मेडिकल कालेज नाहन में चरमराई स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था, अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को दी जा रही 40 से 45 दिनों की डेट #news4
January 15th, 2022 | Post by :- | 57 Views

नाहन : जिला सिरमौर आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरसा रहा है। 6 वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने जिला सिरमौर के लिए मेडिकल कालेज दिया। जिला सिरमौर की कांग्रेस तथा भारतीय जनता पार्टी दोनों ही इस मेडिकल कालेज का समय-समय पर श्रेय लेती रहती है कि उन्होंने मेडिकल कालेज को खुलवाया। मगर वास्तविकता में मेडिकल कालेज में स्वास्थ्य लाभ लेना मरीजों के लिए आसमान से तारे तोड़ने जैसा है। क्योंकि मेडिकल कालेज में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बद से बदतर हो चुकी है। यहां पर कभी ओपीडी में डाक्टर नहीं मिलते, कभी यहां के चिकित्सक निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस करते पकड़े जाते हैं। तो अल्ट्रासाउंड के लिए यहां पर रोगियों को एक से 2 महीने की तारीख दी जा रही है।

यदि किसी मरीज को पथरिया व अन्य कोई बीमारी हो या आपातकालीन स्थिति में मेडिकल कालेज लाया जाता है। तो भी उसका अल्ट्रासाउंड नहीं होता। उसे अल्ट्रासाउंड के लिए डेट पर डेट दी जाती है। चाहे तब तक मरीज की जान ही क्यों ना चली जाए। मजबूरन मरीज को निजी लेबोरेटरी में जाकर अल्ट्रासाउंड महंगे दामों पर करवाना पड़ता है। पिछले कुछ दिनों से जिला सिरमौर में सैकड़ों लोग विभिन्न बीमारियों को लेकर अल्ट्रासाउंड करवाने पहुंचते हैं। जहां पर उन्हें 40 से 45 दिन बाद की डेट दी जा रही है। जिला सिरमौर के लोगों के लिए यह मेडिकल कालेज अब परेशानी का सबब बनता जा रहा है। मेडिकल कालेज बनने से पहले जब तक यह जिला अस्पताल था। तब तक लोगों को यहां पर बेहतर सुविधाएं मिल जाती थी। मगर मेडिकल कालेज बनने के बाद से यहां पर स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है।

सिरमौर में प्रदेश सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे फेल होते नजर आते हैं। दुर्घटना के समय लाए जाने वाले मरीजों के लिए यह मेडिकल कालेज मात्र रेफर अस्पताल बनकर रह गया है। यहां पर दुर्घटना वाले मरीजों को किसी भी तरह का उपचार या उनके आपरेशन नहीं होते। उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ या आइजीएमसी रेफर कर दिया जाता है। उधर जब इस संदर्भ में मेडिकल कालेज नाहन के एमएस डॉ श्याम कोशिक से बात की गई तो उन्होंने माना कि मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड को लेकर 1 महीने के बाद की डेट दी जा रही है। क्योंकि मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड के लिए एक ही मशीन व दो ही रेडियोलॉजिस्ट है। काफी समय से सरकार व स्वास्थ्य विभाग से अल्ट्रासाउंड मशीन की मांग कर रहे हैं कि उन्हें आधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीन मिले। ताकि अधिक रोगियों के अल्ट्रासाउंड समय पर हो सके। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार से चार से पांच रेडियोलाजिस्ट की मांग भी की है। ताकि मेडिकल कालेज आने वाले सभी रोगियों के समय पर अल्ट्रासाउंड व अन्य टेस्ट हो सके।

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