हिमाचल में बिकने वाले धूप में रबड़
March 2nd, 2020 | Post by :- | 183 Views

शिमला- हिमाचल में बिक रहा धूप रबड़ से तैयार हो रहा है। इसमें एक फीसदी केमिकल और 99 प्रतिशत रबड़ की मिलावट है। इस धूप के जलाने से प्रभावित लोग कैंसर की चपेट में आ सकते हैं। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) की शोध रिपोर्ट में हुए इस खुलासे पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने धूप कंपनियों को दूसरी बार नोटिस भेजा है। सीएसआईआर ने दो महीने पहले यह रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी थी। इस आधार पर हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हिमाचल में धूप विक्रेता कंपनियों को कड़ा नोटिस जारी किया था। इसका जवाब न आने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रिमाइंडर भेजा है। जाहिर है कि हिमाचल में अध्यात्मिक दृष्टि के मद्देनजर धूप का डटकर प्रयोग होता है। खासकर प्रदेश के शक्तिपीठों में टनों के हिसाब से धूप जलाया जाता है। राज्य के 95 फीसदी से ज्यादा घरों में धूप-दीप प्रज्वलित किए जाते हैं। धार्मिक आस्था के कारण हर घर में पूजा-पाठ का रूटीन प्रावधान है। इस कारण हिमाचल की कम आबादी होने के बावजूद धूप का प्रयोग अधिक हो रहा है। सूचना के अनुसार प्रदूषण एवं नियंत्रण बोर्ड ने मंदिरों में जलाए जाने वाले धूप को लेकर सर्वे करवाए हैं। इस दौरान खुलासा हुआ है कि धूप के भारी मात्रा में प्रयोग पर कई पर्यटकों को दिक्कतें पेश आई हैं। इसके चलते प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हिमाचल की धूप विक्रेता कंपनियों को सैंपल भर कर सीएसआईआर पालमपुर भेजे हैं। हाल ही में पहुंची इसकी रिपोर्ट्स चौंकाने वाली है।

मंदिर में चढ़ावे के फूलों से बनेगा धूप

मंदिरों में प्रयोग होने वाले फूलों से धूप का उत्पादन होगा। यह प्रयोग सफल हो गया है। करीब अढ़ाई से तीन लाख की रुपए की मशीन से वेस्ट फ्लावर का सुगंधित धूप तैयार होगा। पहले चरण में ये मशीनें प्रदेश के बड़े मंदिरों में स्थापित होंगी। इससे चढ़ावे के बाद बेकार होने वाले फूलों का प्रयोग संभव है।

कंपनियों को नोटिस

सीएसआईआर की रिपोर्ट के अनुसार धार्मिक आस्था के लिए प्रयोग हो रहा धूप स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। लिहाजा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हिमाचल में आ रहे धूप की उत्पादक कंपनियों को नोटिस भेज रहा है। इसके अलावा बोर्ड ने इसका विकल्प भी तैयार कर लिया है।

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