रोहतांग पर रेंगता पर्यटन और कुल्लू के टैक्सी चालकों की दादागिरी
July 29th, 2019 | Post by :- | 177 Views

मनाली का पर्यटन इस बार औंधे मुँह गिरा पड़ा है। लेकिन पर्यटन नाम शायद मनाली के लिए अब उपयुक्त सा भी नहीं लगता है। देश के जितने लो थाइलैंड, पटाया घूम कर आते हैं, उतने तो मनाली भी नहीं आ पाते हैं। कारण है वद्दइंतजामी, सहूलियत के नाम पर कीचड़, गंदगी और जबरदस्त लूट घसूट. और इस लूट में हर कोई अपना हिस्सा सबसे बड़ा रखना चाहता है।

मनाली में लोग रोहतांग की बर्फ के चलते आते हैं। लेकिन रोहतांग पहुंचना अपने आप में चुनौती है। यह सफर हर दूसरा सैलानी इसलिए याद रखता है क्योंकि इसमें उसे मानसिक और शरीरिक प्रताड़ना सबसे बढकर मिली होती है। प्रशासन और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली से उसका मानशिक दुष्कर्म हुआ होता है।

रोहतांग मार्ग पर पहले तो परमिट की जरूरत पड़ती है। यह परमिट 550₹ में ऑनलाइन मिलता है,सीजन के समय यह मिलता ही नहीं, मगर ऑनलाइन नहीं मिले तो 3500 से 5000 रू में ब्लैक में मिल जाता है।

उसके बाद आप रोहतांग की तरफ बढते हैं। पूरे रास्ते आपको कहीं भी टॉयलेट तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जबकि आप इसके लिए ,मनाली पहुंचने से पहले ही ग्रीन टैक्स के रूप में 300₹ दे चुके होते हैं। ऊपर से 550₹ रोहतांग परमिट के नाम पर और लिए जाते हैं।

सड़क पर अगर आप लाइन में चल रहे हैं तो शायद बेवकूफ़ गिने जाएंगे। क्योंकि कुल्लू के 90% टैक्सी चालक देश के कानून को नहीं मानते. ये लोग अपने घर से जिस कानून को बनाकर निकलते हैं, वही रोहतांग में चल पड़ता है। ये लोग लाइन में नहीं लगना चाहते हैं। ये पीछे से आते हैं और विपरीत दिशा में गाड़ी चलाकर सबसे आगे निकलने की कोशिश में होते हैं। ये लोग 2 से 3 लेन बना देते हैं, इनके इसी रवइए से दिनभर रोहतांग दर्रे पर जाम लगा रहता है।

पुलिस भी इन लोगों को नहीं रोकती, हां अगर कोई वाहरी ऐसा करे तो उसे कानून का उल्लंघन माना जाता है। हालांकि पुलिस विभाग आसानी से इसा जाम को रोक सकता है। मगर विभाग शायद ऐसा करना ही नहीं चाहता है। पुलिस जगह जगह चुपचाप खड़ी रहकर, विपरीत दिशा की लेन पर वाहन चलाने का सिर्फ फोटो ही क्लिक करे और चालान कर दे, तो कुछ ही दिनों में यह परेशानी खत्म हो सकती है। पर खैर विभाग ऐसा चाहे भी …

दिनभर जाम में फंसने के बाद लोग जब फिर मनाली पहुंचते हैं, तब कीचड़ और गंदगी उनका मानो बेसब्री से इंतजार कर रहे होते हैं। लोग यहां साफ हवा पानी के लिए आते हैं, मगर यहाँ आकर भी नाक बंद करके ही चलना पड़ता है। इसके बाद हर नकली सिलाजीत, नकली केशर के रूप में सैलानी लूट लिए जाते हैं। जबकि होटल और खाने में बिल 10 गुना कर दिया जाता है। और जाते जाते ये सैलानी यही कहते हैं कि दोबारा मनाली नहीं आएंगे

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