पूजा-पाठ / 3 अगस्त को हरियाली तीज, पति-पत्नी को एक साथ करनी चाहिए शिव-पार्वती की पूजा
August 3rd, 2019 | Post by :- | 184 Views

शनिवार, 3 जुलाई को सावन माह के शु्क्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। इस दिन हरियाली तीज मनाई जाती है। विवाहित महिलाओं के लिए इस पर्व का खास महत्व है। मान्यता है कि इस दिन देवी पार्वती की विशेष पूजा करने से जीवन साथी को शुभ फल मिलते हैं। जीवन सुखी होता है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार हरियाली तीज पर पति-पत्नी को एक साथ शिव-पार्वती की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से वैवाहिक जीवन की समस्याएं दूर हो सकती हैं। जानिए शिव-पार्वती की पूजा की सामान्य विधि…

  • पूजा के लिए जरूरी सामग्रियां

देव मूर्ति के स्नान के लिए तांबे का बर्तन, तांबे का लोटा, जल का कलश, दूध, देव मूर्ति को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, आभूषण, चावल, अष्टगंध, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, धतूरा, आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, शक्कर, पान, दक्षिणा, जो भी धन राशि आप चढ़ाना चाहते हैं।

  • ये है पूजन विधि

शनिवार को सुबह जल्दी उठें और पूजा करने का संकल्प लें। स्नान के बाद घर के मंदिर में भगवान के सामने कहें कि हम पति-पत्नी पुत्र, पौत्र, सौभाग्य वृद्धि और श्री शिव-पार्वती की कृपा प्राप्ति के लिए पूजा करने का संकल्प लेते हैं। इसके बाद शिव-पार्वती की मूर्ति स्थापित करें। मूर्ति को लाल कपड़े पर रखना चाहिए। इसके बाद आटे से बना दीपक घी भरकर जलाएं। पूजा, आरती करें। पूजा में ऊँ उमामहेश्वराय नम: मंत्र का जाप करें।

पति-पत्नी घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में सबसे पहले गणेश पूजन करें। गणेशजी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, पुष्प, चावल से पूजा करें।

इसके बाद शिव-पार्वती की पूजा करें। शिव-पार्वती को स्नान कराएं। स्नान पहले जल से फिर पंचामृत से और फिर जल से स्नान कराएं।

शिव-पार्वती को वस्त्र अर्पित करें। वस्त्रों के बाद फूलों के आभूषण पहनाएं। पुष्पमाला पहनाएं। तिलक करें।

ऊँ साम्ब शिवाय नमः कहते हुए भगवान शिव को अष्टगंध का तिलक लगाएं। ऊँ गौर्ये नमः कहते हुए माता पार्वती को कुमकुम का तिलक लगाएं।

अब धूप व दीप अर्पित करें। फूल अर्पित करें। श्रद्धानुसार घी या तेल का दीपक लगाएं। आरती करें। आरती के बाद परिक्रमा करें।

नेवैद्य अर्पित करें। भगवान शिव और पार्वती का बिल्व पत्र से पूजन करें। कनेर के पुष्प अर्पित करें। गौरी-शंकर के पूजन के समय ऊँ उमामहेश्वराभ्यां नमः मंत्र का जाप करते रहना चाहिए।

आरती के बाद अन्य लोगों को प्रसाद वितरित करें और पूजा में हुई भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगे।

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