देव धुन पर नाच लिया सुख-समृद्धि का आशीर्वाद #news4
August 19th, 2022 | Post by :- | 95 Views

रोहड़ू : देवता साहिब पुजारली महादेव व देवता जाबल नारायण के सान्निध्य एवं लोगों की आस्था का प्रतीक भंफड मेला शुरू हो गया है। भादो मेले के नाम से आयोजित होने वाले इस मेले को जिगाह मेले के नाम से भी जाना जाता है। लोक मान्यता के आधार पर यह मेला पुजारली महादेव के नाम से मनाया जाता है। इस मेले में जिगाह नाली के सबसे बड़े देवता जाबल नारायण शिरकत करते हैं।

मेले में पूरे नाली क्षेत्र के 35 गांवों के लोग शामिल होते हैं। इसके लिए देवता जाबल नारायण एक सप्ताह पहले ही अपने स्थायी मंदिर नारायण कोटी जाबल से अपने देवलुओं के साथ दौरे पर निकलते हैं। जो 18 अगस्त को भंफड स्थित ऐतिहासिक स्थान पर पहुंचते हैं। तीन दिन तक आयोजित होने वाला यह मेला दो दिन मटवाणी स्थित भंफड कुपड में आयोजित होता है। वहीं तीसरे दिन इंटाली नामक स्थान पर इस मेले का समापन हो जाता है। इस तीन दिवसीय देव आयोजन में सभी गांवों के लोग एकत्र होकर देवधुन पर झूमने का आनंद लेते हैं और देवता से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

मेले के आयोजन का इतिहास

आदिकाल में जब लोगों का मुख्य व्यवसाय केवल कृषि व भेड़पालन हुआ करता था तो पूरा साल लोग मेहनतकश जीवन में व्यस्त रहते थे। वहीं सावन के महीने में लोगों के कृषि संबंधी अधिकतर काम भी पूरे हो जाते थे। जिस पर लोगों ने अपने मनोरंजन के लिए इस मेले को मनाने की परंपरा को शुरू किया था। वहीं देवता को इस महोत्सव में शामिल करने से भेड़पालकों ने पवित्र फूलों को भेंट करना एक परंपरा के रूप में शुरू किया जो आज भी प्रचलित है। लोक मान्यता व संस्कृति का परिचायक

यह मेला रोहडू उपमंडल में तहसील स्तर का दर्जा लिए हुए है। मेले का मुख्य आकर्षण भेड़पालकों की ओर से देवता जाबल नारायण एवं देवता महादेव को पवित्र एवं दुर्लभ एवं सुगंधित पुष्प मालाओं को भेंट करने की परंपरा है। अपने कुल देवता को भेड़पालक इन फूलों को अधिकतम ऊंची चोटियों से लाते हैं। इन पुष्प मालाओं में दुर्लभ किस्म का ब्रह्माकमल, सुंपाली व नेसर शामिल रहता है। ये दुर्लभ पुष्प केवल मेले के दिन ही देवता को पुष्पहार के रूप में पहनाया जाता है। इस मेले में हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा होकर संस्कृति को जीवित रखने के साथ सामाजिक रीति-रिवाजों एवं परंपराओं को साझा करते हैं।

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