आधुनिकता की दौड़ में आज भी सिरमौर में जीवित हैं ये परंपराएं #news4
November 5th, 2021 | Post by :- | 149 Views

नाहन : आधुनिकता की चकाचौंध से भरपूर जिंदगी में जिला सिरमौर में आज भी परंपराएं जीवित हैं। जिला सिरमौर में आज भी वर्षों पुराने पारंपरिक व्यंजन दीपावली पर बनाए जाते हैं। जिला के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में सभी दीवाली की रात के समय मुहूर्त अनुसार एकत्रित होकर बलराज जलाते हैं। उसके बाद सभी गांव के स्थानीय मंदिर में जाकर सुख समृद्धि तथा विश्व शांति के लिए अपने ग्राम तथा कुलदेवता से प्रार्थना करते हैं।

सिरमौर जिला में पारंपरिक रीति-रिवाजों से भाईदूज के दिन सास को भेंट देने के लिए तैयार उपहार।

जिला सिरमौर में दीपावली पर विशेष पकवान कांजन बनाया जाता है। कांजन लस्सी व चावल को एक साथ पका के बनाई जाती है, जिसे बाद में बर्तन में केलों के पत्ते में एक टोकरी में दबा कर दो दिन तक रख दिया जाता है। उसके बाद कांजन को बर्फी के पीस की तरह काटकर खाने के लिए दिया जाता है। जब भाई दूज को दामाद अपनी सास ससुर को भेंट देने आते हैं, तो उन्हें शक्कर, घी तथा गुड़ की शरबत के साथ कांजन दी जाती है। दामाद अपने सास-ससुर को भेंट स्वरूप खेल, पतासे, गुड़, खिलें व अखरोट आदि का एक पैकेट बनाकर विधि-विधानपूर्वक सास ससुर के चरण स्पर्श कर उन्हें भेंट करते हैं। नए बच्चों को अभिभावक अपने रिश्तेदारों के घर दीवाली के बाद अवश्य ले जाते हैं, ताकि उन्हें परंपराओं से अवगत करवाया जा सके। जिला सिरमौर के श्रीरेणुकाजी तथा शिलाई क्षेत्र में दीपावली के स्थान पर एक माह बाद बूढ़ी दीवाली मनाई जाती है। क्योंकि पूर्व में यह बहुत ही पिछड़े क्षेत्र थे। जहां पर भगवान राम के अयोध्या वापस आने की सूचना एक माह बाद मिली। इसलिए वर्षों से जिला सिरमौर के गिरीपार क्षेत्र में दीपावली के एक माह बाद बूढ़ी दीवाली पारंपरिक तरीके मनाई जाती है।

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