बीमारियों से बचने और सम्मान देने के लिए पुराने समय से चली आ रही है नमस्ते करने की परंपरा
March 6th, 2020 | Post by :- | 168 Views

इन दिनों दुनियाभर में कोरोनावायरस का भय फैला हुआ है। लोग अब हाथ मिलाने से बच रहे हैं और लोगों को अभिवादन करने के लिए नमस्ते करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार हिन्दू धर्म में बनी परंपराओं के पीछे धार्मिक के साथ ही वैज्ञानिक महत्व भी बताए गए हैं। जैसे दूसरों को नमस्ते करने से उसके प्रति हमारा सम्मान दिखाई देता है और हम दूसरों की बीमारी के संक्रमण से भी बच जाते हैं। जानिए इस पंरपरा से जुड़ी खास बातें…

नमस्ते का अर्थ

नमस्ते का सरल अर्थ यह है कि दूसरों के सामने नम यानी नम्र होना, हमारे मन में सामने वाले व्यक्ति के लिए झुकने का भाव होना ही नमस्ते कहलाता है।

कैसे करना चाहिए नमस्ते

किसी व्यक्ति से नमस्ते करते समय हमें अपने दोनों हाथों की एक जैसी स्थिति में रखना चाहिए। सभी उंगलियों और अंगूठे एक समान रखकर दोनों हाथों को मिलाना चाहिए। इसके बाद दोनों हाथों को अपनी हृदय से लगाकर रखना चाहिए। इसका भाव यही है कि हम हमारे हृदय से आपका सम्मान करते हैं, आपके सामने हम नम हैं यानी विनम्र हैं।

ये है नमस्ते का मनोवैज्ञानिक कारण

भारत में हाथ जोड़ कर प्रणाम करने की परंपरा का वैज्ञानिक कारण भी है। हाथ जोड़ कर आप जोर से बोल नहीं सकते, अधिक क्रोध नहीं कर सकते और भाग नहीं सकते। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें हमारे शरीर और मन पर मनोवैज्ञानिक दबाव रहता है। इस तरह से अभिवादन करने पर आप सामने वाला व्यक्ति के प्रति अपने आप ही विनम्र हो जाते हैं।

स्वास्थ्य के लिए है फायदेमंद

इस विधि से प्रणाम करने पर हम दूसरों से सीधे संपर्क में नहीं आते हैं। दूर से ही नमस्ते करने पर दोनों लोगों का शरीर एक-दूसरे से स्पर्श नहीं होता है। ऐसी स्थिति में अगर किसी एक व्यक्ति को कोई बीमारी है तो वह दूसरे व्यक्ति तक नहीं पहुंचती है। ये परंपरा बीमारियों को फैलने से रोकने में बहुत कारगर है। इसीलिए दुनियाभर में आज इस विधि से ही अभिवादन करने पर जोर दिया जा रहा है।

ये हैं नमस्ते करने का आध्यात्मिक कारण

पं. शर्मा के अनुसार दाहिना हाथ आचार धर्म और बायां हाथ विचारों का होता है। नमस्कार करते समय दायां हाथ बाएं हाथ से जोड़ना होता है। शरीर में दाईं ओर इडा और बाईं ओर पिंगला नाड़ी होती है। इसलिए नमस्कार करते समय इडा और पिंगला के पास पहुंचती है और सिर श्रृद्धा से झुका होता है। हाथ जोड़ने से शरीर के रक्त संचार का प्रवाह व्यवस्थित होता है। विचारों की सकारात्मकता बढ़ती है और नकारात्मक विचार खत्म होते हैं।

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