हंगरी में पदक जीतने वाले नवराज सहित 14 खिलाडिय़ों को स्कूल ने निकाला
September 26th, 2019 | Post by :- | 154 Views

बिलासपुर स्कूल के प्रधानाचार्य जीवन ज्योति का कहना है कि खिलाडिय़ों को स्कूल में समय पर नहीं आने के अलावा स्कूल से गैरहाजिर रहने के चलते निकाला गया है। इससे तरह से अनुशासन भंग होता है और शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार उन्होंने नियमों का पालन किया है।
देश के दूसरे राज्यों में खेलों में नाम कमाने वाले खिलाडिय़ों को जहां सिर आंखों पर बिठाया जाता है, वहीं, हिमाचल में इसके उलट हो रहा है। मामला हिमाचल के बिलासपुर का है। यहां हंगरी में इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतने वाले खिलाड़ी को स्कूल से निकाल दिया गया। हंगरी में मेडल विजेता नवराज चौहान स्कूल प्रशासन की बेरुखी का शिकार होने वाला इकलौता खिलाड़ी नहीं है। उसके अलावा, 14 अन्य खिलाडिय़ों को शिक्षा विभाग ने स्कूल से बाहर किया है।
जानकारी के अनुसार, आरोप है कि करीब 20 दिन अध्यापकों ने उन्हें स्कूल का गेट क्रॉस करने नहीं दिया। यहां तक कि प्रधानाचार्य सहित अध्यापकों ने मानसिक तौर पर प्रताडि़त कर अन्य स्कूल को प्रमाणपत्र लेकर जाने पर विवश किया। नवराज चौहान ब्वॉयज स्कूल बिलासपुर में 11वीं का छात्र था। उसने एक हिंदी न्यूज चैनल को दूरभाष पर बताया पर बताया कि वह बिलासपुर में ही पढऩा चाहता था, मगर स्कूल प्रबंधन ने उसे मानसिक तौर पर परेशान किया और स्कूल छोडऩे पर विवश किया। वह आजकल चंडीगढ़ में एक खेल शिविर प्रतियोगिता के लिए बॉक्सिंग का अभ्यास कर रहा है। जूनियर वर्ग के 52 किलो भार वर्ग में देशभर में रैंकिंग में नवराज का दूसरा स्थान है। वर्तमान समय में खेलो इंडिया केंद्र के बिलासपुर साईं हॉस्टल में 21 खिलाड़ी ब्वायज स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इनमें से कबड्डी और बॉक्सिंग के राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर के 14 खिलाडिय़ों को को स्कूल से निकाल बाहर का रास्ता दिखा दिया है। ये खिलाड़ी में अंतराष्ट्रीय स्तर पर जूनियर वर्ग में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। खिलाडिय़ों और उनके प्रशिक्षकों का आरोप है कि उन्हें प्रतिदिन अभ्यास करने अतिरिक्त खेल शिविर लगाने में भाग लेने के अलावा प्रतियोगिताओं में जाना होता है। इसके लिए उन्हें स्कूल प्रशासन ने सहयोग नहीं किया और स्कूल छोडऩे का दबाव बनाया है। आरोप है कि स्कूल प्रधानाचार्य अक्सर उन्हें कहकर प्रताडि़त करते हैं कि तुम साईं के लिए खेलते हो, स्कूल के लिए नहीं।

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