रेबीज का कोई ईलाज नहीं केवल बचाव संभवः डाॅ. विषाल ठाकुर
September 28th, 2019 | Post by :- | 229 Views

मंडी, 28 सितंबर : रेबीज का कोई भी ईलाज नहीं तथा इसका ईलात केवल बचाव ही संभव है। रेबीज के बारे में जानकारी होनी चाहिए ताकि इस बीमारी से बचा जा सकें । विष्व रेबीज दिवस जो राजकीय माध्यमिक पाठषाला टावां (नेरचैक) में स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से आयोजित किया गया जिसमें स्कूल के छात्रों व अध्यापकों को सम्बोधित करते हुए जोनल अस्पताल मण्डी के कार्यक्रम अधकारी डाॅ. विषाल ने कहा कि आज रेबीज के बारे में जनमानस को जागरूक करना जरूरी है क्योंकि इस बिमारी का पूरी दुनिया में कोई ईलाज नहीं । यह बीमारी पागल कूत्तों, बिल्लियों, चमगादड़ों, गीदडों व नेवलों के काटने से फैलती है बेषर्ते जानवर रेबीज बीमारी से सक्रमित हो । उन्हेांने घरों में पालतू जानवरों को हर वर्ष रेबीज विरोधी टीकें लगाने की सलाह दी। इस मौके पर स्वास्थ्य षिक्षक एनआर ठाकुर ने कहा कि भारत में हर बर्ष 70 लाख लोगों को कुत्ते काटते है, जिनमे से 20 हजार लोगों की मौत रेबीज से हो जाती है । दुनियां में रेबीज से होने वाली 55 हजार मौतों में से 20 हजार मौतें अगर भारत में हो रही है तो यह हम सब के लिए चिन्ता का विषय है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने 2020 के अन्त तक रेबीज को खत्म करने का संकल्प लिया है, क्योंकि यह देष के लिए एक बड़ी जन स्वास्थ्य समस्या उभर कर सामने आई है। 97 प्रतिषत रेबीज कुत्तों के काटने से ही फैलती है। ठाकुर ने कहा कि हमें अपने पालतू कुत्तों व बिल्लियों के साथ बुरा बर्ताव नहीं करना चाहिए क्योंकि कुत्ता हमें तब काटता है जब वह गुस्से में होता है या डरा हुआ होता है । कुत्ता हमारा मित्र है लेकिन अपनी रक्षा के लिए वह आदमी पर आक्रमण करता है इसलिए उसे लात मारना, उसकी पंुछ खिचना या पत्थर मारना उसे आक्रमण के लिए मजबूर करता है। जन षिक्षा एवं सूचना अधिकारी मण्डी पूर्ण चन्द ने कहा कि यदि कुत्ते ने व्यक्तियों को काट लिया हो तो घाव को अच्छी तरह पानी व साबुन से धो लेना चाहिए तथा घाव को खुला रख कर तुरन्त अस्पताल जाकर एन्टी रेबीजं बैक्सीन के टीकें लगाने चाहिए। उन्होंने रेबीज से बचने के लिए कब टीकाकरण करना चाहिए और जानवरों से अपने आप को कैसे सावधान रखना चाहिए बारे में विस्तार पूवर्क जानकारी दी।स्कूल के प्राधानाचार्य नीलम लखन पाल ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे।

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