हिमाचल में ठंड के साथ स्‍वाइन फ्लू की दस्‍तक, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग हुआ सतर्क; जानिए कैसे करें बचाव
December 4th, 2019 | Post by :- | 160 Views

राजधानी शिमला सहित प्रदेश में ठंड ने दस्तक दे दी है। सुबह-शाम ठंडी हवाएं चलनी शुरू हो गई हैं। दिनभर धूप खिली रहने के बावजूद तापमान में काफी गिरावट आई है। लोग शुष्क ठंड से बीमार होने लगे हैं। बदलता मौसम स्वाइन फ्लू को दावत देता है और प्रदेश में एक मामला सामने आ गया है। हर साल इससे कई लोग चपेट में आते हैं। अंतिम स्टेज तक पहुंचने से कुछ लोगों की जान भी चली जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आइजीएमसी) को अधिक एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं।

आइजीएमसी प्रशासन ने आइसोलेशन वार्ड तैयार किया है। वार्ड को पूरी तरह से स्टरलाइज किया गया है ताकि किसी मरीज से तीमारदारों को इंफेक्शन न फैले। साथ ही प्रशासन ने इस बीमारी से संबंधित दवाएं और टेस्ट किट का एडवांस में ही स्टॉक रख लिया है। अस्पताल में बीमारी की जांच से लेकर दवाएं मुफ्त उपलब्ध करवाई जाएंगी। आइजीएमसी के असिस्टेंट प्रो. एंड सेंट्रल स्टोर इंचार्ज डॉ. राहुल गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वाइन फ्लू से पीडि़त मरीजों के इलाज के लिए दवाएं और टेस्ट किट का इंतजाम किया गया है। अस्पताल में आने वाले मरीजों और तीमारदारों को स्वाइन फ्लू के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है।

क्या है स्वाइन फ्लू और इसके लक्षण

स्वाइन फ्लू एक तेजी से फैलने वाली संक्रामक बीमारी है। यह एक तीव्र संक्रामक रोग है, जो एक विशिष्ट प्रकार के एंफ्लुएंजा वायरस (एच-1 एन-1) के से होता है। पीडि़त मरीज में सामान्य मौसमी सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण होते हैं। नाक से पानी बहना, नाक बंद हो जाना, गले में खराश, सर्दी-खांसी, बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, थकान, ठंड लगना और पेटदर्द इसके लक्षण हैं। इसका संक्रमण रोगी के खांसने, छींकने आदि से निकली हुई द्रव की बूंदों से होता है। रोगी मुंह या नाक पर हाथ रखने के अगर कोई वस्तु छू ले और कोई स्वस्थ्य व्यक्ति उस वस्तु का उपयोग करे तो उसे संक्रमण हो जाता है। संक्रमित होने के पश्चात एक से सात दिन के अंदर लक्षण अधिक दिखने शुरू होंगे।

ऐसे करें बचाव

खांसने वाले रोगी सर्जिकल मास्क का प्रयोग करें। खांसने या छींकने पर रुमाल, या टिश्यू पेपर के साथ मुंह और नाक को कवर करें और उपयोग के बाद रुमाल को धो लें व टिश्यू पेपर का कूड़ादान में निपटान करें। श्वसन स्त्रावों और दूषित वस्तुओं के संपर्क में आने के बाद हाथ को साबुन और पानी से साफ करें। अति आवश्यक न होने पर भीड़ वाले क्षेत्र में जाने से बचें। खांसने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित करें कि दूसरों से कम से कम तीन फीट की दूरी रखकर बात करें।

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