सोशल मीडिया पर संस्मरण सुनाकर गुदगुदा रहे शांता कुमार, उपराष्ट्रपति ने भी सराहा प्रयास
April 13th, 2020 | Post by :- | 139 Views

कोरोना महामारी से बोङिाल हो रहे समाज को गुदगुदाने के लिए भाजपा नेता एवं वरिष्ठ साहित्यकार शांता कुमार सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। विगत ्रकुछ दिन से देश-प्रदेश को लेकर रोचक जानकारियों के साथ संस्मरणों को सामने ला रहे हैं। शांता कुमार के इस प्रयास को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी सराहा है।

रविवार को शांता कुमार को इस संदर्भ में फोन कर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने बधाई दी और उनका हालचाल भी पूछा। वरिष्ठ भाजपा नेता शांता कुमार ने रविवार को भी ऐसा ही एक संस्मरण सामने लाकर जो चुटकुला पेश किया वह लोगों को पसंद आ रहा है। लोगों को गुदगुदाने के साथ शांता कुमार उनसे यह बात भी कहना नहीं भूल रहे हंै कि घर में ही आराम से रहें और बाहर न जाएं। जाएं तो मास्क पहनें और शारीरिक दूरी भी बनाए रखें। चिंता बिल्कुल भी नहीं।

पत्नी संतोष शैलजा के पीजीआइ चंडीगढ़ में घुटने के ऑपरेशन से जुड़ी घटना को पेश कर शांता लिखते हैं कि वहां पर पैदा हुई बोङिालता को दूर करने के लिए नाती शाश्वत चुटकुला गोष्ठी के लिए कहता है। इसके बाद पत्नी और बेटी ने उसे डांटा तो वह सुबक कर एक तरफ हो गया। मगर उन्हें श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक से यह समझाया कि वह ठीक कह रहा है और वर्तमान को जीना चाहिए।

ये चुटकुला किया पेश

एक दिन एक भिखारी को पूरा दिन कुछ न मिला। सोचने लगा भूखे ही रहना पड़ेगा। मंदिर के सामने गया, फिर गुरुद्वारा, मस्जिद..संयोग ऐसा कि किसी ने उसके भीख के कटोरे में कुछ न डाला। शाम ढलने लगी। उदास अपने ठिकाने की ओर चलने लगा। सामने देखा एक मधुशाला से शराब पीकर झूमते हुए लोग निकल रहे थे। सोचा एक और कोशिश कर लूं। वहां गया दरवाजे पर ज्यों ही खड़ा हुआ मस्ती में गीत गाता झूमता एक व्यक्ति बाहर निकल रहा था। भिखारी ने कटोरा सामने किया और जोर से बोला दे दाता के नाम..। झूमते व्यक्ति ने देखा और जेब में हाथ डाला और सौ रुपये का नोट निकालकर भिखारी के कटोरे में डाल दिया। भिखारी कभी नोट को देखे कभी उस दाता को कभी अपने आप को। भिखारी सड़क पर आया, हाथ जोड़ आसमान की ओर देख कहने लगा या खुदा तू भी कमाल करता है, रहता कहीं है और पते कहीं और के देता है।

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