्ठ नागरिक और अनुसूचित जाति समुदाय के लोग शामिल हैं। कुछ तो पुनर्वास की आस में स्वर्ग सुधार चुके हैं। यही नहीं उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार 1996 में जिला गंगानगर में 1188 मुरब्बों को पौंग विस्थापितों को दिया जाना था लेकिन इन मुरब्बों पर राजस्थान भू-माफिया का कब्जा है और कोर्ट के आदेश के बावजूद दोनों राज्यों के अधिकारी इन 1188 मुरब्बों के बदले विस्थापितों से सहमतिपत्र लेकर उनके घर से करीब 12 सौ किलोमीटर दूर भारत-पाक सीमा पर जिला जैसलमेर में धकेला जा रहा है जहां कोई मूलभूत सुविधा ही नहीं है।

उन्होंने प्रदेश सरकार से गुहार लगाई कि जिन पौंग विस्थापितों का राजस्थान सरकार ने अभी तक पुनर्वास नहीं किया है, उन्हें अन्य प्रोजेक्टों की तर्ज पर समान सुविधाएं देकर प्रदेश में ही पुनर्वास किया जाए।

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