टाण्डा मेडिकल कॉलेज ने एम्बुलेंस पर ही ठोंक दिया “जजिया”
February 29th, 2020 | Post by :- | 202 Views

■ …चुल्लू भर ऑक्सीजन मिलेगी क्या ?

★ टाण्डा मेडिकल कॉलेज ने एम्बुलेंस पर ही ठोंक दिया “जजिया”
————————

जो एम्बुलेंस हर टोल नाके पर भी नाक की सीध में दनदनाती हुई निकल जाती हैं,टाण्डा मेडिकल कॉलेज में उनके खड़े होने पर ही जजिया ठोंक दिया है। निजी स्वयंसेवी संस्थाओं की एम्बुलेंसेस को टीएमसी के आंगन में खड़े होने की कीमत अदा करनी होगी। अब जो भी एम्बुलेंस टाण्डा से मरीज को सेवा देगी,उससे टाण्डा एडमिनिस्ट्रेशन 10 हजार रुपए लेगी। हैरानगी की बात यह भी है कि इन 10 हजार रुपयों में से 5 हजार रुपए तो बतौर सिक्युरिटी वापस हो जाएंगे, मगर बकाया 5 हजार रुपए प्रशाशन के पास ही रहेंगे।
तर्क यह है कि एडमिनिस्ट्रेशन के पास जमा होने वाले रुपयों से उन मरीजों की मदद की जाएगी जो घर वापसी के लिए किराया भी नहीं रख पाते। यह उसी सरकार के तहत चलने वाला प्रशाशन है जो यह दावे करती है कि वह हर मरीज के लिए वह सब करती है जो शायद भगवान ही कर सकते हैं।

सवाल उठता है कि आखिर टाण्डा की अफसरशाही क्या यह साबित करना चाहती है कि हिमाचल सरकार कुछ नहीं कर रही,जो मजबूरी में इनको यह सब करना पड़ रहा है ? क्या सच मे निःशुल्क एम्बुलेंस सेवाएं 108 और 102 की हालत इतनी खराब है कि यह मरीजों की सेवा के लायक ही नहीं बची हैं ? जमा रहने वाले 5 हजार रुपयों में यह भी कहा गया है कि कॉलेज केम्पस के भीतर से अस्पताल तक किन्ही डॉ साहब को उनके घर से मरीज तक लाना पड़ता है,तो उसका किराया भी इसी मद से दिया जाएगा। कौन से डॉक्टर साहब ऐसे होंगे जो मरीज तक आने के लिए अपनी गाड़ी एक-आधा किलोमीटर भी नहीं चलाना पसन्द करेंगे ?

धन्य है अफसरशाही। टाण्डा मेडिकल कॉलेज तो इससे चलता नहीं,टैक्सी यूनियन की तरह एम्बुलेंस चलाने के लिए तैयार हो गई है। टाण्डा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ भानु अवस्थी यह स्वीकार करते हैं कि उनकी अध्यक्षता में रोगी कल्याण समिति की बैठक हुई थी और उसी में यह तय हुआ था। आगे के सवालों के लिए वह अस्पताल के एमएस डॉ सुरेंद्र सिंह से बात करने के लिए कहते हैं।

डॉ सिंह भी सवालों के जवाब में इतना ही कहते हैं कि यह तो अभी होना है,हुआ नहीं है। अगली बैठक में ही तय होगा। इसके बाद वह भी फोन का रिसीवर रख देते हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस चिठ्ठी की वजह से यह चिठ्ठा खुला है उसमें आरकेएस के कुल बारह सदस्यों में से चार ही बैठक में मौजूद बताए गए हैं। फिर भी फैसला हो गया।

खैर, यह हो भी सकता है। क्योंकि रात को दो बजे हुई इस बैठक में कौन आता ? यकीन न हो तो आप चिट्ठी देख लें। इसमें लिखा गया है कि 20-2-2020 को रात 2 बजे ( 2 AM ) हुई बैठक में यह तय हुआ है । टाण्डा की अफसरशाही ने अपने पक्ष में कई हास्यास्पद बयान भी दिए हैं । इनका खुलासा फिर सही। फिलवक्त तो अफसरशाही से असल सवाल अब यह है कि,
” चुल्लू भर ऑक्सीजन मिलेगी क्या… ”

Source: Darasal (fb)

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे news4himachal@gmail.com पर भेजें। इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है।