सिरमौर में अद्भुत नक्काशी का खूबसूरत नमूना है 1500 साल पुराना मानगढ़ शिव मंदिर,पांडवों से जुड़ा है मंदिर का इतिहास #news4
February 15th, 2022 | Post by :- | 173 Views

नाहन : सिरमौर जिला के पच्छाद विकास खंड मुख्यालय सराहां से 30 किलोमीटर दूर स्थित शिव मंदिर अद्भूत नक्काशी का खूबसूरत नमूना है। इसका इतिहास पांडवों से जुडा हुआ है। यह प्राचीन मंदिर मध्य हिमालय की शिवालिक पहाडियों की गोद में मानगढ़ पंचायत में स्थित है। यह शिव मंदिर पांडवों द्वारा निर्मित है। इस मंदिर के दरवाजे को एक बडी शिल्ला से काटकर बनाया गया है। जिस पर अद्भूत नक्काशी भी की गई है। यही नहीं मंदिर में जितनी भी मूर्तियां हैं, उन्हें पत्थरों से काटकर बनाया गया है। मगर खास बात यह है कि जिस पत्थर को काटकर मंदिर व मूर्तियां बनी हैं। वह पत्थर इस क्षेत्र में पाया ही नहीं जाता।

मंदिर का इतिहास

मंदिर की दीवारों पर खुदे नक्षत्र दर्शन में पांच ग्रह ही दर्शाए गए हैं। जो इसके प्राचीनतम इतिहास के गवाह है। यह मंदिर हिमाचल में ही नहीं, बल्कि अपने प्राचीनतम इतिहास को लेकर पूरे भारत व विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में स्थित शिवलिंग के दर्शन करने लोग दूर-दूर से आते हैं। मंदिर के पिछले हिस्से में गाय को मारते हुए बाघ व बाघ को मारते हुए अर्जुन के चित्रों को पत्थरों पर दिखाया गया है। पांडवों द्वारा निर्मित इस शिव मंदिर के समीप ही भगवान कृष्ण का मंदिर है। जिसको लेकर अभी पता नहीं कि यह मंदिर भी कितना पुराना है। स्थानीय भाषा में इस स्थान को ठाकुरद्वारा भी पुकारा जाता है। ठाकुरद्वारा का अर्थ है, भगवान विष्णु का निवास स्थान। कृष्ण मंदिर में पूजा अर्चना के साथ-साथ जन्माष्टमी पर मेले का आयोजन भी किया जाता है। शिव व कृष्ण मंदिर के पास एक नाला बहता है। जो थोडी दूरी पर एक बडे़ झरने का रूप धारण कर लेता है। इसे सिरमौर जिला का सबसे ऊंचा झरना बताया गया है। इसकी ऊंचाई 122 मीटर है।

मंदिर की विशेषता

पांडवो द्वारा निर्मित मानगढ़ स्थित शिव मंदिर कितना पुराना इसको लेकर लोगों की अलग अलग राय हैं। मगर शोधकर्ताओं द्वारा यह मंदिर करीब 1500 साल से अधिक पुराना बताया गया है। वर्ष 1995 में यह शिव मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन चला गया था। इस मंदिर की विडंबना यह है कि पुरात्व विभाग के अधीन चले जाने के बाद भी यह मंदिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान नहीं बना पाया। वर्ष 2003-04 में शिव मंदिर के समीप खुदाई के दौरान पुरातत्व विभाग को एक गणेश मंदिर भी मिला था। जिसका निर्माण गुप्त काल की शैली में हुआ बताया जाता है। यह मंदिर ईसा में 2500 वर्ष पूर्व निर्मित या पांचवी, छठी शताब्दी का बताया जाता है। पुरातत्व विभाग के पास शिव मंदिर के आसपास दो बीघा जमीन है। जिसमें विभाग कई बार खुदाई का कार्य कर नए मंदिरों के बारे में और जानकारी जुटाने के प्रयास किया जा चुका है। पुरातत्व विभाग द्वारा यहां एक स्मारक परिचयक भी नियुक्त किया गया है। जोकि मंदिरों के रखरखाव का ध्यान रखता है। यह जिला सिरमौर का एकमात्र मंदिर है, जिसका पुरातत्व विभाग ने अधिग्रहण किया है।

दिनेश ठाकुर, अध्यक्ष शिव मंदिर कमेटी मानगढ़ का कहना है कि सिरमौर पांडवों द्वारा निर्मित शिव मंदिर में शिव रात्री को भव्य कीर्तन व भण्डारे का आयोजन किया जाता है। श्रावण मास में क्षेत्र के लोग प्रात काल में शिवलिंग को जल अर्पित तथा सांय को जोत जलाते है। यह प्रथा सैकड़ों वर्षों से चल रही है।

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